भागलपुर के विक्रमशिला सेतु पर खतरा मंडराया रहा है। गंगा नदी पर बने इस सेतु के पिलर संख्या 17, 18 और 19 की प्रोटेक्शन वॉल तेज बहाव की वजह से क्षतिग्रस्त हो गई है। एक पिलर की प्रोटेक्शन वॉल पूरी तरह से ध्वस्त हो गई है। प्रोटेक्शव वॉल क्षतिग्रस्त होने से सेतु के मुख्य ढांचे को नुकसान पहुंचने की आशंका बढ़ गई है। समय रहते मरम्मत नहीं की गई तो स्थिति और भयावह हो सकती है। इस सेतु का उद्घाटन तत्कालीन मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने साल 2001 में किया था। इस सेतु की लंबाई 4.7KM है। रोजाना एक लाख से अधिक लोग इस पुल से गुजरते है। वहीं, प्रोटेक्शन वॉल क्षतिग्रस्त होने की सूचना डीएम मिली, इसके बाद वो जांच के आदेश दिए हैं। पहले कुछ तस्वीरें देखिए… पहले भी एक्सपेंशन जॉइंट पर गैप आया था इससे पहले भी विक्रमशिला सेतु के अलग-अलग स्पैन के बीच एक्सपेंशन जॉइंट का गैप बढ़ने का मामला सामने आया था। यह गैप 1 से 2 इंच था, जो बढ़कर करीब 6 इंच तक पहुंच गया था। रिटायर्ड इंजीनियरों का मानना है कि गंगा नदी के तेज बहाव, बड़े जहाजों और भारी नावों की आवाजाही के कारण पिलरों पर लगातार दबाव पड़ता है। इस स्थिति में प्रोटेक्शन वॉल क्षतिग्रस्त हुई है। इसका असर पिलर्स पर पड़ेगा। बाढ़ के समय यह दबाव और बढ़ जाता है, जिससे जोखिम कई गुना बढ़ सकता है। डीएम बोले- जांच के लिए टीम को भेजा भागलपुर DM डॉ. नवल किशोर चौधरी ने बताया कि मामले की जानकारी मिली है। जांच के लिए टीम को भेजा जा रहा है और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही संबंधित विभाग की टीम भी मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया है और अपनी रिपोर्ट मुख्यालय को भेज दी है। 8 साल से नहीं हुई मरम्मत विक्रमशिला सेतु पर ट्रैफिक का भारी दबाव है। इस सेतु से प्रत्येक दिन 25 हजार छोटी-बड़ी गाड़ियां गुजरती हैं। ओवर लोडेड ट्रकों के गुजरने से एक्सपेंशन जॉइंट्स में पहले ही 6 इंच का गैप आ चुका है। इसके बावजूद साल 2016 के बाद से इस सेतु की कोई तकनीकी मरम्मत नहीं हुई है। हाल के दिनों में सिर्फ रंग-रोगन कर चमक बढ़ाई गई है। ———————– ये भी पढ़ें 3 बार गिरा अगुवानी ब्रिज, अब स्टील–कंक्रीट से बन रहा:दो शिफ्ट में चल रहा काम, 18 महीने का टारगेट; उत्तर–दक्षिण बिहार को जोड़ेगा उत्तर बिहार को दक्षिण बिहार से जोड़ने वाला सुल्तानगंज-अगुवानी घाट फोर लेन पुल का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। यह जनवरी 2027 तक तैयार हो जाएगा। गंगा नदी पर बन रहे इस 3.16 किलोमीटर लंबे ब्रिज के चालू होने से दक्षिण बिहार से उत्तर बिहार आने-जाने में करीब 60 किमी की दूरी कम हो जाएगी। 3 बार धराशाई हो चुके पुल के हिस्से का नए सिरे से निर्माण शुरू हो गया है। इस बार पुल के सुपर स्ट्रक्चर में बदलाव किया गया है। नई डिजाइन IIT रुड़की ने तैयार की है। पूरी खबर पढ़ें