मेरे बड़े भाई मेरे लिए सबकुछ थे। आजतक जो भी हासिल किया, उन्हीं की मदद से किया है। अब वो नहीं रहे तो मैं किसके सहारे जीऊंगा? यह कहते-कहते अरविंद सेठिया की आंखों में आंसू और आवाज भर आती है। दरअसल, बुधवार की सुबह 4 बजे इंदौर में जलकर 8 लोगों की मौत हो गई, जिनमें किशनगंज के एक परिवार के 6 लोग हैं। अब इस परिवार में सिर्फ 6 लोग बचे हैं। मृतकों की पहचान विजय सेठिया (65), उनकी पत्नी सुमन सेठिया (60), बेटी रुचिका (30), भतीजा कार्तिक (25), नाती तान्य(14) और नतिनी राशि(12) के रूप में हुई है। बेसुध पड़ी कार्तिक की मां की हालत बेहद खराब है। बेटे की याद आते ही वह फूट-फूटकर रो पड़ती हैं। बार-बार एक ही बात दोहराती हैं, मेरा बड़ा बेटा कार्तिक चला गया। अब हम पति-पत्नी कैसे जिएंगे? हमारा पूरा घर उजड़ गया। हमारी दुनिया ही खत्म हो गई। अब जिंदगी का मकसद क्या बचा है? हमलोग बर्बाद हो गए। घर वालों का कहना है कि भगवान ने हमारे साथ गलत किया है। अब घटना से जुड़ी तस्वीरें देखिए… अब सिलसिलेवार तरीके से पढ़िए पूरी घटना… विजय सेठिया के माउथ कैंसर का हुआ था ऑपरेशन विजय सेठिया को 2023 में माउथ कैंसर हो गया था। सेकेंड स्टेज होने की वजह से इनका इलाज इंदौर के कैंसर हॉस्पिटल में चल रहा था। यहां विजय सेठिया की बहन और बहनोई रहते थे। 20 दिन पहले विजय सेठिया अपनी पत्नी सुमन सेठिया के साथ किशनगंज से इंदौर के लिए निकले थे। 5 दिन पहले विजय सेठिया का कैंसर का ऑपरेशन हुआ था। सक्सेसफुल ऑपरेशन के बाद घर के लोगों में खुशी थी। एक दिन पहले बेटी-भतीजा मिलने आए थे विजय सेठिया को देखने 17 मार्च की सुबह किशनगंज से बेटी रुचिका, भतीजा कार्तिक, नाती तान्य और नतिनी राशि ट्रेन से इंदौर पहुंचे थे। 17 मार्च को घर में खुशी थी। बच्चों को देखकर विजय सेठिया भी खुश थे। विजय सेठिया की बहू प्रियंका सेठिया ने बताया, ‘रात 11 बजे मैंने मां को फोन कर वहां का हाल जाना था। वहां सभी लोग बहुत खुश थे। फोन पर हंसी की आवाज आ रही थी। देर रात करीब 1 बजे तक पूरा परिवार जगा था। इसके बाद सब अपने-अपने कमरे में सोने चले गए।’ चार्जिंग से शॉर्ट सर्किट… चिंगारी से शुरू हुई तबाही रातभर चार्जिंग पर लगी इलेक्ट्रिक कार इस हादसे की पहली कड़ी बनी। पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया कि देर रात चार्जिंग पॉइंट पर शॉर्ट सर्किट हुआ, जिसने कार के इलेक्ट्रिकल सिस्टम को जला दिया। EV बैटरियों में एक बार आग लगने पर उसे काबू करना बेहद मुश्किल होता है, क्योंकि बैटरी सेल्स में लगातार रिएक्शन चलता रहता है। इसी दौरान बैटरी में ब्लास्ट हुआ और आग ने बढ़ती चली गई। कार घर के बिल्कुल पास खड़ी थी, जिससे लपटें सीधे दीवारों और ऊपरी मंजिलों तक पहुंच गईं। कुछ ही मिनटों में पूरा मकान जल गया। सिलेंडर ब्लास्ट से और तेजी से फैलनी लगी आग आग की लपेट में घर में रखे सिलेंडर तक आ गए। सिलेंडर में ब्लास्ट होने लगा। धमाके इतने जोरदार थे कि आसपास के इलाके में दहशत फैल गई और पड़ोस के मकान का एक हिस्सा तक क्षतिग्रस्त हो गया। सिलेंडर ब्लास्ट के साथ ही एसी और फ्रिज के कंप्रेसर भी फट गए। घर के लॉक नहीं खुले, फंस गया परिवार हादसे का सबसे दर्दनाक पहलू यह रहा कि परिवार के पास बच निकलने का मौका होते हुए भी वे बाहर नहीं आ सके। घर में लगे इलेक्ट्रॉनिक लॉक ने बिजली