लुधियाना में DMC अस्पताल में शर्मनाक मामला:1.16 लाख के बिल पर 24 घंटे शव रोका, मानवाधिकार हस्तक्षेप के बाद मिली देह

लुधियाना के दयानंद मेडिकल कॉलेज एंड अस्पताल (DMC) में एक बेहद संवेदनशील और शर्मनाक मामला सामने आया है। यहां किडनी की बीमारी से जूझ रहे 31 वर्षीय मजदूर गगनदीप सिंह की मौत के बाद अस्पताल प्रशासन ने 1.16 लाख रुपये का बकाया बिल न चुकाने पर करीब 24 घंटे तक शव परिजनों को नहीं सौंपा। मृतक के परिजनों के अनुसार, गगनदीप सिंह पेशे से पेंटर थे और लंबे समय से किडनी की बीमारी से पीड़ित थे। शुक्रवार सुबह उनकी मौत हो गई, लेकिन अस्पताल ने बिल जमा कराने तक शव देने से इनकार कर दिया। इससे परिवार को गहरा मानसिक आघात पहुंचा और अंतिम संस्कार भी समय पर नहीं हो सका। “गरीब हैं, इतने पैसे कहां से लाएं”
मृतक के परिजन ओम पाल सिंह ने बताया कि परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है। “हम मजदूरी करके घर चलाते हैं। 1.16 लाख रुपये कहां से लाएं? अस्पताल ने हमारे साथ अमानवीय व्यवहार किया। सामाजिक संस्था की एंट्री के बाद बदला माहौल
मामले में मोड़ तब आया जब परिवार ने ‘राहत-द सेफ कम्युनिटी फाउंडेशन’ के चेयरमैन डॉ. कमलजीत सोई से संपर्क किया। डॉ. सोई ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पंजाब राज्य मानवाधिकार आयोग के सदस्य जितेंद्र सिंह शंटी को शिकायत भेजी। शाम करीब 3:30 बजे हस्तक्षेप के बाद अस्पताल प्रशासन बैकफुट पर आया और शव परिजनों को सौंप दिया गया। हालांकि, इससे पहले अस्पताल प्रबंधन की ओर से काफी आनाकानी की गई। पिता से लिखवाया गया बयान
परिजनों का आरोप है कि शव देने से पहले मृतक के पिता श्याम लाल से लिखवाया गया कि वे इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं करेंगे। इस पर भी सवाल उठ रहे हैं। हाईकोर्ट जाने की चेतावनी
डॉ. कमलजीत सोई ने कहा कि यह मामला यहीं खत्म नहीं होगा। “अगर मानवाधिकार आयोग ने इस पर पर्चा दर्ज नहीं किया तो हम पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर करेंगे। कानून क्या कहता है
सोई ने बताया कि बकाया बिल के नाम पर शव रोकना गैरकानूनी है। यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गरिमामय जीवन और मृत्यु के अधिकार का उल्लंघन माना जाता है। साथ ही नेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन (NHRC) के दिशानिर्देश भी इसे प्रतिबंधित करते हैं। पूरे पंजाब में चर्चा
घटना के बाद लोगों में आक्रोश है। लोगों का कहना है कि महंगे इलाज के बाद भी अस्पतालों का यह रवैया गरीब परिवारों को दोहरी मार देता है। एक तरफ अपनों की मौत, दूसरी तरफ बिल का बोझ।
फिलहाल परिवार ने शव लेकर अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू कर दी है, लेकिन इस घटना ने स्वास्थ्य सेवाओं की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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