करनाल जिले के कैरवाली गांव की जमीन को गिरवी रखकर बैंक से 30 लाख रुपए का लोन लेने के मामले में कोर्ट के आदेश पर मधुबन थाना में केस दर्ज किया गया है। शिकायत में आरोप है कि जमीन का मालिकाना हक न होने के बावजूद आरोपियों ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर बैंक से लोन लिया। मामले में पहले पुलिस द्वारा कार्रवाई न करने पर शिकायतकर्ता ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने सुनवाई के बाद मामले में गहन जांच जरूरी मानते हुए एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए। कोर्ट ने जांच जरूरी मानते हुए दिए आदेश यह मामला कैरवाली गांव के विनोद कुमार की शिकायत पर सामने आया। इस पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट खुशबू गोयल की कोर्ट ने 19 मार्च 2026 को आदेश जारी किया। कोर्ट ने कहा कि मामले में गहन और निष्पक्ष जांच जरूरी है, इसलिए पुलिस को उचित धाराओं में केस दर्ज कर जांच करने के निर्देश दिए गए। कोर्ट ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का भी हवाला दिया। इसमें सकिरी वासु बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2008) और ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार (2014) के फैसलों का जिक्र करते हुए कहा गया कि मजिस्ट्रेट के पास यह अधिकार है कि वह एफआईआर दर्ज कराने और जांच करवाने के आदेश दे सकता है। 17 कनाल 7 मरला जमीन होने का दावा शिकायतकर्ता विनोद कुमार ने बताया कि वह गांव कैरवाली का स्थायी निवासी है और कानून का पालन करने वाला नागरिक है। उसके अनुसार, वर्ष 2019-2020 की जमाबंदी के अनुसार वह 17 कनाल 7 मरला कृषि भूमि का मालिक और कब्जाधारी है, जो खेवट नंबर 176 और खतौनी नंबर 200 में दर्ज है। 1907 में गिरवी रखी जमीन 2022 में छुड़वाई विनोद कुमार ने बताया कि उसके पूर्वजों ने वर्ष 1907 में यह जमीन 45 रुपए में आरोपियों के पूर्वजों के पास गिरवी रखी थी। बाद में यह जमीन कोर्ट के आदेश से 6 सितंबर 2022 को छुड़वा ली गई। यह आदेश घरौंडा के कलेक्टर एवं उपमंडल अधिकारी अभय सिंह झांगड़ा की कोर्ट ने केस नंबर 14/2022 में दिया था। फर्जी दस्तावेज बनाकर बैंक से लिया लोन शिकायत में आरोप लगाया गया कि श्याम लाल और बलविंदर पुत्र जय भगवान ने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर इस जमीन को एचडीएफसी बैंक में गिरवी रखकर 30 लाख रुपए का लोन ले लिया। आरोप है कि यह साजिश सुमित धनखड़ (पटवारी हल्का कैरवाली) और नीरज कुमार (मैनेजर एचडीएफसी बैंक, असंध) के साथ मिलकर रची गई। बताया गया कि 12 सितंबर 2023 को रपट नंबर 24 के तहत यह लोन जारी किया गया। जिस जमीन पर लोन लिया गया, उसमें से 2 कनाल 6 मरला जमीन शिकायतकर्ता और उसके भाई की थी। आरोप है कि आरोपियों के पास इस जमीन का कोई मालिकाना हक नहीं था, फिर भी फर्जी कागजात बनाकर बैंक को गुमराह किया गया। पुलिस शिकायत पर नहीं हुई कार्रवाई विनोद कुमार ने बताया कि उसने 9 सितंबर 2025 को मामले में पुलिस अधीक्षक को शिकायत दी थी और स्थानीय पुलिस के पास भी गुहार लगाई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद मजबूर होकर उसने कोर्ट में याचिका दायर की। कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने के दिए निर्देश कोर्ट ने आदेश में कहा कि मामले में प्रथम दृष्टया धोखाधड़ी और साजिश के तत्व नजर आते हैं, इसलिए इसे पुलिस को भेजा जाता है। अदालत ने संबंधित थाना प्रभारी को निर्देश दिए कि आरोपियों के खिलाफ उचित धाराओं में एफआईआर दर्ज की जाए और मामले की जांच की जाए। साथ ही एसएचओ को 1 अप्रैल 2026 को कोर्ट में एफआईआर की कॉपी पेश करने और व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश भी दिए गए। फर्जी दस्तावेज किए तैयार मामले में आरोपी श्याम लाल और बलविंदर पुत्र जय भगवान निवासी गांव कैरवाली, सुमित धनखड़ (पटवारी हल्का कैरवाली) और नीरज कुमार पुत्र सुरेंद्र कुमार (मैनेजर एचडीएफसी बैंक, असंध) हैं। इन सभी पर आरोप है कि इन्होंने मिलकर साजिश रची और फर्जी दस्तावेज तैयार कर बैंक से लोन हासिल किया। केस दर्ज कर जांच में जुटी पुलिस कोर्ट के आदेश के बाद थाना मधुबन में 31 मार्च को मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले की जांच मंगलौरा चौकी पुलिस को सौंपी जाएगी। पुलिस का कहना है कि कोर्ट के आदेश के अनुसार मामला दर्ज कर लिया गया है। मामले की जांच शुरू कर दी गई है और दस्तावेजों की जांच के साथ-साथ आरोपियों से पूछताछ की जाएगी। मामले में शामिल सभी पहलुओं की गहराई से जांच कर आगे की कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।