हरियाणा में लगातार हो रहे बैंक घोटालों को लेकर सरकार अलर्ट हो गई है। इसी को देखते हुए सरकार ने आईडीएफसी बैंक के 590 करोड़ के बैंक घोटाले की जांच सीबीआई से कराने की फैसला किया है। सूत्रों की मानें तो तीन दिन पहले ही सरकार की ओर से इसको लेकर एक लेटर केंद्रीय गृह मंत्रालय को लिखा जा चुका है। हालांकि हरियाणा सरकार के खाते में पूरे 590 करोड़ रुपए वापस आ चुके हैं, लेकिन मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मामले में सख्त रुख अपनाया। सीएम सैनी पहले ही इस मामले की जांच का जिम्मा हरियाणा एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) को सौंपा था। ED कर चुकी 19 जगह छापेमारी एसीबी इस मामले में बैंक कर्मियों सहित ज्वेलर्स और हरियाणा सरकार के दो वित्त अधिकारियों को गिरफ्तार कर चुकी है। पिछले दिनों इस घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की भी एंट्री हो चुकी है। ईडी की ओर से 19 ठिकानों पर छापामारी भी गई थी। चर्चा है कि ईडी की इस कवायद के बाद ही केंद्र सरकार ने मामले में सीबीआई जांच के लिए हरियाणा सरकार को निर्देशित किया है। फिलहाल, सीबीआई जांच की आशंका से हरियाणा सरकार के कई वरिष्ठ आईएएस अफसरों की नींद उड़ गई है क्योंकि अभी तक सिर्फ छोटे अफसर ही इस शिकंजे में आए हैं। चर्चा है कि मामले में करीब आधा दर्जन आईएएस अफसरों की भूमिका संदिग्ध मिली है जो सरकारी एजेंसियों के रडार पर हैं। FD के नाम पर हुआ पूरा घोटाला दरअसल, हाल ही में 590 करोड़ के बैंक फ्रॉड का खुलासा हुआ था। इसमें हरियाणा सरकार की विभिन्न एजेंसियों द्वारा लगभग 590 करोड़ रुपए की राशि बैंक में जमा कराई गई थी। यह राशि फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) में निवेश करने के लिए दी गई थी, लेकिन आरोप है कि बैंक के कुछ अधिकारियों और अन्य आरोपियों ने मिलकर इस रकम को एफडी में जमा करने के बजाय अपने निजी फायदे के लिए डायवर्ट कर दिया गया था। यहां पढ़िए अब तक क्या हुआ… CM ने जांच एसीबी को सौंपी घोटाले का खुलासा होने के बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मामले की जांच एसीबी को सौंपी। जिसमें एसीबी ने तत्काल प्रभाव से केस दर्ज करते हुए बैंक मैनेजर रिभव ऋषि को गिरफ्तार किया। सूत्रों के मुताबिक चंडीगढ़ के सेक्टर-32 की आईडीएफसी बैंक का मैनेजर रिभव ऋषि पुरी भी दोनों अफसरों के साथ घोटाले का सूत्रधार है। 6 महीने पहले बैंक की नौकरी छोड़ी जिसने रिलेशनशिप मैनेजर के साथ मिलकर फ्रॉड किया। 6 महीने पहले आरोपी ने बैंक की नौकरी छोड़ दी थी। इसके अलावा रिलेशनशिप मैनेजर अभय को गिरफ्तार किया गया जो रिभव ऋषि की बनाई योजना पर काम करते हुए अपनी पत्नी स्वाति सिंगला और साले अभिषेक को भी शामिल कर लिया। अधिकारियों के पास जाकर अपनी ब्रांच में एफडी बनवाने के लिए लॉइजनिंग का काम करता था। स्वाति सिंगला ने बनाई कंपनी जांच में सामने आया कि स्वाति सिंगला ने एक स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट के नाम से कंपनी बनाई। जिसमें वह 75 प्रतिशत की शेयर होल्डर है। पति अभय के कहने पर कंपनी बनाकर फंड को दूसरे अकाउंट में भेजा गया, जहां से प्रॉपर्टी और शेयर मार्केटिंग में हिस्सा लिया गया।
इन अफसरों को किया गिरफ्तार गया हरियाणा के सरकारी विभागों के खातों में हुए आईडीएफसी बैंक के 590 करोड़ घोटाले में एसीबी ने सरकारी अफसरों को गिरफ्तार किया था। इन लोगों ने बैंक कर्मियों से मिलकर फ्रॉड की साजिश रची थी। वहीं, सावन ज्वेलर के मालिक राजन और अंकुर शर्मा को गिरफ्तार किया गया था। बताया गया कि इन अधिकारियों ने जानबूझकर हरियाणा सरकार के वित्त विभाग द्वारा समय-समय पर जारी निर्देशों का उल्लंघन किया और बैंक के आरोपियों के साथ मिलकर सरकारी धन की हेराफेरी करने की साजिश रची। दोनों ने ही अपराध में सक्रिय रूप से भाग लिया और रिश्वत के रूप में बड़ी रकम पाई। एफडी में निवेश की दी मंजूरी दोनों ने बैंक मैनेजर को पहले तो विभागों का पैसा एफडी में निवेश करने की इजाजत दी। फिर रकम को एफडी में जमा करने के बजाय शेल कंपनियों में डायवर्ट कर दिया। इनमें हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड के कार्यालय में तैनात राजेश सांगवान (नियंत्रक वित्त एवं लेखा) तथा हरियाणा विद्यालय शिक्षा परियोजना परिषद में तैनात रणधीर सिंह (नियंत्रक वित्त एवं लेखा) की भूमिका संदिग्ध पाई गई। सरकारी कर्मियों के द्वारा फ्रॉड में शामिल होने व रिश्वत की रकम स्वीकार किए जाने के फैक्ट सामने आने पर एसीबी ने केस में 7 पीसी एक्ट की धारा भी जोड़ी है। दो अकाउंट अफसर जेल में हैं अभी तक पंचायत विभाग के सुपरिडेंट व दो अकाउंट अफसर की गिरफ्तारी हो चुकी है। जिन्होंने फ्रॉड में साथ देने के लिए रिश्वत की रकम ली है। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि सावन ज्वेलर्स के मालिक राजन के द्वारा मुख्य आरोपियों के लिए कैश कन्वर्जन का काम किया गया व इसके लिए भारी कमीशन प्राप्त किया।