पंचर-मजदूर-नीरा बेचने वालों के बेटों ने किया टॉप:बिहार मैट्रिक में 96% से ज्यादा नंबर; पढ़िए टॉपर्स की सक्सेस स्टोरी

बिहार मैट्रिक परीक्षा का रिजल्ट जारी हो गया है। जमुई की पुष्पांजलि कुमारी और वैशाली की सबरीन परवीन ने 492 अंक हासिल कर संयुक्त रूप से टॉप किया है। वहीं, सुपौल के राजदीप कुमार और अररिया के सुमित कुमार यादव ने 485 अंक (97%) के साथ राज्य में छठा स्थान हासिल किया है। राजदीप के पिता गुमटी में साइकिल की दुकान चलाते हैं, जबकि सुमित कुमार यादव के पिता दूसरे राज्यों में मजदूरी करते हैं। कुछ ऐसी ही कहानी बांका के आनंद कुमार की है, जिन्होंने 483 अंक (96.6%) के साथ आठवां स्थान प्राप्त किया। उनके पिता पेशे से किसान हैं। सुपौल के अनुज कुमार ने 481 अंक (96.2%) लाकर राज्य में दसवां स्थान हासिल किया। वे भी एक साधारण परिवार से आते हैं। वहीं, औरंगाबाद के शिव कुमार ने भी राज्य में दसवां स्थान प्राप्त किया है। उनके पिता मनोज चौधरी गांव में रहकर नीरा (ताड़ी) बेचने का काम करते हैं। पढ़िए टॉपर्स की सक्सेस स्टोरीज… पंचर की दुकान चलाते हैं टॉपर राजदीप के पिता सुपौल के राघोपुर प्रखंड के खुबलाल उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय, रामविशनपुर के छात्र राजदीप कुमार बेहद गरीब परिवार से आते हैं। वह अपने चार-भाई बहनों में तीसरे नंबर पर आते हैं। उनके पिता पंचर की दुकान चलाते हैं। राजदीप भी पिता के साथ करीब दो घंटे दुकान के काम में हाथ बंटाते हैं। मां हाउस वाइफ है। घर का खर्चा किसी तरह चलता है। आर्थिक स्थिति खराब होने के बावजूद राजदीप ने अपनी पढ़ाई नहीं छोड़ी। अब उनकी मेहनत रंग लाई है। उन्होंने परीक्षा में 485 नंबर लाकर परिवार और गांववालों का नाम रौशन किया है। अनुज के मां-पिता सरकारी टीचर हैं सुपौल के छातापुर प्रखंड के अनुज ने उत्क्रमित मध्य विद्यालय, भीमपुर से पढ़ाई की और मैट्रिक परीक्षा में 481 अंक (96.2%) हासिल कर राज्य में 10वां स्थान प्राप्त किया। अनुज काफी साधारण परिवार से आते हैं। उनके पिता हरि नारायण सिंह मधेपुरा जिले के कुमारखंड स्थित एक 10+2 विद्यालय में शिक्षक हैं। पिता ट्यूशन भी पढ़ाते हैं। मां रंजू कुमारी भी गांव के ही प्राइमरी स्कूल में टीचर हैं। अनुज ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव के नजदीकी विद्यालय से प्राप्त की और आगे की पढ़ाई भीमपुर स्थित उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय से पूरी की। इसके बाद घर पर ही सेल्फ स्टडी कर परीक्षा की तैयारी की। अनुज रोजाना लगभग 8 से 9 घंटे पढ़ाई करते थे और कई बार देर रात 2 से 3 बजे तक भी पढ़ते रहे। उनका लक्ष्य डॉक्टर बनना है और वे मेडिकल क्षेत्र में जाकर लोगों की सेवा करना चाहते हैं। बांका के आनंद ने किसान परिवार से निकलकर रचा इतिहास बांका के रजौन प्रखंड के परघड़ी गांव के छात्र आनंद कुमार ने मैट्रिक परीक्षा 2026 में 483 अंक (96.6%) प्राप्त कर राज्य में आठवां स्थान हासिल किया है। उनके घर की आर्थिक हालत भी ठीक नहीं है। आनंद के पिता सुमन कुमार सिंह पेशे से किसान हैं। मां हाउस वाइफ है। फसल खराब होने की स्थिति में