हरियाणा की नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT) कुरुक्षेत्र से इंजीनियरिंग कर रहे स्टूडेंट पवन कुमार के सुसाइड केस में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पुलिस की जांच में सामने आया है कि पवन को ऑनलाइन गेमिंग का चस्का था। वह काफी समय से स्टेक (STAKE) नाम के ऑनलाइन गेमिंग एप में पैसे लगाता था। इसके लिए उसने अपने दोस्तों से रुपए उधार लिए थे। रुपए हारने के बाद उसके दोस्त ब्याज सहित रुपए वापस करने का दबाव बना रहे थे। पुलिस को पवन के कमरे से नोटबुक और उसका सुसाइड नोट भी मिला है। नोटबुक में खर्च का हिसाब-किताब लिखा हुआ है। हालांकि, परिवार ने ऑनलाइन गेमिंग की बात से इनकार किया है। मगर, दोस्तो के रुपए के लिए दबाव बनाने की शिकायत उन्होंने पुलिस से जरूर की है। चाचा का तो यहां तक कहना है कि उसने पवन के कुछ दोस्तों को रुपए वापस भी किए थे। साथ ही चेताया भी था कि भविष्य में पवन को रुपए ना दें। फिलहाल, पुलिस इस मामले में गहनता से जांच कर रही है। 31 मार्च की शाम को पवन का शव हॉस्टल में लटका मिला था जिला नूंह के घासैड़ा गांव का रहने वाला पवन कुमार (22) NIT कुरुक्षेत्र के हॉस्टल नंबर-8, ब्लॉक-सी, कमरा नंबर 452 में अकेला रहता था। पवन NIT से बीटेक इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के तीसरे साल में पढ़ रहा था। मंगलवार यानी 31 मार्च की शाम करीब 7 बजे पवन का शव उसके हॉस्टल के कमरे में फंदे से लटका मिला था। पुलिस इस मामले की जांच कर रही है। छात्र पवन के पिता ने क्या-क्या आरोप लगाए…. बेटे ने कई बार परेशानी के बारे में बताया विजेंद्र ने बताया कि बेटे के दोस्तों ने अपने क्रेडिट कार्ड से पैसे दिए और कुछ क्रेडिट कार्ड पवन के पास भी रख दिए। बेटे ने कई बार फोन पर उन्हें इस परेशानी के बारे में बताया था। मैंने सारे पैसे चुकता कर दिए थे, लेकिन दबाव कम नहीं हुआ। उनकी फोन पर भी पवन के साथ बातचीत हुई थी। कमरे से नोटबुक और हिसाब-किताब बरामद पिता ने दावा कि पुलिस को पवन के कमरे से नोटबुक और उसका सुसाइड नोट मिला है। नोटबुक में खर्च का हिसाब-किताब लिखा हुआ है। चचेरे भाई अतुल ने आरोप लगाया कि सुसाइड नोट में निखिल समेत 5 का नाम लिख है। ये लोग उसके साथ ही घूमते थे, लेकिन पैसे के लिए दबाव बना रहे थे। यहां जानिए पुलिस को अब तक जांच में क्या मिला… यहां जानिए सरकार ऑनलाइन गेम्स पर क्या कानून लाई…. सरकार की ओर से ऑनलाइन गेमिंग एप को लेकर जो बिल लाई थी, उसे राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई है और ये कानून बन गया है। इससे पहले 21 अगस्त 2025 को राज्यसभा ने और उससे एक दिन पहले लोकसभा ने प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग बिल 2025 को मंजूरी दी थी। इस बिल को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पेश किया था। इस बिल में कहा गया है कि चाहे ये गेम्स स्किल बेस्ड हों या चांस बेस्ड दोनों पर रोक लगेगी। रियल-मनी गेम्स पर रोक: कोई भी मनी बेस्ड गेम ऑफर करना, चलाना, प्रचार करना गैरकानूनी होगा। ऑनलाइन गेम खेलने वालों को कोई सजा नहीं होगी। सजा और जुर्माना: अगर कोई रियल-मनी गेम ऑफर करता है या उसका प्रचार करता है, तो उसे 3 साल तक की जेल और 1 करोड़ रुपए तक का जुर्माना हो सकता है। विज्ञापन चलाने वालों को 2 साल की जेल और 50 लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकता है। रेगुलेटरी अथॉरिटी: एक खास अथॉरिटी बनाई जाएगी, जो गेमिंग इंडस्ट्री को रेगुलेट करेगी, गेम्स को रजिस्टर करेगी और ये तय करेगी कि कौन सा गेम रियल-मनी गेम है। ई-स्पोर्ट्स को बढ़ावा: पबजी और फ्री फायर जैसे ई-स्पोर्ट्स और सोशल गेम्स को सपोर्ट किया जाएगा। ये गेम्स बिना पैसे वाले होते हैं इसलिए इन्हें बढ़ावा मिलेगा। ———————
ये खबर भी पढ़ें… गुरुग्राम में बेटिंग एप की लत में युवक का सुसाइड:सरकार के बैन से ₹5 लाख फंसे तो परेशान हुआ; भाजपा नेता का भाई, 2 बच्चों का पिता था हरियाणा के गुरुग्राम में एक युवक के ऑनलाइन बेटिंग एप में 5 लाख रुपए फंस गए। इससे परेशान होकर उसने रस्सी से फांसी लगाकर सुसाइड कर लिया। युवक मूल रूप से पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले के बुटीडीह गांव का रहने वाला था। वर्तमान में वह पत्नी और दो बच्चों के साथ मानेसर में रह रहा था। (पूरी खबर पढ़ें)