‘सबकी मजबूरी होती है, मेरे पास भी बहुत बड़ी मजबूरी थी। इनकम का कोई सोर्स नहीं था। 2020-21 में दिल्ली में जॉब करता था, लेकिन किसी कारण से मैंने जॉब छोड़ दिया। मेरे ऊपर 3 लाख रुपए का कर्ज था। इसकी वजह से मैं गांव भी नहीं जा पाता हूं। सोचा था कि किडनी बेचने के बाद मुझे 10 लाख रुपए मिलेंगे। इस पैसे से कर्ज चुका दूंगा, बाकी बचे पैसे से बिजनेस स्टार्ट करूंगा, लाइफ सेट करूंगा।’ बिहार के बेगूसराय जिले के भगवानपुर के औगान गांव के रहने वाले आयुष कुमार चौधरी ने दैनिक भास्कर से बातचीत में ये बातें कही है। आयुष ने बताया कि मुझे कानपुर से लखनऊ रेफर किया गया था, अब मेरा दिल्ली में इलाज चल रहा है। दरअसल, खबर आई थी कि कानपुर में पैसों के लालच में आयुष ने अपनी किडनी बेच दी है। लेकिन जब आयुष के गांव के लोगों से बातचीत की तो कहानी कुछ और सामने आई। आयुष से किडनी बेचने के कारण के संबंध में बातचीत की तो उसने 4 मिनट तक रिपोर्टर के सवालों का जवाब दिया। इसके बाद कहा कि मैं ज्यादा देर तक बात नहीं कर पाऊंगा। दर्द हो रहा है। डॉक्टर ने ज्यादा बातचीत से मना भी किया है। मेरी जो कहानी है, मैं रिकार्ड करके भेज रहा हूं। आयुष ने 14 मिनट का एक ऑडियो शेयर किया, जिसमें उसने अपनी पूरी कहानी बताई है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट। सबसे पहले आयुष चौधरी की 2 तस्वीरें देखिए अब जानिए 14 मिनट के ऑडियो में आयुष ने क्या बताया? आयुष चौधरी ने बताया कि जॉब छोड़ने के बाद मैं बेरोजगार हो गया था। इसी दौरान एक दिन मोबाइल पर सोशल मीडिया स्क्रॉल करते हुए एक टेलीग्राम ग्रुप पर नजर पड़ी। इसमें बताया गया था कि टास्क कंप्लीट करने पर पैसे मिलेंगे। जब ग्रुप पर दिए गए नंबर पर पूछताछ की तो वहां अली नामक एक लड़के का नंबर मिला। मैंने उससे बातचीत की। अली ने बताया कि आपको अपना बैंक अकाउंट मुझे रेंट पर देना होगा। इसके लिए आपको पैसे मिलेंगे। मैंने अली से पूछा था कि ये कौन सा टास्क है तो उसने बताया कि टैक्स वगैरह बचाने के लिए आपके बैंक अकाउंट से ट्रांजेक्शन होगा। मुझे पैसों की जरूरत थी। इसलिए मैंने अपने केनरा बैंका का अकाउंट नंबर और अन्य डिटेल अली को शेयर किया। अली ने इसके लिए मुझे 20 हजार रुपए दिए। दरअसल, 20 हजार रुपए मिलने से पहले मेरे अकाउंट पर 85 हजार रुपए ट्रांसफर हुआ था। पैसे मिलने के बाद मेरे अकाउंट में एक लाख रुपए भेजे गए। इसके बाद मेरा अकाउंट फ्रीज हो गया। ‘बैंक जाकर पता किया तो जानकारी मिली कि मेरे अकाउंट से साइबर फ्रॉड हुआ है’ आयुष ने बताया कि मेरा अकाउंट फ्रीज हुआ तो मुझे इसकी जानकारी नहीं मिली। अली ने मुझे कॉल किया और मुझसे पूछा- तुमने अपना अकाउंट क्यों फ्रीज करा दिया? मैंने अली से कहा कि मुझे इस बारे में कुछ नहीं पता है। फिर मैं बैंक गया और अकाउंट फ्रीज होने के संबंध में जानकारी मांगी तो बैंक वालों ने बताया कि आपके अकाउंट से साइबर फ्रॉड हुआ है, इसलिए आपका अकाउंट फ्रीज