चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की CFO नलिनी गिरफ्तार:118 करोड़ घोटाला मामले में पुलिस की कार्रवाई, 50 करोड़ कैश लेने का आरोप

चंडीगढ़ नगर निगम से जुड़े 118 करोड़ रुपये की जाली एफडी घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की सीएफओ नलिनी मलिक को गुरुवार को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक नलिनी मलिक ने आईडीएफसी बैंक के पूर्व मैनेजर रिभव ऋषि के जरिए करीब 50 करोड़ रुपये कैश और 2 लाख से ज्यादा की रकम अपने बैंक अकाउंट में ली। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को अदालत में पेश किया गया। पुलिस ने घोटाले की रकम की बरामदगी के लिए 7 दिन का रिमांड मांगा, लेकिन कोर्ट ने 4 दिन का पुलिस रिमांड मंजूर किया। ये मामला अब संसद तक पहुंच गया है। चंडीगढ़ के सांसद मनीष तिवारी ने संसद में इस घोटाले को उठाते हुए कहा कि सरकारी फंड में इतनी बड़ी गड़बड़ी होना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने आरबीआई और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की। छापेमारी में अहम सामान बरामद पुलिस पहले ही नलिनी मलिक की बहन के घर से उसकी कार, लैपटॉप, पेन ड्राइव, सीरियल नंबर वाला पैड और अन्य सामान जब्त कर चुकी है। पुलिस का मानना है कि पूछताछ में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं। घोटाले के दूसरे मामले में पुलिस प्रोजेक्ट डायरेक्टर सुखविंदर को साथ लेकर नोएडा पहुंची है। यहां दीपक नाम के व्यक्ति के घर सर्च वारंट लेकर जांच की जा रही है। जांच में सामने आया है कि शेल कंपनियों के जरिए भेजे गए पैसों में से 2 करोड़ रुपये से ज्यादा दीपक के अकाउंट में ट्रांसफर हुए। पुलिस के अनुसार यह ट्रांजेक्शन सुखविंदर के कहने पर हुई। IFS अफसर के रिश्तेदार से जुड़े तार पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि दीपक के संबंध एक आईएफएस अधिकारी के रिश्तेदार से जुड़े हैं। वहीं पुलिस ने सुखविंदर की कार और लैपटॉप भी बरामद कर लिए हैं। जल्द इस मामले में एक और बड़ी गिरफ्तारी हो सकती है। मामले में गिरफ्तार प्रोजेक्ट डायरेक्टर सुखविंदर सिंह पर आरोप है कि उसने करीब 2.50 करोड़ रुपए अपनी मां, दोस्त और अपने खातों में ट्रांसफर करवाए। अब इस मामले के तार एक आईएफएस अफसर तक भी जुड़ते नजर आ रहे हैं। शासन के बड़े अधिकारियों तक पहुंच सकता है मामला जांच में सामने आया है कि यह मामला चंडीगढ़ प्रशासन के बड़े अधिकारियों तक पहुंच सकता है। सूत्रों के मुताबिक, एक ऑडियो रिकॉर्डिंग और कुछ चैट्स पुलिस के हाथ लगी हैं, जिनमें संबंधित आईएफएस अफसर द्वारा सुखविंदर को गिरफ्तारी से पहले भागने और अग्रिम जमानत लेने की सलाह देने की बात सामने आई है। पुलिस जल्द ही इस आईएफएस अफसर से पूछताछ कर सकती है। वहीं, मामले को गंभीरता से देखते हुए इसे सीबीआई को सौंपने की भी तैयारी की जा रही है। मां और दोस्त के खातों में ट्रांसफर किए पैसे आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के पूर्व मैनेजर रिभव ऋषि ने पूछताछ में बताया कि सुखविंदर सिंह ने करीब 2.5 करोड़ रुपए अपने खाते, अपनी मां सुरिंदर कौर के खाते और अपने दोस्त दीपक के खाते में ट्रांसफर करवाए। इसके अलावा कैपको फिनटैक और स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट नाम की कंपनियों के जरिए भी करोड़ों रुपए का गड़बड़झाला किया गया। आरोप है कि कुछ पैसा नकद लिया गया और बाद में एचडीएफसी बैंक में जमा कराया गया। शेल कंपनियों के कर्मचारियों ने भी किया खुलासा जांच में पता चला है कि शेल कंपनियों से जुड़े कर्मचारियों- मनीष, भूपिंदर सिंह और अमरजीत पाल सिंह ने माना है कि उन्होंने सुखविंदर को नकद पैसा दिया था। इससे घोटाले का दायरा और बढ़ गया है। इस मामले में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की पूर्व सीएफओ नलिनी भी जांच के घेरे में आ गई हैं। पुलिस ने नलिनी की बहन के घर से कार, लैपटॉप, पेन ड्राइव और जरूरी दस्तावेज जब्त किए हैं। हालांकि नलिनी ने आरोपों को नकारते हुए कहा है कि उनका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है। उनका कहना है कि वह धार्मिक यात्रा पर गई हुई हैं और लौटने के बाद जांच में शामिल होंगी। ऑडिट मैनेज करने के लिए लगवाए गए सोलर पैनल रिभव ऋषि ने पुलिस पूछताछ में बताया कि हर तीन महीने में बैंक की ऑडिट होती थी। उनकी ब्रांच में ऑडिटर के रूप में नरेश सुखीजा और दीपक कुमार आते थे। ऑडिट में गड़बड़ियों को छिपाने के लिए उन्हें खुश रखने के उद्देश्य से उनके घरों पर सोलर पैनल लगवाए गए। इसके लिए ऋषि ने अपने सेविंग अकाउंट से रकम ट्रांसफर कर क्रेस्ट के प्रोजेक्ट डायरेक्टर सुखविंदर अबरोल के खाते में डाली थी। पुलिस ने हाल ही में सुखविंदर अबरोल को भी गिरफ्तार किया है, जिसे पांच दिन के रिमांड पर लिया गया है।

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