कांगड़ा में दाड़ी धुम्मूशाह मेला विवादों में:व्यापार मंडल अध्यक्ष हर्ष ओबेरॉय बोले- प्रशासन ने इसे ट्रेड फेयर बनाया, संस्कृति को नुकसान

कांगड़ा के ऐतिहासिक दाड़ी धुम्मूशाह मेले के स्वरूप और प्राचीन परंपराओं को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। दाड़ी व्यापार मंडल ने स्थानीय प्रशासन पर मेले की पहचान बिगाड़ने का आरोप लगाया है। व्यापार मंडल के अध्यक्ष हर्ष ओबेरॉय ने कहा कि यह आयोजन अब अपनी पारंपरिक पहचान खोकर एक ‘ट्रेड फेयर’ बन गया है। उन्होंने प्रशासन पर मेले का व्यापारीकरण कर पारंपरिक संस्कृति को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। ओबेरॉय ने हिमाचल प्रदेश सरकार की नीतियों और जमीनी हकीकत में विरोधाभास बताया। उन्होंने कहा कि जहां सरकार मंचों से प्राचीन संस्कृति के संरक्षण की बात करती है, वहीं स्थानीय प्रशासन इसके विपरीत काम कर रहा है। उनका आरोप है कि प्रशासन का पूरा ध्यान केवल राजस्व जुटाने और ऊंचे दामों पर प्लॉट नीलाम करने पर है, जिससे मेले के सांस्कृतिक मूल्य और स्थानीय व्यापारियों के हित प्रभावित हो रहे हैं। मेले में कम भीड़, छोटे व्यापारी मेरे से दूर इस वर्ष मेले में कम भीड़ देखी जा रही है, जिसका कारण प्लॉट के दोगुने दाम और बेमौसम बारिश को बताया गया है। ओबेरॉय ने कहा कि प्लॉट की ऊंची कीमतों के कारण छोटे व्यापारी मेले से दूर रहे, जबकि जो आए हैं, उन्हें भी भारी नुकसान हो रहा है। व्यापारियों का आरोप है कि प्रशासन ने दाड़ी मैदान को केवल राजस्व का स्रोत बना दिया है। व्यापार मंडल ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने अपनी नीतियों में सुधार नहीं किया और व्यापारियों को राहत नहीं दी, तो जल्द ही सामूहिक विरोध प्रदर्शन शुरू किया जाएगा। मेले की शुरुआत भराड़ी माता मंदिर में झंडा रस्म के साथ हुई थी, लेकिन व्यापारियों के आक्रोश ने उत्सव के रंग में भंग डाल दिया है। भीड़ जुटाने की कोशिश में प्रशासन हालांकि प्रशासन 9 से 11 अप्रैल तक होने वाली कुश्ती प्रतियोगिताओं (छिंज) के जरिए भीड़ जुटाने की कोशिश में है, जहां विजेता को एक लाख रुपये का इनाम दिया जाना तय है। जिला खेल अधिकारी और एसडीएम मोहित रतन ने इसे मनोरंजन और खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने वाला कदम बताया है। लेकिन स्थानीय व्यापार मंडल का मानना है कि जब तक मेले के व्यापारिक ढांचे को सरल और पारंपरिक नहीं बनाया जाता, तब तक ऐसे आयोजन केवल कागजी सफलता तक सीमित रहेंगे। इस बार 8 से 15 अप्रैल तक आयोजित हो रहे धुम्मूशाह मेले में बढ़ती महंगाई और महंगी व्यवस्थाओं के कारण आम ग्राहकों ने भी दूरी बना रखी है। कई दुकानदारों ने तो प्रशासन के रवैये और घटती बिक्री से तंग आकर अपना सामान समेटना भी शुरू कर दिया है, जो इस ऐतिहासिक मेले के भविष्य के लिए शुभ संकेत नहीं है।

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