हिमाचल पंचायत चुनाव में आरक्षण रोस्टर तय नहीं:सुप्रीम कोर्ट की 31 मार्च की डेडलाइन खत्म, हजारों दावेदारों का इंतजार बढ़ा

सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार- हिमाचल के सभी जिलों के डीसी को आज (31 मार्च तक) हर हाल में पंचायत व नगर निकाय चुनाव को आरक्षण रोस्टर तय करना है। मगर मंगलवार शाम 6 बजे तक रोस्टर तय नहीं हुआ। इससे पंचायत चुनाव लड़ने के इच्छुक हजारों दावेदारों का आरक्षण रोस्टर के लिए इंतजार लंबा हो गया है। सूत्रों के अनुसार- आज इसकी संभावनाएं भी कम है, क्योंकि हिमाचल हाईकोर्ट में नई पंचायतों को चुनौती देने वाली 12 से ज्यादा याचिकाएं विचाराधीन है। हालांकि, इन पर आज सुनवाई पूरी हो गई है। लेकिन रिटेन ऑर्डर अभी आना बाकी है। ऑर्डर आने के बाद नई पंचायतों के गठन को लेकर स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। 3773 पंचायतों और 73 नगर निकायों में होने है चुनाव प्रदेश की 3773 पंचायतों और 73 नगर निकायों में 31 मई से पहले चुनाव है। पंचायतों में प्रधान, उप प्रधान, वार्ड मेंबर, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद के लिए इलेक्शन होने है, जबकि शहरी निकायों में पार्षदों का चयन होना है। इनमें से उप प्रधान को छोड़कर हर पद के लिए आरक्षण रोस्टर लगता है। पंचायत जनप्रतिनिधियों का कार्यकाल 31 जनवरी को समाप्त हो चुका पंचायतों और नगर निकायों के पूर्व पदाधिकारियों का कार्यकाल पहले ही समाप्त हो चुका है। इस वजह से पंचायत और निकायों में सरकार ने एडमिन्स्ट्रेटर बिठा रखे हैं, क्योंकि राज्य में चुनाव समय पर नहीं करवाए जा सके। हाईकोर्ट ने 30 अप्रैल, SC ने 31 मई से पहले कराने के आदेश दिए राज्य सरकार आपदा की आड़ में नवंबर-दिसंबर 2025 में चुनाव को तैयार नहीं हुई। इससे मामला पहले हाईकोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। हाईकोर्ट में 30 अप्रैल से पहले कराने के आदेश दिए थे। इसके बाद सरकार सुप्रीम कोर्ट गई। सुप्रीम कोर्ट (SC) ने 31 मई तक का वक्त दिया है। इसके लिए 31 मार्च तक आरक्षण रोस्टर लगाने को कहा गया था।

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