किया गया है। मैंने इस बात की जानकारी अली को दी। अली ने कहा कि हो सकता है कि गलती से ऐसा हो गया, तुम टेंशन मत लो। आयुष ने आगे बताया कि मार्च में मुझे पैसे की जरूरत थी। मैंने अली से कहा कि कुछ काम मेरे लायक होगा तो बताना। मैंने ये भी कहा था कि इस बार फंसने, फंसाने वाला काम मत बताना। काम ऐसा हो कि कोई दिक्कत न हो और कुछ पैसे भी मेरे पास आ जाए। इसके बाद अली ने मुझे किडनी बेचने के संबंध में बताया। इसको लेकर मैंने अली से सवाल-जवाब किया तो उसने कहा कि सब कुछ कानून के हिसाब से ही होगा। बकायदा पेपर बनेगा, फिर ये सब प्रोसेस होगा। अली ने मुझे मेरठ के अल्फा अस्पताल के बारे में बताया। मैंने अस्पताल के बारे में पता किया। इसके बाद मुझे लगा कि सब कुछ लीगली होगा, ये नहीं पता था कि पुलिस वेरिफिकेशन करवाना पड़ता है। फिर अली की बातों में आकर मैंने विचार किया और किडनी बेचने के लिए तैयार हो गया। अली ने मुझे मेरठ बुलाया। मैं मोदीपुरम बाईपास पर उतरा तो गाड़ी से रिसीव करके मुझे अल्फा हॉस्पिटल पहुंचाया गया। अल्फा अस्पताल में वैभव और अमित नाम का व्यक्ति था, जिसने अस्पताल के ऊपर वाले रूम में कुछ देर के लिए बैठाया, फिर मेरठ के शास्त्री नगर में एक होटल में कमरा दिलवाया। ‘गाजियाबाद में डायग्नोस्टिक और MRI कराया गया था’ आयुष ने बताया कि मेरठ पहुंचने के अगले दिन मुझे गाजियाबाद ले जाया गया, जहां डायग्नोस्टिक और MRI हुआ। वहां से मुझे वापस मेरठ लाया गया। अगले दिन अफजल और परवेज नाम के शख्स मुझसे मिलने आए। इन दोनों के पास पारुल नाम की पेशेंट आई थी। अफजल और परवेज मुझे स्विफ्ट डिजायर से ले गया। मुझे कहीं ले जाया जा रहा था तो मैंने गाड़ी का नंबर अपने एक करीबी को वॉट्सएप पर भेज दिया था। इसके बाद अपने मोबाइल से ये सब डिलीट दिया। ये सब मैं इसलिए करता था, ताकि बाद में कोई दिक्कत न हो। मुझे मेरठ से कानपुर लाया गया, जहां मुझे दो दिन तक ठहराया गया। दो दिन बाद 21 मार्च को ईद थी, मुझसे कहा गया कि किडनी ट्रांसप्लांट में अभी समय लगेगा। इसके बाद मुझे वापस मेरठ लाया गया और होटल में ठहराया गया। 2 दिन बाद यानी 23 मार्च को मुझे फिर से कानपुर लाया गया। मैं अलग गाड़ी में था, साथ में दो और गाड़ियां थी, जिसमें अफजल, परवेज, अली, डॉक्टर अमित, डॉक्टर वैभव थे। अगले दिन यानी 24 मार्च को इन लोगों ने शामली में किडनी ट्रांसप्लांट की बात कही। आयुष के मुताबिक, हमे शामली गुरुद्वारा के पास देव हॉस्पिटल लाया गया। उसी दिन मैंने पहली बार पेशेंट पारुल को देखा, जो दूसरी गाड़ी में थी। तीन दिनों तक यहां मुझे एक होटल में ठहराया गया। 