रेलवे में चयन के बाद भी नहीं दी जॉइनिंग:चंडीगढ़ कैट ने रद्द किया आदेश,12 सप्ताह में लागू हो,जुलाई 2019 नियुक्ति पत्र जारी

रेलवे भर्ती में चयनित उम्मीदवार को जॉइनिंग से वंचित करने के मामले में सेंट्रल एडमीस्टेटिव ट्रब्यूनल (कैट) चंडीगढ़ बेंच ने उम्मीदवार की उम्मीदवारी रद्द करने के आदेश को अवैध ठहराते हुए उसे फिर से नियुक्ति देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही ट्रिब्यूनल ने रेलवे को निर्देश दिया है कि पूरी प्रक्रिया 12 सप्ताह के भीतर पूरी की जाए। इस मामले में कोई लागत (कॉस्ट) नहीं लगाई गई है। मामले में हरियाणा के हिसार निवासी जितेंद्र ने रेलवे भर्ती बोर्ड द्वारा जारी नोटिस के तहत ग्रुप-डी पदों के लिए आवेदन किया था। उम्मीदवार ने कंप्यूटर आधारित परीक्षा पास करने के बाद मेडिकल और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन भी सफलतापूर्वक पूरा किया। इसके बाद 26 जुलाई 2019 को उसे हेल्पर/मैकेनिकल सी एंड डब्ल्यू पद के लिए नियुक्ति पत्र जारी किया गया। चयन के बाद भी नहीं दी जॉइनिंग नियुक्ति पत्र मिलने के बावजूद उम्मीदवार को जॉइनिंग नहीं दी गई, जबकि अन्य चयनित अभ्यर्थियों को अगस्त 2019 में नियुक्त कर दिया गया। बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने और 18 नवंबर 2019 को आवेदन तथा 5 जनवरी 2020 को कानूनी नोटिस देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उम्मीदवार ने ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटाया, जिसके निर्देश पर रेलवे ने 13 मार्च 2020 को उसकी उम्मीदवारी रद्द कर दी। कारण बताया गया कि उसके फिंगरप्रिंट और हस्तलेखन परीक्षा के दौरान दिए गए रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते। बिना सुनवाई रद्द की उम्मीदवारी ट्रिब्यूनल ने पाया कि उम्मीदवार को अपनी बात रखने का कोई मौका नहीं दिया गया। यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है। साथ ही, जिस विशेषज्ञ रिपोर्ट के आधार पर निर्णय लिया गया, उसमें भी विरोधाभास पाया गया। ट्रिब्यूनल ने यह भी माना कि संबंधित आदेश उम्मीदवार को विधिवत रूप से सूचित नहीं किया गया था। ट्रिब्यूनल ने 13 मार्च 2020 के आदेश को रद्द करते हुए रेलवे को निर्देश दिए हैं कि उम्मीदवार के मामले पर दोबारा विचार किया जाए और यदि वह अन्य सभी शर्तों को पूरा करता है तो उसे हेल्पर पद पर नियुक्ति दी जाए। उम्मीदवार को 9 अगस्त 2019 से वरिष्ठता (सीनियरिटी) और वेतन निर्धारण के लिए सभी लाभ दिए जाएंगे, हालांकि उसे वास्तविक वेतन केवल जॉइनिंग के बाद से ही मिलेगा।

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