शहीदी दिवस को जन्मदिन बताने पर फंसे मंत्री के बेटे:भाजपा नेता शीतल अंगुराल ने घेरा और बताया मानसिक रूप से बीमार मंदबुद्धि बच्चा

जालंधर वेस्ट से विधायक और पंजाब सरकार में मंत्री मोहिंदर भगत के बेटे अतुल भगत की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने पंजाब की राजनीति में विवाद खड़ा कर दिया है। 23 मार्च, यानी शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के ‘शहीदी दिवस’ के अवसर पर अतुल भगत ने इसे भगत सिंह का ‘जन्मदिन’ बताते हुए श्रद्धांजलि अर्पित कर दी। इस बड़ी चूक को लेकर पूर्व विधायक और भाजपा नेता शीतल अंगुराल ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने मंत्री और उनके बेटे दोनों पर निशाना साधते हुए इसे शहीदों का अपमान और मानसिक दिवालियापन करार दिया है। पंजाब सरकार के कैबिनेट मंत्री मोहिंदर भगत के बेटे अतुल भगत अपनी एक फेसबुक पोस्ट के कारण विवादों के घेरे में आ गए हैं। आज पूरा देश 23 मार्च को शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के बलिदान को याद करते हुए ‘शहीदी दिवस’ मना रहा है। इसी बीच अतुल भगत ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा की, जिसमें उन्होंने आज के दिन को शहीद भगत सिंह का ‘जन्मदिन’ बता दिया। अतुल भगत ने अपनी पोस्ट में पंजाबी में लिखा, “आज हम सब महान क्रांतिकारी शहीद भगत सिंह जी के जन्मदिन के अवसर पर उन्हें दिल से कोटि-कोटि नमन करते हैं।” उन्होंने आगे लिखा कि शहीद भगत सिंह ने देश की आजादी के लिए अपनी जवानी कुर्बान कर दी और उनका बलिदान हमेशा प्रेरणा देता रहेगा। हालांकि, शहीदी दिवस को जन्मदिवस लिखने की इस गंभीर गलती ने विपक्ष को हमला करने का बड़ा मौका दे दिया।
मोहिंदर भगत पर साधा निशाना इस मामले पर भाजपा नेता और पूर्व विधायक शीतल अंगुराल ने मंत्री के परिवार पर जमकर भड़ास निकाली। अंगुराल ने कहा कि जालंधर वेस्ट के विधायक और मंत्री मोहिंदर भगत ही केवल भुलक्कड़ नेता नहीं हैं, बल्कि उनके बेटे अतुल भगत, जो खुद को ‘सुपर मंत्री’ समझते हैं, उन्होंने भी साबित कर दिया है कि वे तथ्यों से पूरी तरह अनजान हैं।
शीतल अंगुराल ने तीखे शब्दों का प्रयोग करते हुए कहा कि यह बेहद शर्मनाक है कि सरकार में ऊंचे पदों पर बैठे लोग और उनके परिवार शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव थापर के शहीदी दिवस और जन्मदिवस के बीच का अंतर नहीं जानते। उन्होंने इसे एक मानसिक बीमारी बताते हुए कहा कि ऐसे लोग इतिहास और शहीदों की गरिमा को ठेस पहुंचा रहे हैं।
सोशल मीडिया पर मंत्री के बेटे को किया जा रहा ट्रोल राजनीतिक गलियारों में इस पोस्ट की जमकर आलोचना हो रही है। लोग कह रहे हैं कि जिस क्रांतिकारी ने 23 वर्ष की आयु में देश के लिए फांसी का फंदा चूम लिया, उनके बलिदान दिवस को जन्मदिन बताना न केवल अज्ञानता है, बल्कि उन महान सपूतों की शहादत का निरादर भी है। इस विवाद के बाद अब सोशल मीडिया पर भी मंत्री के बेटे को ट्रोल किया जा रहा है।

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