चंडीगढ़ में बिना इम्पैक्ट असेसमेंट किया नीड बेस्ड ऑर्डर:मनीष तिवारी के सवाल पर सरकार का लोकसभा में जवाब, लोगों को राहत नहीं

लोकसभा में चंडीगढ़ के सांसद मनीष तिवारी द्वारा उठाए गए एक सवाल के जवाब में केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि विवादित नीड बेस्ड चेंजेज (NBC) ऑर्डर लागू करने से पहले उसका कोई प्रभाव आकलन (Impact Assessment) नहीं किया गया था। इतना ही नहीं, सरकार ने फिलहाल बिल्डिंग बायलॉज में किसी भी तरह का संशोधन या ढील देने से भी साफ इनकार कर दिया है। तिवारी ने पूछे कई सवाल सांसद मनीष तिवारी ने प्रश्न संख्या 6298 के जरिए चंडीगढ़ के निवासियों की की समस्या पर सवाल किया। तिवारी ने पूछा था कि 3 जनवरी 2023 को CHB के चेयरमैन द्वारा जारी आदेश क्या बिना सोचे-समझे लागू किया गया। क्या आदेश जारी करने से पहले जनता पर इसके असर का अध्ययन हुआ। 2023 से 2025 के बीच रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों (RWAs) से कितनी शिकायतें मिलीं। क्या सरकार पात्रता और भारी-भरकम जुर्मानों में कोई ढील देने पर विचार कर रही है मंत्री का जवाब बायलॉज में बदलाव का कोई प्रस्ताव नहीं केंद्रीय हाउसिंग और शहरी मामलों के राज्यमंत्री टोकहन साहू ने लिखित जवाब में जो कहा की उसने आवंटियों की चिंता बढ़ा दी है। मंत्री ने माना कि चंडीगढ़ प्रशासन ने उक्त आदेश का कोई इम्पैक्ट असेसमेंट नहीं किया। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि क्लॉज 20 के क्रियान्वयन पर लोगो से बात की गई है। सरकार ने स्पष्ट किया कि चंडीगढ़ बिल्डिंग रूल्स (अर्बन) 2017 में फिलहाल किसी संशोधन या तार्किक बदलाव का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। लोगों के हित नहीं देख रही सरकार मंत्री के मुताबिक ये नियम पड़ोसी राज्यों के बायलॉज का विश्लेषण करने के बाद बनाए गए और सभी इमारतों के लिए मानक तय किए गए। सरकार के जवाब पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सांसद मनीष तिवारी ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि यह बेहद अफसोसजनक है कि सरकार करीब 3.5 लाख आवंटियों की समस्याओं को मानवीय दृष्टिकोण से नहीं देख रही है।

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