सुंदरनगर नलवाड़ मेला बैल पूजन-ध्वजारोहण से शुरू:तकनीकी शिक्षा मंत्री धर्माणी ने किया शुभारंभ, पारंपरिक वाद्य यंत्रों से निकाली भव्य शोभायात्रा

शुकदेव मुनि की तपोस्थली सुंदरनगर में ऐतिहासिक सात दिवसीय राज्य स्तरीय नलवाड़ एवं किसान मेले का पारंपरिक विधि-विधान के साथ आगाज हो गया है। तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने नगौण खड्ड में बैल पूजन और खूंटी गाड़कर मेले का शुभारंभ किया। इसके बाद जवाहर पार्क में ध्वजारोहण कर औपचारिक शुरुआत की गई। इस अवसर पर पूर्व सीपीएस सोहन लाल ठाकुर सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। राजेश धर्माणी को स्मृति चिन्ह भेंट कर किया सम्मानित मेले के शुभारंभ अवसर पर रंग-बिरंगी पगड़ियों और पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ एक भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसने पूरे सुंदरनगर को उत्सवमय बना दिया। एसडीएम एवं मेला समिति के अध्यक्ष अमर नेगी ने मुख्य अतिथि राजेश धर्माणी को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। यह मेला वर्षों पुरानी परंपरा का प्रतीक है, जिसमें मंडी सहित प्रदेश और बाहरी राज्यों से भी बड़ी संख्या में लोग भाग लेते हैं। इस मौके पर मंत्री राजेश धर्माणी ने मेले को प्रदेश की कृषि और पशुपालन संस्कृति का जीवंत उदाहरण बताया और सभी को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि समय के साथ मेले में सकारात्मक बदलाव आए हैं और यह अब स्थानीय कलाकारों, पारंपरिक खेलों और कुश्ती प्रतियोगिताओं के लिए एक बड़ा मंच बन चुका है। धर्माणी ने प्रदेश सरकार के बजट की सराहना की पत्रकारों से बातचीत में मंत्री धर्माणी ने प्रदेश सरकार के बजट की सराहना करते हुए उसे “10 में से 10” अंक दिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रस्तुत यह बजट युवाओं, किसानों और महिलाओं के लिए मजबूत भविष्य की नींव रखेगा। उन्होंने जोर दिया कि सरकार खर्च के बजाय निवेश पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जिससे रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। धर्माणी ने इस दौरान भाजपा पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के नकारात्मक रवैये के कारण हिमाचल को मिलने वाली आरडीजी ग्रांट बंद हो गई, जिससे प्रदेश का विकास प्रभावित हुआ। बैलों की खरीद-फरोख्त के लिए मशहूर है मेला नलवाड़ मेले की सबसे बड़ी खासियत बैलों की खरीद-फरोख्त है, जिसमें दूर-दराज के किसान भाग लेने आते हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में आज भी कृषि कार्यों में बैलों का महत्व बना हुआ है। यह मेला न केवल खेती और पशुपालन को बढ़ावा देता है, बल्कि हिमाचल की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराओं को भी सहेजने का महत्वपूर्ण कार्य करता है।

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