पंजाब कांग्रेस ने 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए अभी से कमर कस ली है। पार्टी ने फैसला किया है कि अब टिकट केवल ‘पसंद-नापसंद’ के आधार पर नहीं, बल्कि परफॉरमेंस (कार्य-प्रदर्शन) के आधार पर दी जाएगी। 2027 विधानसभा चुनाव के टिकट आवंटन से पहले कांग्रेसी विधायकों का परफार्मेंस टेस्ट होगा। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कांग्रेस पंजाब में चुनाव से पहले विधायकों का सर्वे करवाएगी। इसकी जिम्मेदारी प्रमुख चुनावी रणनीतिकार सुनील कानूगोलू को दी गई है। जानकारी के मुताबिक मशहूर चुनावी रणनीतिकार सुनील कानूगोलू और उनकी टीम पंजाब के सभी विधानसभा क्षेत्रों में सर्वे करेगी। हर विधानसभा की रिपोर्ट हाईकमान को सौंपी जाएगी। इलेक्शन से पहले यह सर्वे मुकम्मल किया जाएगा। ताकि, डिजर्विंग कैंडिडेट्स और जीत सकने वाले कैंडिडेट को ही टिकट दी जाए। बता दें, यह टीम पहले कर्नाटक और तेलंगाना जैसे राज्यों में कांग्रेस की जीत में अहम भूमिका निभा चुकी है। अब सर्वे रिपोर्ट के हिसाब से ही उम्मीदवार तय किए जाएंगे कि किसे चुनाव मैदान में उतारना है और किसे नहीं।
तीन कैटेगरी में बंटेंगे उम्मीदवार
सूत्रों के अनुसार, 2027 के चुनाव के लिए कांग्रेस ब्लॉक और बूथ लेवल की रिपोर्ट तैयार कर रही है। सर्वे के आधार पर उम्मीदवारों को तीन श्रेणियों (A, B और C) में रखा जाएगा।
Category A: वे जो मजबूत हैं और जिनकी जीत पक्की है।
Category B: जहां कड़ी मेहनत की जरूरत है।
Category C: जहां नए चेहरों की जरूरत है या मौजूदा विधायक की स्थिति कमजोर है। विधायकों का होगा रिव्यू
कांग्रेस से जुड़े सूत्रों का कहना है कि मौजूदा कांग्रेसी विधायकों के पिछले सालों के कामकाज, जनता के बीच उनकी पकड़ और उनकी ‘विनेबिलिटी’ (जीतने की क्षमता) का गहराई से विश्लेषण होगा। माना जा रहा है कि इस कदम से पार्टी के अंदर चलने वाली गुटबाजी और ‘फेवरेटिज्म’ को कम करने की कोशिश की जा रही है। राहुल गांधी ने भी हाल ही में पंजाब दौरे पर नेताओं को एकजुट होने की हिदायत दी थी। कौन हैं सुनील कानूगोलू
सुनील कानूगोलू एक प्रमुख भारतीय चुनावी रणनीतिकार हैं, जिन्हें मुख्य रूप से कांग्रेस पार्टी को कर्नाटक (2023) और तेलंगाना (2023) विधानसभा चुनावों में ऐतिहासिक जीत दिलाने का श्रेय दिया जाता है। वे डेटा-आधारित, जमीनी स्तर के सर्वे के लिए जाने जाते हैं। 2014 में भाजपा के लिए काम करने के बाद, उन्होंने दक्षिण भारत में अपनी पहचान बनाई। सुनील कर्नाटक के मूल निवासी हैं, लेकिन उनका पालन-पोषण चेन्नई में हुआ। भले ही सुनील ने आज तक खुद को लो प्रोफाइल रखा है, लेकिन राजनीतिक हलकों में उनका खासा नाम है। सुनील ने प्रशांत किशोर सहित मोदी के साथ किया काम
आरंभ में सुनील और प्रशांत किशोर दोनों ने भाजपा के लिए नरेंद्र मोदी के साथ काम किया। सुनील ने एसोसिएशन ऑफ बिलियन माइंड्स (ABM) के तहत पार्टी के लिए काम किया। उनकी विशेषज्ञता ने भाजपा की उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गुजरात और कर्नाटक चुनाव अभियानों में चुनावी सफलता हासिल करने में मदद की।
बाद में, उन्होंने 2016 में DMK विधानसभा चुनाव अभियान को चलाया और DMK प्रमुख एमके स्टालिन के लिए “नमाक्कू नाम” (हम अपने लिए) अभियान चलाकर उन्हें जीत दिलाई और वे मुख्यमंत्री बन सके थे। सुनील कानूगोलू के बारे में मुख्य बातें:
पृष्ठभूमि: मूल रूप से कर्नाटक के बेल्लारी के रहने वाले और चेन्नई में पले-बढ़े, सुनील ने अमेरिका से पढ़ाई की और मैकिन्से के पूर्व सलाहकार रहे हैं।
करियर की शुरुआत: उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रशांत किशोर के साथ काम किया और नरेंद्र मोदी के प्रचार अभियान का हिस्सा थे।
राजनीतिक बदलाव: 2014 के बाद भाजपा के साथ रहने के बाद, 2019 में डीएमके (DMK) और 2021 में अन्नाद्रमुक (AIADMK) के लिए रणनीति बनाई।
कांग्रेस में भूमिका: 2022 में कांग्रेस में शामिल हुए और ‘टास्क फोर्स-2024’ का हिस्सा बने। कर्नाटक में “पे सीएम” (PayCM) जैसे आक्रामक अभियानों और जमीनी स्तर के सर्वे के कारण उन्हें सफलता मिली।
कार्यशैली: सोशल मीडिया से दूर, शांत रहकर और डेटा, सांख्यिकी और सर्वे के आधार पर रणनीति बनाते हैं।
वर्तमान: उन्हें कांग्रेस की चुनावी रणनीति में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और भरोसेमंद चेहरा माना जाता है।