27 मार्च को मुझसे तैयार रहने को कहा गया। मुझे 6 हजार की जरूरत थी। अफजल ने 4 दिनों बाद 6 हजार रुपए दिए। इससे मुझे शंका हुई कि ये लोग 5-6 हजार रुपए देने में इतना समय ले रहे हैं तो किडनी ट्रांसप्लांट के बाद पूरे पैसे मिलेंगे या नहीं। लेकिन मैंने भरोसा किया। शाम को अचानक मुझे बताया गया कि किडनी ट्रांसप्लांट होगा। अमित और अली कानपुर में ही रुके हुए थे। मैं, अफजल और परवेज के साथ शामली से कानपुर पहुंचा। मुझे सुबह में ही बता दिया था कि खाना नहीं खाना है, इसलिए मैंने 8 बजे हल्का नाश्ता किया था। अकाउंट चेक करने के लिए मोबाइल मांग, लेकिन नहीं दिया आयुष ने बताया कि ऑपरेशन से पहले मैंने पेमेंट के बारे में पूछा तो कहा गया कि टेंशन मत लो। मुझे अफजल और परवेज के साथ प्रिया अस्पताल लाया गया, यहां शिवम नाम के लड़के से मुलाकात हुई। यहां पेशेंट के भाई दिव्यांक तोमर आया था। उसने भी मुझसे कहा कि तुम्हें पैसे मिल जाएंगे। इसके बाद मुझे अहूजा हॉस्पिटल लाया गया। देर शाम मुझे ऐंथेसिया लगा दिया, जिससे मेरी आंख बंद होने लगी। ऑपरेशन थिएटर में किडनी निकालने के बाद मुझे देर रात 2:30 बजे हॉस्पिटल लाया गया। सुबह मैं दर्द से परेशान था, नींद खुली तो मैंने अकाउंट बैलेंस चेक करने के लिए मोबाइल मांगा, लेकिन मुझे मोबाइल नहीं दिया गया। शाम को अचानक मेरे पास पुलिस आई, जिन्होंने मुझे मेरा फोन दिया। फोन अनलॉक कराया। पुलिस ने मुझसे अकाउंट चेक करने को कहा, मुझे समझ नहीं आया कि आखिर पुलिस कहां से आ गई। जब मैंने अकाउंट चेक किया तो 3.50 लाख रुपए आए थे। लेकिन इसके बाद बाकी का 6.50 लाख रुपए आज तक नहीं मिला है। पुलिस वाले ने उस समय कहा था कि मैं सभी पैसा दिलवा दूंगा, लेकिन आज तक नहीं मिला है। आयुष ने कहा- पुलिस ने भरोसा दिया था, लेकिन अब वे फोन नहीं उठाते आयुष ने कहा कि मैंने उसी वक्त पुलिस को बताया कि मैंने मजबूरी में ये काम किया है, तब पुलिस ने कहा था कि पैसे दिलवा देंगे, लेकिन अब पुलिस वाले भी मेरा कॉल नहीं उठाते। मुझे मेरे कपड़े, एटीएम, बैग आज तक नहीं दिए गए हैं। 30 मार्च को कुछ सुधार हुआ, लेकिन पेट में हल्का दर्द था, फिर मुझे बुखार आने लगा तो मुझे लखनऊ रेफर कर दिया गया। लखनऊ के अस्पताल से 6 अप्रैल को मुझे डिस्चार्ज कर दिया गया। तब मैंने दोबारा पुलिस को कॉल किया और पूरी कहानी बताई। मैंने मजबूरी में किडनी बेचा था, मैं पैसे के बदले किसी की जान बचा रहा था, लेकिन मैं किस लफड़े में पड़ गया। पैसा भी नहीं मिला और किडनी भी चली गई। हम परेशान हैं। मुझसे 10 लाख में किडनी की बात हुई थी। आयुष के खिलाफ गुजरात साइबर पुलिस का नोटिस भगवानपुर थाने के SHO नीरज कुमार ठाकुर ने चार दिन पहले दैनिक भास्कर रिपोर्टर को बताया कि गुजरात के सुरेंद्रनगर जिला के साइबर सेल पुलिस की ओर से शुक्रवार यानी 3 अप्रैल को हम लोगों को नोटिस मिला था। नोटिस की तामिल कराने के लिए पुलिस की टीम 4 अप्रैल को आयुष के घर पहुंची थी। लेकिन, आयुष के घर पर ताला लगा था, जिसके बाद नोटिस को वापस किया जा रहा है। साइबर सेल की ओर से जो नोटिस मिला है, उसमें कहा गया है कि आयुष ने अपने केनरा बैंक अकाउंट के जरिए बड़े पैमाने पर साइबर ठगी और हवाला का कारोबार किया है। नोटिस मिलने के बाद 15 दिन के अंदर साइबर सेल ने हाजिर होने का आदेश था।