सप्लाई बंद होते ही काम करना बंद कर दिया। आमतौर पर ऐसे लॉक में बैकअप सिस्टम होना चाहिए, लेकिन यहां वह काम नहीं आया या शायद मौजूद ही नहीं था। इसके अलावा, घर में लगी लोहे की जालियां भी बाहर निकलने में बड़ी बाधा बन गईं। आग, धुएं और लगातार हो रहे धमाकों के बीच परिवार अंदर ही फंस गया। बचाव दल को दरवाजे और ग्रिल काटकर अंदर पहुंचना पड़ा, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। यही वजह इस हादसे को और ज्यादा भयावह बना गई। छत की ओर भागे, लेकिन रास्ता बंद मिला हादसे के वक्त पूरा परिवार नींद में था। आग लगने के बाद जान बचाने के लिए सभी लोग छत की ओर भागे, लेकिन दरवाजा अंदर से लॉक था, इसलिए वह खुल नहीं सका। बाहर लगी जालियां और मजबूत कांच के कारण रेस्क्यू टीम भी समय पर अंदर नहीं पहुंच पाई। पड़ोसियों के घर के रास्ते निकालने की कोशिश हादसे के दौरान मनोज पुगलिया ने परिवार के कुछ लोगों को पड़ोसियों के घर के रास्ते बाहर निकालने की कोशिश की। इसके बाद वह दोबारा घर के अंदर गए, लेकिन धुएं के कारण ज्यादा देर तक नहीं टिक सके। छत का दरवाजा अंदर से बंद था, जो नहीं खुल पाया। अगर यह दरवाजा खुल जाता, तो संभव है कि कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी। आग लगते ही घर में घुआं फैल गया, कुछ नहीं दिख रहा था
मनोज के मंझले बेटे सौमिल ने बताया कि आग लगते ही पूरे घर में धुआं फैल गया। अंधेरा होने के कारण कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। बड़े भाई सौरव ने सभी को आवाज लगाकर उठाया। आग की लपटों के बीच हमें समझ नहीं आ रहा था कि क्या किया जाए। आग इतनी भयानक थी कि उससे बच पाना मुश्किल लग रहा था। नीचे का दरवाजा बंद था, पर बालकनी का दरवाजा खुला था। भाई सौरव, मां सुनीता, छोटा भाई हर्षित और मैं बालकनी तक पहुंचे और बचाओ-बचाओ आवाज लगाई। सबसे नीचे किचन के पास कमरे में 2 शव मिले पहली मंजिल पर एक महिला (रूचिका) और तीन बच्चों के शव बरामद हुए। छत पर 2 लोगों के शव मिले, जो बुरी तरह जल चुके थे। शुरुआती जांच में सामने आया है कि नीचे और ऊपर के कमरों में सो रहे लोगों की दम घुटने से मौत हुई, जबकि छत पर मिले शव आग में झुलस गए। गैस गीजर के लिए रखे थे 15 कमर्शियल सिलेंडर बताया जा रहा है कि घर में 15 गैस सिलेंडर रखे हुए थे। ये सभी कमर्शियल सिलेंडर हैं। घर में काम करने वाली एक कर्मचारी ने बताया कि घर में सभी के कमरे अलग-अलग हैं। सभी के बाथरूम भी अलग ही हैं। और इनमें लगे गीजर गैस से ही चलते हैं। इसके अलावा घर के कई काम इन्हीं सिलेंडर से होते थे। इनमें से दो सिलेंडर में ब्लास्ट हुआ था। इसकी आवाज पूरी कॉलोनी में सुनाई दी थी। ब्लास्ट होने के बाद सिलेंडर घर की छत और दीवारों से टकराकर वही रह गए। इस वजह से घर में गैस फैल गई और आग ने विकराल रूप ले लिया। जानिए किशनगंज में परिजनों को कब मिली सूचना किशनगंज में मृतक की विजय सेठिया की बहू प्रियंका सेठिया को उनके रिश्तेदार सुबह 5 बजे फोन कर घटना की जानकारी दी। खबर मिलते ही बेटे और कई रिश्तेदार किशनगंज से इंदौर के लिए रवाना हो गए। बता दें कि रुचिका की बेटी राशि जैन क्लास 5 और बेटा तन्य क्लास 1 में बाल मंदिर सीनियर सेकेंडरी स्कूल में पढ़ता था। वहीं, मृतक विजय सेठिया का भतीजा कार्तिक सेठिया बाल मंदिर स्कूल में क्लास 10 में पढ़ता