चंडीगढ़ | हाईकोर्ट ने प्रॉपर्टी कानून के एक अहम और अक्सर गलत समझे जाने वाले नियम को स्पष्ट करते हुए कहा कि रजिस्टर्ड सेल डीड के बाद खरीदार सीधे संपत्ति पर कब्जा मांग सकता है, इसके लिए ‘सूट फॉर स्पेसिफिक परफॉर्मेंस’ दायर करने की जरूरत नहीं है। जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने दो दशक पुराने निचली अदालतों के फैसलों को पलटते हुए कहा कि रजिस्टर्ड सेल डीड के बाद भी स्पेसिफिक परफॉर्मेंस का मुकदमा जरूरी बताना कानून की मूलभूत गलती है। हाईकोर्ट ने साफ किया कि स्पेसिफिक परफॉर्मेंस के लिए समयसीमा 3 साल होती है, पर टाइटल के आधार पर कब्जा मांगने के लिए 12 साल का समय मिलता है। मामला 1979-81 के बीच गुरदासपुर में 45 कनाल जमीन की खरीद से जुड़ा था। खरीदार को 12 कनाल 18 मरला जमीन का कब्जा नहीं मिला था। निचली अदालतों ने 3 साल की लिमिटेशन मानकर दावा खारिज कर दिया था। हाईकोर्ट ने कहा कि यह मामला टाइटल पर कब्जे का है, इसलिए 12 साल की लिमिटेशन लागू होगी। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट और अपीलीय अदालत के फैसले रद्द किए और खरीदार को कब्जा दिलाने का आदेश दिया।