परिवार कई बार कर्ज लेकर घर चलाता है। आर्थिक तंगी के बावजूद आनंद ने अपनी पढाई पूरी लगन से की। उन्होंने कहा कि वह 4 से 5 घंटे प्रतिदिन सेल्फ स्टडी करते थे। इसके अलावा उनके माता-पिता के साथ-साथ मां शारदे कोचिंग सेंटर के शिक्षकों ने भी उनका काफी सहयोग किया। आनंद आगे चलकर डॉक्टर बनना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि वे अपने लक्ष्य को पाने के लिए लगातार मेहनत करते रहेंगे। अररिया के सुमित ने मजदूर परिवार से बनाईं नई पहचान अररिया के पलासी प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय के छात्र सुमित कुमार यादव साधारण ग्रामीण परिवार से आते हैं। उनके पिता कृष्ण यादव पहले दिल्ली और अब पंजाब में मजदूरी करते हैं। मां हाउस वाइफ है। परिवार की आर्थिक हालत बेहद कमजोर है। इसके बावजदू सुमित ने लगन से अपनी पढ़ाई पूरी की और मैट्रिक में 485 अंक लाकर पूरे राज्य में छठा स्थान हासिल किया है। सुमित ने कहा कि वह प्रतिदिन 10 घंटे की नियमित पढाई करते थे। सुमित ने कहा कि मैं आज जो कुछ भी कर पाया उसके पीछे मेरे माता-पिता, शिक्षकों और गुरु महाराज की कृपा है। सुमित का कहना है कि वह आगे चलकर इंटर में गणित विषय से पढ़ाई कर UPSC की तैयारी करना चाहता है, ताकि वे सिविल सेवा में जाकर देश की सेवा कर सकें। शिव के पिता नीरा बेचने का काम करते हैं औरंगाबाद के राजकीय देव हाई स्कूल के छात्र शिव कुमार ने शहर के देव गोदाम में नानी के घर रहकर पढ़ाई की है। शिव कुमार झारखंड के पलामू जिला के हरिहरगंज प्रखंड के अररूआ खुर्द गांव के रहने वाले हैं। पिता मनोज चौधरी गांव में रहकर नीरा बेचने का काम करते हैं। जबकि, मां सुमन देवी गृहणी है। शिव कुमार दो भाई और एक बहन में सबसे बड़े है। छोटा भाई अंशु कुमार और बहन चांदनी कुमारी गांव में ही रहते हैं। शिव कुमार ने 10वीं में 481 अंक हासिल किया है। छात्र का टॉप टेन में 10वां स्थान है। शिव एससी वर्ग में आते हैं। वह बचपन से ही नाना के घर देव में ही रहकर पढ़ाई करता है। नाना तिलेश्वर चौधरी और नानी कांति देवी ने बताया कि बचपन में शिव कुमार की तबीयत खराब रहने के कारण हमलोग बचपन से ही अपने घर पर रख रहे हैं, लेकिन आज इस परीक्षा परिणाम से हमलोग काफी खुश हैं। प्लंबर की बेटी बनीं टॉपर पश्चिमी चंपारण के बेतिया की माही कुमारी ने राज्य स्तर पर सातवां स्थान हासिल किया है। संत टेरेसा स्कूल से पढ़ाई कर 500 में 484 अंक (96.8%) प्राप्त किया है। माही के पिता मोहन कुमार पेशे से प्लंबर हैं, जबकि उनकी माता ललिता देवी हाउस वाइफ हैं। उन्होंने बिना किसी कोचिंग के केवल सेल्फ स्टडी के माध्यम से तैयारी कर यह सफलता पाई। माही का कहना है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत निरंतर हो, तो बिना कोचिंग के भी टॉप किया जा सकता है। उन्होंने सेल्फ स्टडी और आत्मविश्वास को अपनी सफलता की कुंजी बताया। माही कुमारी ने अपने भविष्य के लक्ष्य के बारे में बताया कि वह आगे चलकर लॉ की पढ़ाई करना चाहती हैं। माही ने कहा कि न्याय और समाज सेवा के क्षेत्र में काम करना चाहती हूं।

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