चंडीगढ़ पुलिस की सिक्योरिटी एक्सपोज:रिटायर्ड SP बोले- कहावत थी कि यहां क्राइम संभव लेकिन भागना नामुमकिन, वह चीज होनी चाहिए

चंडीगढ़ के सेक्टर-37 स्थित पंजाब भाजपा के हेडक्वार्टर के बाहर ग्रेनेड हमला होने से चंडीगढ़ की सिक्योरिटी एक्सपोज हो गई है। 1 अप्रैल की शाम 5 बजे हमलावर वारदात को अंजाम देकर आसानी से निकल गए। उसके बाद चंडीगढ़ पुलिस न तो उनकी कैमरों से पहचान कर पाई, और न ही ह्यूमन इनपुट कारगर साबित हुआ। उन्हें पकड़ने के लिए पुलिस ने चंडीगढ़, मोहाली और पटियाला में दबिश दी। इसके बाद गुरुवार देर रात 2 लोगों को रोपड़ से पकड़ा गया। हालांकि, यह कार्रवाई भी पंजाब पुलिस ने की। चंडीगढ़ पुलिस की इस वर्किंग को लेकर चंडीगढ़ के एक रिटायर SP का कहना है कि चंडीगढ़ में पहले कोई क्राइम तो कर सकता था, लेकिन क्राइम के बाद शहर से निकल नहीं सकता था। वह चीज होनी चाहिए। नए रोड बने अपराधियों के सेफ रूट चंडीगढ़ से आसानी से अपराधियों के बाहर निकलने की सबसे बड़ी वजह शहरीकरण है। चंडीगढ़ और पंचकूला में अत्यधिक विकास हुआ। इस वजह से शहर में कनेक्टिविटी बढ़ी है। आवाजाही के लिए नए रोड बने हैं। अब ये रोड ही आरोपियों के लिए सेफ रूट का काम कर रहे हैं। चंडीगढ़ से पंचकूला 13 किलोमीटर है। जबकि, मोहाली की दूरी 8 से 10 किलोमीटर है। 3 शहरों में पहले 4 से 5 रोड होते थे। अब कई नए कट या रोड बने हैं। चंडीगढ़ से मोहाली और पंचकूला जाने के ये रास्ते खुले इसमें पहले मलोया थाना क्षेत्र में पहला रास्ता चंडीगढ़ से जुझार नगर की ओर जाता है, जो मोहाली में निकलता है। दूसरा रास्ता झांमपुर की ओर जाता है। तीसरा रास्ता मलोया सत्संग भवन से होता हुआ गांव तोगा की ओर निकलता है और टोड़ा से होकर सीधा मोहाली के पीसीए स्टेडियम से जुड़ता है। यहां पुलिस का कोई पहरा नहीं होता। इसी तरह मल्लांपुर रोड, जो बद्दी, कुराली, न्यू चंडीगढ़ और ओमैक्स की ओर जाता है। वहां भी पुलिस ने कोई नाका नहीं लगाया। वहीं, कैम्बवाला, मनीमाजरा, मौलीजागरां, किशनगढ़ और आईटी पार्क से पंचकूला में एंट्री होती है। इसके अलावा जगतपुरा से सीधे मोहाली और आगे हरियाणा की ओर रास्ता जाता है। फेज-6 मैक्स हॉस्पिटल वाला रास्ता ही एक ऐसा है, जहां कुछ दिनों से नाकाबंदी की गई है। बाकी जगह नाकाबंदी न होने का फायदा अपराधियों को मिल रहा है। चंडीगढ़ पुलिस का ऑपरेशन सेल बड़े केस सॉल्व कर चुका चंडीगढ़ पुलिस का ऑपरेशन सेल कभी आतंकियों और देशद्रोही गतिविधियों पर बड़ी कार्रवाई के लिए जाना जाता था। बीते वर्षों में डीएसपी बीडी बैक्टर, केआईपी सिंह, सतबीर सिंह, जगबीर सिंह, विजय कुमार, इंस्पेक्टर हरिंदर सेखों और इंस्पेक्टर अमनजोत के कार्यकाल में कई बड़े खुलासे हुए। वर्ष 2006 के सेक्टर-17 बम ब्लास्ट के आरोपियों को अगले ही दिन गिरफ्तार कर लिया गया था। डीएसपी विजय कुमार ने पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के साजिशकर्ता जगतार सिंह हवारा को प्रोडक्शन वारंट पर लाकर पूछताछ की। इसके बाद बुड़ैल जेल में 9 नई सुरंगों का खुलासा हुआ। गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को भी शुरुआती दौर में ऑपरेशन सेल ने ही गिरफ्तार किया था। प्रिंस चौहान और बंबीहा गैंग के गुर्गों को हथियारों सहित पकड़ा गया था। लॉरेंस बिश्नोई के नाम पर फिरौती मांगने के मामले में भी बड़ी रिकवरी हुई थी। हालांकि, हाल के कुछ सालों से इसमें कमी आई है। इन केसों में चंडीगढ़ पुलिस विफलता दिखी चंडीगढ़ पुलिस की वर्किंग पर रिटायर्ड अधिकारी ने ये बातें कहीं…

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