कनाडा में इमिग्रेशन फ्रॉड के दोषी का सरकार पर केस:गुरप्रीत सिंह फर्जी जॉब लेटर बुलात था कनाडा, सजा से पहले कोर्ट ने केस रोका

कनाडा में इमिग्रेशन फ्रॉड के मामले में दोषी पाए गए गुरप्रीत सिंह ने अब सरकार के खिलाफ कोर्ट में केस दायर कर दिया। अदालत ने उन्हें दोषी माना, लेकिन सजा सुनाने से पहले प्रक्रिया में खामी सामने आने पर पूरा केस रोक (स्टे) दिया। CBSA (कनाडा बॉर्डर सर्विस एजेंसी) के अनुसार, गुरप्रीत सिंह ने फर्जी जॉब ऑफर लेटर तैयार कर कई लोगों को कनाडा आने या वहां रहने में मदद की। जांच में ऐसे 30 से अधिक आवेदन सामने आए जो इस फ्रॉड से जुड़े थे। कोर्ट में ट्रायल के दौरान जज ने गुरप्रीत सिंह को दोषी करार दिया था, लेकिन सजा सुनाने से एक दिन पहले जांच प्रक्रिया में हस्तक्षेप से जुड़ा मामला सामने आया। इसके चलते कोर्ट ने केस को स्टे कर दिया। गुरप्रीत सिंह ने जांच पर उठाए सवाल कनेडियन मीडिया के अनुसार 40 वर्षीय पंजाबी मूल के गुरप्रीत सिंह ने, जिसे अदालत ने बड़े इमिग्रेशन घोटाले का दोषी माना था। गुरप्रीत सिंह ने जांच पर सवाल उठाए और अब कनाडा सरकार और बॉर्डर सर्विसेज एजेंसी (CBSA) पर ही दीवानी मुकदमा दायर कर दिया है और मुआवजे के साथ इमिग्रेशन राहत की मांग की है। 2020 में गुरप्रीत की गिरफ्तारी के वक्त CBSA के आरोप CBSA के अनुसार, 34 वर्षीय गुरप्रीत सिंह ने रजिस्टर्ड चैरिटी संस्थाओं का रूप धारण करते हुए फर्जी जॉब ऑफर लेटर तैयार किए और उन्हें मुनाफे के लिए उन लोगों को बेचा, जो कनाडा में प्रवेश पाने या वहां रहने की कोशिश कर रहे थे। ये कथित अपराध 1 जून 2016 से 2 नवंबर 2018 के बीच किए गए। CBSA ने अपनी जांच सितंबर 2018 में शुरू की, जब एक एंट्री पॉइंट पर फर्जी जॉब ऑफर लेटर सामने आया। जांच के दौरान कुल 34 इमिग्रेशन आवेदन ऐसे पाए गए, जो इन फर्जी लेटरों से जुड़े थे। सोशल मीडिया पर हो रहा विरोध दोषी पाए जाने के बावजूद सीबीएसए पर केस दायर करने के बाद कनेडियन मीडिया व सोशल मीडिया में गुरप्रीत सिंह व कनेडियान एजेंसी के खिलाफ लोग खुलकर बोल रहे हैं। लोगों का कहना है कि जिसके खिलाफ सभी सबूत थे फिर भी उसकी सजा पर स्टे लगा दिया गया। यही नहीं उसने अब सरकार पर ही केस कर दिया। गुरप्रीत सिंह के इमिग्रेशन फ्रॉड व केस की अहम बातें सिलसिलेवार जानिए… 1. भक्ति के नाम पर एंट्री, फिर शुरू किया ठगी का धंधा: गुरप्रीत सिंह 10 साल पहले गुरुद्वारा साहिब के कार्यक्रम में शामिल होने के बहाने अस्थायी वीजा पर कनाडा आया था। जांच में सामने आया कि उसने शुरुआत से ही अपने दस्तावेजों में झूठ बोला था। कनाडा में रुकने के बाद उसने बिना अनुमति के अवैध रूप से काम करना शुरू किया और 10 साल तक एक भी डॉलर का टैक्स नहीं भरा। 2. चैरिटी के नाम पर बेचे फर्जी जॉब लेटर: CBSA की जांच के अनुसार, गुरप्रीत ने रजिस्टर्ड चैरिटी संस्थाओं के नाम पर फर्जी जॉब ऑफर लेटर तैयार किए। उसने इन पत्रों को उन लोगों को भारी मुनाफे में बेचा जो कनाडा में वर्क परमिट पाना चाहते थे। 