भास्कर न्यूज | अमृतसर नगर निगम की दुकानों के किराए में भारी बढ़ोतरी को लेकर दुकानदार तनाव में हैं। 40 साल से लीज पर चल रही करीब 35 मार्केट की दुकानों का रेंट 9 गुणा तक बढ़ाने के लिए निगम ने कमर कस ली है। एस्टेट विभाग के इस प्रपोजल को प्राइस एंड रेंट फिक्सेशन कमेटी से हरी झंडी मिलने के बाद अब कमिश्नर ने भी मंजूरी दे दी है। अब नोटिफिकेशन जारी होते ही नया किराया लागू हो जाएगा। हालांकि, इस पूरे मामले ने ‘मेयर बनाम कमिश्नर’ वाले हालात पैदा कर दिए हैं क्योंकि मेयर जतिंदर सिंह भाटिया ने दुकानदारों को कुछ और ही आश्वासन दिया था। दरअसल, 25 मार्च को मार्केट एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने मेयर से मुलाकात कर कहा था कि किराया एकदम से इतना ज्यादा न बढ़ाया जाए कि काम धंधा करना ही मुश्किल हो जाए। मेयर ने तब भरोसा दिलाया था कि किराया केवल 4 गुणा तक ही बढ़ाया जाएगा। अब एस्टेट विभाग की फाइल ने उनकी चिंताएं फिर से बढ़ा दी हैं। विभाग के प्रपोजल में 9 गुणा तक की बढ़ोतरी और उसे बैक डेट यानी 1 अप्रैल 2023 से लागू करने की बात कही गई है, जिससे मेयर की साख अब दांव पर लग गई है। निगम पिछले लंबे समय से वित्तीय नुकसान की बात कहकर किराया बढ़ाने की फिराक में था। सबसे पहले तो कलेक्टर रेट और 6% लैंड वैल्यू के आधार पर रेंट कैलकुलेट करने का नोटिस जारी किया गया था, जिससे किराया 20 से 25 गुणा तक बढ़ रहा था। भारी विरोध के बाद निगम ने नरमी दिखाते हुए 1986-87 के किराए को बेस मानकर हर 3 साल में 20 प्रतिशत बढ़ोतरी का नया फॉर्मूला तैयार किया। इसके लिए पीडब्ल्यूडी विभाग से बाकायदा असेसमेंट करवाई गई और सभी किराएदारों की एक लिस्ट तैयार की गई। अब इसी रिपोर्ट को आधार बनाकर रेंट और उस पर जीएसटी वसूलने की तैयारी है। अब देखना यह होगा कि मेयर जतिंदर सिंह भाटिया अपने वादे पर अडिग रहकर कमिश्नर से प्रपोजल बदलवाते हैं या फिर अफसरों का फैसला ही लागू होता है। मार्केट कमेटी एसोसिएशन के प्रधान राजेश गांधी का कहना है कि मेयर ने वादा किया था कि किराया 4 गुणा से ज्यादा नहीं बढ़ेगा और इसे 1 अप्रैल 2024 से लागू किया जाएगा। अगर निगम जिद पर अड़ा रहा और 9 गुणा रेंट वसूला गया तो दुकानदार दुकानें खाली कर देंगे। राजेश गांधी के मुताबिक, दुकानदार मंगलवार को एक बार फिर मेयर से मिलेंगे ताकि जो वादा उन्होंने किया था, उसे पूरा करवाया जा सके। दुकानदार चाहते हैं कि मेयर कमिश्नर से बात करके इस उलझन को सुलझाएं और बीच का रास्ता निकालें क्योंकि पुरानी दरों और नई दरों में जमीन-आसमान का फर्क आ गया है। आंकड़ों की बात करें तो मेयर और दुकानदारों के बीच हुई मीटिंग में एक बाकायदा रेंट स्ट्रक्चर तय हुआ था। इसके तहत जिन दुकानों का किराया 100 रुपए है, उन्हें 400, 200 रुपए वालों को 600 और 300 रुपए वाली दुकानों का रेंट 700 रुपए होना था । 500 से 1000 रुपए वाले ब्रैकेट को 2000 रुपए, 1000 से 2000 वालों को 2500 और 4000 से 5000 रुपए तक के किराए को 7000 रुपए करने पर सहमति बनी थी। लेकिन विभाग की कैलकुलेशन एकदम अलग है। उनके 9 गुणा वाले फॉर्मूले से 5 हजार का 45 हजार रुपए महीना पहुंच जाएगा, जो छोटे दुकानदार के लिए देना नामुमकिन है।