लुधियाना जिले के खन्ना में पुलिस ने एक बड़े फर्जी मेडिकल और डोप टेस्ट रैकेट का भंडाफोड़ किया है। इस रैकेट ने सरकारी व्यवस्था में सेंध लगाकर लंबे समय से अवैध कमाई की थी। इस गिरोह का मास्टरमाइंड 23 वर्षीय बीबीए ड्रॉपआउट मंचित कुमार है, जो कम समय में अमीर बनने की चाहत रखता था। जांच में सामने आया कि मंचित कुमार ने पहले क्रिप्टोकरेंसी में निवेश किया, लेकिन अपेक्षित लाभ नहीं मिला। इसके बाद उसने अपराध की दुनिया में कदम रखा और एक ऐसा नेटवर्क बनाया जो पूरी तरह असली प्रतीत होता था। इस काम में लुधियाना के फील्डगंज निवासी रमेश कुमार उर्फ टोनी उसका सहयोगी था। कोविड काल में रखी रैकेट की नींव इस रैकेट की नींव कोविड-19 महामारी के दौरान रखी गई थी। उस समय मंचित ने खन्ना के सिविल अस्पताल में निजी तौर पर काम किया था। इस दौरान उसने अस्पताल के कामकाज, दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया और अधिकारियों के हस्ताक्षर व मोहरों की बारीकियों को समझा। यही जानकारी बाद में उसकी आपराधिक गतिविधियों का आधार बनी। धीरे-धीरे मंचित और उसके साथी ने फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट, नकली डोप टेस्ट रिपोर्ट और अन्य जाली दस्तावेज बनाने शुरू कर दिए। ये दस्तावेज मुख्य रूप से शस्त्र लाइसेंस बनवाने वालों, सरकारी नौकरी के उम्मीदवारों और अदालती मामलों में पेश होने वाले लोगों के लिए तैयार किए जाते थे। आरोपियों द्वारा बनाए गए दस्तावेज इतने शातिर थे कि उन्हें असली से अलग पहचानना लगभग असंभव था। दिखाने के लिए शुरू किया साइकिल स्टैंड और पार्किंग का काम गिरोह ने अपने अवैध धंधे को छिपाने के लिए साइकिल स्टैंड और पार्किंग का काम भी शुरू कर रखा था। इसकी आड़ में वे लोगों से संपर्क करते और मोटी रकम लेकर फर्जी दस्तावेज तैयार करते थे। इस रैकेट का पर्दाफाश तब हुआ जब लुधियाना के हिमांशु अरोड़ा का फर्जी डोप टेस्ट किया गया और उसे जाली सर्टिफिकेट दिया गया। इस सर्टिफिकेट की एक प्रति खन्ना के एसएमओ डॉ. मनिंदर सिंह भसीन को मिली, जिसके बाद उन्होंने तुरंत एसएसपी को शिकायत दर्ज कराई। फर्जी मोहरें और अन्य सामान बरामद छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से कई चौंकाने वाले सामान बरामद किए। इनमें रिटायर्ड और मौजूदा एसएमओ (सीनियर मेडिकल ऑफिसर) समेत कई डॉक्टरों की फर्जी मोहरें, डोप टेस्ट की सील, ओपीडी स्लिप, आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य जरूरी दस्तावेज शामिल हैं। इनकी मदद से आरोपी असली जैसे दिखने वाले कागज तैयार कर लोगों को धोखा देते थे। इस पूरे ऑपरेशन को एसएसपी खन्ना डॉ. दर्पण आहलूवालिया की अगुवाई में अंजाम दिया गया। पुलिस का कहना है कि यह रैकेट काफी समय से सक्रिय था और इसमें अन्य लोगों के शामिल होने की भी आशंका है।