था। छोटी दुकान से शुरू कर शहर में बनाई पहचान पड़ोसी दुकानदार सौरभ ने बताया कि मृतक विजय सेठिया ने अपनी पूरी जिंदगी मेहनत और संघर्ष में गुजारी। करीब 20 सालों तक उन्होंने किशनगंज में कॉस्मेटिक की दुकान चलाकर अपने परिवार का पालन-पोषण किया। यह कारोबार ही उनके परिवार की रोजी-रोटी का मुख्य सहारा था। शुरुआत आसान नहीं था। उन्होंने बहादुरगंज में एक छोटी सी कॉस्मेटिक दुकान से काम शुरू किया था। सीमित साधन, कम पूंजी और बड़ी जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने धीरे-धीरे अपने कारोबार को आगे बढ़ाया। समय के साथ उनकी मेहनत रंग लाई। कारोबार बढ़ा तो उन्होंने किशनगंज शहर में अपनी दुकान स्थापित की, जहां उनकी एक अलग पहचान बन गई। ग्राहक उनके व्यवहार और भरोसे की वजह से उनसे जुड़े रहे। उन्होंने बताया कि इस सफर में परिवार के अन्य सदस्य भी उनके साथ खड़े रहे। पत्नी, बच्चे और रिश्तेदार सभी इस कारोबार में हाथ बंटाते थे। यही वजह थी कि दुकान सिर्फ कमाई का जरिया नहीं, बल्कि पूरे परिवार को जोड़कर रखने का माध्यम भी था। लेकिन एक हादसे ने इस पूरे संघर्ष और सालों की मेहनत को पल भर में खत्म कर दिया। अब वह दुकान, वह मेहनत और वह पहचान सब कुछ एक दर्दनाक याद बनकर रह गया है। नए मकान में जाने का सपना नहीं हो सका पूरा पड़ोसी दुकानदार सौरभ आगे बताया, विजय सेठिया की पूरी जिंदगी एक ही ख्वाहिश के इर्द-गिर्द घूमती रही कि अपना घर हो। करीब 30-40 साल उन्होंने किशनगंज में किराए के मकान में गुजारे। छोटे-छोटे कमरों में बड़े परिवार को समेटकर रहते हुए भी उनके चेहरे पर हमेशा एक उम्मीद रहती थी कि एक दिन अपना पक्का घर होगा। लंबे संघर्ष, मेहनत और बचत के बाद आखिरकार उन्होंने महावीर मार्ग रोड पर जमीन खरीदी। यह सिर्फ जमीन नहीं थी, बल्कि उनके सपनों की नींव थी। धीरे-धीरे उस जमीन पर दीवारें उठीं, छत डली और मकान लगभग तैयार हो गया। परिवार में इस बात की खुशी थी कि अब वे अपने घर में शिफ्ट होंगे। जिस घर में जाने के लिए उन्होंने पूरी जिंदगी इंतजार किया, उस घर में कदम रखने से पहले ही जिंदगी ने साथ छोड़ दिया। एक पल में सब कुछ खत्म हो गया सपना भी, संघर्ष भी और वह खुशी भी, जिसका इंतजार सालों से था। आज महावीर मार्ग पर खड़ा वह नया मकान सिर्फ ईंट-पत्थर का ढांचा बनकर रह गया है, जिसमें अब कभी उस परिवार की हंसी नहीं गूंजेगी। रिश्तेदारों ने बयां किया हादसे का दर्द राकेश कुमार बताते हैं, ‘मेरा भगिना एक दिन पहले ही इंदौर पहुंचा था। सुबह शॉर्ट सर्किट से आग लगी। घर के अंदर सिलेंडर रखे थे, आग लगते ही धमाका हो गया। सबसे बड़ा दुख ये है कि इलेक्ट्रिक डोर होने की वजह से कोई भी बाहर नहीं निकल पाया, सब लोग अंदर ही फंसे रह गए।’ वहीं, परिवार के करीबी पवन कुमार भी इस हादसे को याद कर भावुक हो जाते हैं। वे कहते हैं, ‘विजय सेठिया अपने पूरे परिवार के साथ माउथ कैंसर का इलाज कराने गए थे। लेकिन वहां आग लगने से सब खत्म हो गया। 8 लोगों की मौत हो गई ये बहुत बड़ा हादसा है।’ पवन कुछ देर चुप रहते हैं, फिर कहते हैं, ‘विजय जी हमारे बहुत करीबी दोस्त थे। मैं उनके साथ इंदौर वाले घर भी गया था। उनका पूरा परिवार बहुत अच्छा था हंसता-खेलता परिवार था। आज सब कुछ खत्म हो गया।’ अब ग्राफिक्स से जानिए इलेक्ट्रिकल व्हीकल में कैसे आग लगती है, इससे कैसे बचें