पंजाब पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन जिला पठानकोट की कार्यकारिणी की बैठक जिला अध्यक्ष रजिंदर धीमान की अध्यक्षता में हुई। जिसमें पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट द्वारा पेंशनरों को 16% डीऐ देने के फैसले का स्वागत किया गया।
वहीं,कॉले झंडे लेकर पंजाब सरकार के खिलाफ रोष प्रदर्शन किया गया। इसके अलावा ऐलान किया गया कि रविवार को पठानकोट पहुंच रहे मुख्यमंत्री भगवंत मान को काले झंडे दिखाए जाएंगे।
कर्मचारियों, पेंशनरों को डीए देना नहीं देना चाहती सरकार
इस दौरान प्रधान रजिंदर धीमान, , सरपरस्त मंगत सिंह सहित अन्यों ने कहा कि पंजाब सरकार बेईमान है। इसलिए कर्मचारियों, पेंशनरों को डीए देना नहीं देना चाहती। जिसके कारण कर्मचारी-पेंशनरों में भारी रोष है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान पठानकोट आने पर काले झंडे दिखाकर रोष प्रकट किया जाएगा।
37 भत्ते पिछले 4 सालों से बंद
सतीश शर्मा महासचिव ने कहा कि केंद्र सरकार के मुकाबले पंजाब सरकार अपने कर्मचारियों और पेंशनरों को 16% महंगाई भत्ता कम दे रही है। इसी तरह ग्रामीण भत्ता, बॉर्डर एरिया भत्ता और ए.सी.पी. स्कीम समेत 37 भत्ते पिछले 4 सालों से बंद हैं।
पंजाब सरकार ने छठे वेतन आयोग की सिफ़ारिशों और इसके शेष दूसरे हिस्से को ठंडे बस्ते में डाल रखा है। जबकि, केंद्र सरकार आठवें वेतन आयोग की स्थापना कर चुकी है।
अपने वादे से पीछे हट रही सरकार
चेयरमैन युद्धवीर सिंह ने कहा कि पंजाब सरकार पेंशनरों की पेंशन का पुनरीक्षण 2.59 गुणांक के साथ नहीं कर रही, कच्चे मुलाज़िमों को स्थायी करने के लिए बनाई गई नीति अब तक की सबसे घटिया है, जो केवल 58 साल तक सेवा की गारंटी देती है और स्थायी कर्मचारियों वाले अन्य किसी भी लाभ को नहीं देती। पुरानी पेंशन बहाल करने के अपने वादे से सरकार पीछे हटकर इसे केंद्र सरकार से जोड़ रही है। कर्मचारियों को स्थायी नहीं कर रही सरकार
इसी प्रकार मिड-डे-मील वर्करों, आशा वर्करों, फैसिलिटेटरों और आंगनवाड़ी वर्करों व हेल्परों का मान-भत्ता दोगुना करने का वादा भी सरकार तोड़ चुकी है। वहीं, आउटसोर्स, इनलिस्टमेंट और केंद्र सरकार की योजनाओं के अंतर्गत काम करने वाले कर्मचारियों को स्थायी नहीं किया जा रहा, वेतन आयोग के 5 साल 6 महीने के बकाए एकमुश्त अदा करने की बजाय 42 और 36 किस्तों में देने की खोखली नीति अपनाई जा रही है। कर्मचारियों और पेंशनरों के महंगाई भत्ते की किस्तों के बकाए दबाए गए हैं। 01.01.2016 को वेतन और पेंशन तय करते समय 125% महंगाई भत्ता आधार नहीं माना गया, विकास के नाम पर पहले 200 रुपये जजिया कर्मचारियों से और अब पेंशनरों से भी वसूला जा रहा है। इसी रोष स्वरूप सरकार के खिलाफ रोष व्यक्त किया जाएगा।