बिहार में सत्ता परिवर्तन की घड़ी अब बेहद करीब है। नीतीश कुमार जा रहे हैं। 20 अप्रैल तक नई सरकार बन सकती है। लेकिन यह फैसला अचानक या होली के आसपास नहीं लिया गया। इसकी तैयारी सरकार बनने के बाद से ही शुरू हो गई थी। फरवरी से तो नीतीश कुमार ने व्यवस्थित तरीके से खुद को सरकारी कामकाज से दूर करना शुरू कर दिया। कैबिनेट बैठकें बंद कर दीं। नई योजनाओं की घोषणाएं थम गईं, समृद्धि यात्रा भी सड़क-पुल तक सीमित रह गई। नतीजा-पिछले दो महीनों से बिहार की 13 करोड़ आबादी नीतिगत फैसलों से दूर है। सरकार रूटीन मोड में चल रही है और अफसर अपनी-अपनी सेटिंग में व्यस्त हैं। आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाहीं में…नीतीश कुमार ने अपने को सरकार के कामकाज से कैसे धीरे-धीरे, लेकिन पूरी तरह अलग कर लिया। स्टेप बाई स्टेप। स्टेप-1ः सदन छोड़ा, सरकार का जवाब सम्राट से दिलवाया 20 नवंबर को 10वीं बार मुख्यमंत्री बनने के साथ ही नीतीश कुमार ने विधानसभा/विधान परिषद को एक तरह से छोड़ दिया। वह सदन में गए जरूर, लेकिन कोई बड़ा राजनीतिक भाषण नहीं दिया। मीडिया से दूरी बनाए रखी। सदन में बोले भी तो बस इतना कि आप लोगों (विपक्ष) ने कुछ काम नहीं किया। बजट में नहीं दिखी नीतीश की झलक, मंत्री ने 12 मिनट में निपटाया स्टेप-2ः कामकाज छोड़ा, कैबिनेट की बैठक बुलानी बंद की सरकार बनने के कुछ महीनों तक कैबिनेट की बैठक की। विभागों का रिव्यू किया, लेकिन बीते डेढ़ महीने से कैबिनेट की बैठक भी नहीं की। इस तरह वे बड़े नीतिगत निर्णयों से अपने को दूर करते दिख रहे हैं। हालांकि, वह लगातार बाहर निरीक्षण करते दिख रहे हैं। बीते 3 महीने में सिर्फ 4 कैबिनेट की बैठक (16, 29 जनवरी और 6, 20 फरवरी) हुई। जबकि, नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद एक नियम/परंपरा बनाई थी कि हर सप्ताह के मंगलवार या शुक्रवार को कैबिनेट की बैठक होगी। इस परंपरा के मुताबिक, जनवरी से मार्च के बीच कम से कम 12 कैबिनेट की बैठक होनी चाहिए थी। आखिरी कैबिनेट की बैठक 20 फरवरी को हुई थी, यह बजट सत्र के बीच हुई थी, इसलिए कैबिनेट के फैसले को सार्वजनिक नहीं किया गया। नीतीश सरकार का आखिरी बड़ा फैसला 29 जनवरी को कैबिनेट में लिया गया था। इसमें 4 बड़े निर्णय लिए गए थे… कैबिनेट नहीं होने से रुका विकास स्टेप-3ः सार्वजनिक कार्यक्रमों से बनाई दूरी, बेटे को आगे किया राज्यसभा जाने के ऐलान के कुछ दिन बाद से नीतीश कुमार ने अपने को बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूर कर लिया है। इसे 2 बड़े इवेंट से समझिए… 1. ईद मिलन में बेटे को भेजा, 20 साल की तोड़ी परंपरा बीते 20 साल में पहली बार हुआ जब 21 मार्च गांधी मैदान में ईद मिलन समारोह में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नहीं गए। 2. राष्ट्रपति के कार्यक्रम में मंत्री को भेजा, अपने CM हाउस में रहें 31 मार्च को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू बिहार दौरे पर थीं। वह नालंदा यूनिवर्सिटी के दूसरे दीक्षांत समारोह में शामिल हुईं। इस कार्यक्रम में राज्य सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर मंत्री श्रवण कुमार शामिल हुए। स्टेप-4ः CM पद छोड़ने से पहले घर और सिक्योरिटी के पुख्ता इंतजाम 30 मार्च को नीतीश कुमार ने विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। इसका मतलब कि वह अब ज्यादा दिनों तक मुख्यमंत्री नहीं रहेंगे। विधान परिषद से इस्तीफा देने के बाद नीतीश कुमार ने लगातार 2 दिन पटना के 7 सर्कुलर रोड वाले बंगले में गए। घर का जायदा लिया। इस बंगले से नीतीश कुमार का लंबे समय से जुड़ाव रहा है। CM रहते हुए भी वह कभी-कभी इस्तेमाल करते रहे हैं। जेड प्लस सिक्योरिटी पर मुहर गृह विभाग ने नोटिफिकेशन जारी कर बताया है कि मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद भी नीतीश कुमार को Z+ कैटेगरी की सिक्योरिटी मिलेगी। वेट एंड वॉच’ मोड में अफसरशाही बिहार में सरकार के बदलाव की चर्चाओं के बीच अफसर फिलहाल ‘तटस्थ’ मोड में है। अधिकारियों को डर है कि नया नेतृत्व आने पर सरकार की प्राथमिकताएं बदल सकती हैं। ऐसे में पुरानी योजनाओं को तेजी देने से अफसर बच रहे हैं। चूंकि बरसात के महीनों में इंफ्रास्ट्रक्चर का काम वैसे भी बंद रहता है, इसलिए अगर अभी फैसले नहीं हुए, तो राज्य में नए निर्माण कार्य अब सीधे साल के अंत में ही शुरू हो पाएंगे।