2018 में जब एक एंट्री पॉइंट पर फर्जी लेटर पकड़ा गया, तब इस रैकेट का खुलासा हुआ। जांच में कुल 34 ऐसे इमिग्रेशन आवेदन मिले जो गुरप्रीत के फर्जीवाड़े से जुड़े थे। 3. ‘वेजिटेरियन’ कार्ड और जेल में ड्रामा: ट्रायल के दौरान जब गुरप्रीत जेल में था, तो उसने नया विवाद खड़ा किया। उसने आरोप लगाया कि उसे जेल में मांस खाने के लिए मजबूर किया गया, जो उसके धर्म के खिलाफ है। अदालत में उसने अपना सारा दोष अपने एक पुराने रूममेट पर मढ़ने की कोशिश की, जो पहले ही भारत भाग चुका है। 2022 में उसे धोखाधड़ी और जालसाजी के कई मामलों में दोषी करार दे दिया गया। 4. जज ने माना ‘दोषी’, लेकिन जांच की खामी बनी ढाल: जुलाई 2025 में सस्काटून कोर्ट ऑफ किंग बेंच के जस्टिस नाहिद बरदाई ने एक असाधारण फैसला सुनाया। जज ने स्पष्ट कहा कि वह गुरप्रीत के दोषी होने के प्रति आश्वस्त हैं, लेकिन उन्होंने सजा सुनाने के बजाय मामले पर ‘स्टे’ (रोक) लगा दी। 5. इसका कारण हैरान करने वाला था: जांच के दौरान एक मुख्य CBSA अधिकारी ने खुद पर लगे आरोपों की जांच स्वयं ही शुरू कर दी थी। जज ने इसे “संस्थागत विफलता” और “समाज की निष्पक्षता के खिलाफ” माना। इसी तकनीकी खराबी के कारण गुरप्रीत का कोई आपराधिक रिकॉर्ड दर्ज नहीं हो सका। 6. PR रिजेक्ट हुआ तो शुरू किया कानूनी लड़ाई: सजा से बचने के बाद गुरप्रीत ने ‘मानवीय और सहानुभूति’ के आधार पर स्थायी निवास (PR) मांगा, जिसे अक्टूबर 2025 में खारिज कर दिया गया। अधिकारियों ने तर्क दिया कि उसका परिवार (पत्नी और बेटा) भारत में है और वह वहां शिक्षित और सुरक्षित रह सकता है। 7. मानवाधिकारों के उल्लंघर का आरोप: अब गुरप्रीत ने पलटवार करते हुए कनाडा के अटार्नी जनरल और CBSA पर ‘दुर्भावनापूर्ण अभियोजन’ का मुकदमा किया है। 10 साल कनाडा में रहने के बाद भी वह मीडिया से इंटरप्रेटर के जरिए बात कर रहा है और दावा कर रहा है कि उसके मानवाधिकारों का उल्लंघन हुआ है। 8. आगे क्या होगा? गुरप्रीत सिंह फिलहाल अपने निर्वासन (Deportation) के खिलाफ संघीय अदालत में अपील कर रहा है। यदि वह यह दीवानी मुकदमा जीत जाता है, तो कनाडा सरकार को उसे भारी हर्जाना देना पड़ सकता है। गुरप्रीत सिंह के केस में कब क्या हुआ, टाइम लाइन के हिसाब से जानिए.. जून 2016 – नवंबर 2018: फर्जी जॉब ऑफर लेटर बनाकर इमिग्रेशन फ्रॉड का आरोप लगा। सितंबर 2018: CBSA ने जांच शुरू की। दिसंबर 2019: गुरप्रीत सिंह के खिलाफ औपचारिक आरोप दर्ज। जनवरी 2020: कोर्ट में पहली पेशी। ट्रायल के दौरान: कोर्ट ने आरोपी को दोषी माना। सजा से एक दिन पहले: जांच में प्रक्रिया संबंधी खामी सामने आई। कोर्ट का फैसला: केस स्टे (रोक) कर दिया गया कोर्ट में मुकदमा दायर: गुरप्रीत सिंह ने सरकार पर मुकदमा किया

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