शिमला में कांग्रेस नेता ठाकर सिंह भरमौरी हाईकोर्ट से बरी:PM के खिलाफ अभद्र भाषा के प्रयोग का आरोप, जज बोले- विश्वसनीय साक्ष्य नहीं

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कांग्रेस नेता ठाकर सिंह भरमौरी को प्रधानमंत्री के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल कर आचार संहिता और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 तथा भारतीय दंड संहिता के प्रावधानों का उल्लंघन करने के आरोपों से बरी कर दिया है। याचिकाकर्ता भरमौरी ने पुलिस स्टेशन भरमौर में प्राथमिकी के आधार पर चल रहे मामले को रद्द करने की मांग की गई थी। न्यायाधीश संदीप शर्मा ने याचिका को स्वीकारते हुए कहा कि इस कार्रवाई को जारी रखने से न केवल याचिकाकर्ता को अनावश्यक परेशानी होगी, बल्कि उसे एक लंबे मुकदमे की अग्निपरीक्षा से भी गुजरना पड़ेगा। 3 अक्टूबर 2021 को दर्ज हुआ था मामला कोर्ट ने कहा इस मामले में दायर अंतिम रिपोर्ट में याचिकाकर्ता द्वारा इस्तेमाल की गई बेतुकी टिप्पणियों के संबंध में कोई विशिष्ट विवरण नहीं दिया गया है। मामले के अनुसार ठियोग निवासी सुरेंद्र सिंह घोंकरोत्रा, जो भारतीय जनता पार्टी के एक पदाधिकारी हैं, उन्होंने 3 अक्टूबर 2021 को मुख्य निर्वाचन अधिकारी, शिमला को ईमेल के माध्यम से एक शिकायत दर्ज कराई थी। पीएम के खिलाफ अपमानजनक भाषा के प्रयोग का आरोप जिसमें आरोप लगाया गया था कि याचिकाकर्ता ठाकर सिंह भरमौरी ने एक चुनावी भाषण के दौरान प्रधानमंत्री के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया, जिससे उन्होंनेआचार संहिता और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 तथा भारतीय दंड संहिता के प्रावधानों का उल्लंघन किया। कोर्ट ने किया बरी मुख्य निर्वाचन अधिकारी को प्राप्त शिकायत को आगे पुलिस थाना भरमौर, जिला चंबा, हिमाचल प्रदेश को भेज दिया गया, जिसने शिकायत की सामग्री का संज्ञान लेते हुए उस प्राथमिकी को दर्ज करने की कार्रवाई शुरू की थी। जिसे अब रद्द करने की मांग की गई थी। सार्वजनिक शांति भंग के नहीं मिले साक्ष्य वहीं कोर्ट ने मामले से जुड़े रिकॉर्ड का अवलोकन करने पर कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई भी विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है जिससे यह पता चले कि याचिकाकर्ता ने जानबूझकर प्रधानमंत्री का अपमान किया था, और वह भी इस इरादे से कि अन्य लोगों को सार्वजनिक शांति भंग करने या कोई अपराध करने के लिए उकसाया जा सके। भरमौरी के खिलाफ नहीं मिले सबूत प्रस्तुत मामले में, याचिकाकर्ता ने चुनावी भाषण के दौरान प्रधानमंत्री के खिलाफ कुछ टिप्पणियां की थीं, लेकिन ऐसा कोई भी साक्ष्य मौजूद नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि याचिकाकर्ता द्वारा दिए गए उक्त अनुचित भाषण के परिणामस्वरूप, सार्वजनिक शांति में किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न हुई हो।

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