नगर निगम पंचकूला फ्रॉड केस में पंजाब का युवक गिरफ्तार:₹2.36 करोड़ खाते में ट्रांसफर हुए, कल कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लेगी ACB

पंचकूला नगर निगम के फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) फंड में लगभग ₹160 करोड़ के गबन के मामले में ACB ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। जिसकी पहचान पंजाब के पटियाला जिले में राजपुरा निवासी कपिल के तौर पर हुई है। जिसे एसीबी टीम बुधवार को कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लेगी। पंचकूला नगर निगम फ्रॉड केस में गिरफ्तार हुए कपिल के खाते में ₹2.36 करोड़ ट्रांसफर हुए हैं। वहीं एक अन्य आरोपी विनोद भी इसमें शामिल पाया गया है। जिसकी 17 अगस्त 2024 को मौत हो चुकी है। रिमांड के दौरान कपिल से बड़े खुलासे होने की उम्मीद है। उधर कोटक महिंद्रा बैंक भी पंचकूला नगर निगम के 127 करोड़ रुपए की रकम वापस लौटा चुका है। सिलसिलेवार ढंग से जानिए पूरा मामला…. नगर निगम ने 16 FD करवाई थींपंचकूला नगर निगम ने कोटक महिंद्रा में 145 करोड़ रुपए की 16 FD करवाई थीं। इनमें से 59.58 करोड़ रुपए की 11 FD 16 फरवरी, 2026 को पूरी हो गईं। जब नगर निगम ने बैंक से बात की, तो बैंक के दिए गए डिटेल्स नगर निगम के रिकॉर्ड से मैच नहीं हुए। एक खाते में 50.07 करोड़ रुपए होने चाहिए थे, लेकिन उसमें सिर्फ 2.18 करोड़ रुपए थे। बैंक ने बताया कि कोई भी FD चालू नहीं है और खातों में कुल 12.86 करोड़ रुपए ही बचे हैं। बैंक को लेटर लिखकर पैसे मांगे इससे पहले, IDFC फर्स्ट बैंक में भी ऐसा ही घोटाला हुआ था। इसलिए, नगर निगम ने कोटक महिंद्रा बैंक को पत्र लिखकर अपनी FD वापस मांगी। बैंक ने कहा कि उनके पास ऐसी कोई FD नहीं है। इससे नगर निगम में हड़कंप मच गया और उन्होंने जांच शुरू की। जांच में पता चला कि बैंक कर्मचारियों ने फ्रॉड करते हुए, हर बार रिन्यूअल के फर्जी डॉक्यूमेंट भेजे, जिससे अधिकारियों को पता न चले। फ्रॉड में 2 लोग गिरफ्तार हुए बैंक में नगर निगम के 2 खाते थे, लेकिन उन्हीं डॉक्यूमेंट पर 2 और खाते खोल दिए गए। फिर उन खातों से पैसे अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिए गए। कहा जा रहा है कि बैंक की एक महिला कर्मचारी के खाते में भी काफी पैसा गया है। इस घोटाले में अब तक दो लोग गिरफ्तार हुए हैं: रिलेशनशिप मैनेजर दिलीप कुमार और रजत डागर। रजत डागर के खाते में निगम के 70 करोड़ रुपए आए थे, जिसे उसने बिल्डरों और प्राइवेट लोगों को ट्रांसफर कर दिया। ज्यादा ब्याज का लालच दिया FD हर बार रिन्यू हो रही थी, लेकिन नगर निगम के अधिकारियों ने कभी इसकी जांच नहीं की। जब पैसे वापस लेने के लिए पत्र लिखा गया, तो बैंक का एक कर्मचारी ज्यादा ब्याज का लालच देकर फिर से FD करवाने का ऑफर देने आया, लेकिन इस बार अधिकारी झांसे में नहीं आए और घोटाले का खुलासा हो गया।

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