चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (CHB) के हजारों लोगों के लिए खतरे की घंटी बज चुकी है। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के सख्त आदेशों के बाद बोर्ड ने अब उन रिहायशी मकानों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है, जिन्होंने न केवल सरकारी जमीन पर कब्जा किया है, बल्कि घर के भीतर ऐसे बदलाव किए हैं जिससे पूरी बिल्डिंग की स्ट्रक्चरल सेफ्टी (ढांचागत सुरक्षा) खतरे में पड़ गई है। हाई कोर्ट के निर्देश पर CHB ने पहले चरण में सरकारी जमीन पर किए गए अवैध कब्जों को हटाने के लिए बड़े स्तर पर डिमोलिशन ड्राइव (तोड़फोड़ अभियान) शुरू की जा रही है। CHB के 60,000 से अधिक मकान हैं। जिनमें ज्यादातर वॉयलेशन हैं। तीन पॉइंट में समझें हाई कोर्ट का आदेश पूरा मामला CWP No. 2309 of 2014 से जुड़ा है। 21 अप्रैल 2022 को हाई कोर्ट ने अपना अंतिम फैसला सुनाते हुए बोर्ड को स्पष्ट निर्देश दिए थे: 1. हटाए गए पिलर और लोड-बियरिंग दीवारें तुरंत बहाल हों: जिन लोगों ने घर के अंदर पिलर, फाउंडेशन या बालकनी (Cantilevers) को हटाकर ढांचा कमजोर किया है, उन्हें एक महीने के भीतर ठीक किया जाए। 2. सुरक्षा से कोई समझौता नहीं: सभी प्रभावित मकानों की स्ट्रक्चरल सेफ्टी सुनिश्चित की जाए। 3. खर्चा अलॉटियों की जेब से: यदि बोर्ड मरम्मत करवाता है, तो उसका पूरा खर्च संबंधित अलॉटियों से वसूला जाएगा। इन सेक्टरों के निवासी रडार पर कोर्ट के आदेशानुसार, सेक्टर 41-A, 41-D, 45-A, 45-C, 45-D, 46, 47-C, 39-B और 29-B के निवासी सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। बोर्ड ने साफ कर दिया है कि बार-बार नोटिस देने के बावजूद जिन लोगों ने स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी सर्टिफिकेट जमा नहीं कराया है, उन पर अब कार्रवाई होगी। दो फेज में होगी कार्रवाई बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार, उल्लंघन करने वालों की संख्या बहुत अधिक है, इसलिए कार्रवाई को चरणों में बांटा गया है- फेज-1 (सरकारी जमीन): सार्वजनिक रास्तों और सरकारी जमीन पर किए गए निर्माणों को ढहाया जा रहा है। फेज-2 (स्ट्रक्चरल रिस्टोरेशन): घर के अंदर के अवैध बदलावों को कोर्ट द्वारा गठित कमेटी की निगरानी में ठीक किया जाएगा।