चंडीगढ़ | हरियाणा के बिजली वितरण निगमों में उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के बीच इंटर यूटिलिटी ट्रांसफर पर हाई कोर्ट ने रोक को बरकरार रखा है। हाई कोर्ट ने साथ ही उस प्रावधान को असंवैधानिक घोषित कर रद्द कर दिया, जिसमें यह प्रतिबंध केवल ग्रुप-सी और डी कर्मचारियों पर लागू किया गया था। जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ की एकल पीठ ने कहा कि किसी विशेष वर्ग के कर्मचारियों के साथ पद के आधार पर भेदभाव करना संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत समानता के अधिकार का उल्लंघन है। किसी भी प्रकार की मनमानी कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के खिलाफ मानी जाएगी। 21 याचिकाओं पर एक साथ फैसला… 21 याचिकाओं के इस समूह में कर्मचारियों ने ट्रांसफर की मांग को लेकर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनका कहना था कि पहले समान परिस्थितियों में ट्रांसफर दिए गए, जबकि उनके मामलों में मनमाने ढंग से इनकार किया गया। हाई कोर्ट ने साफ किया कि प्रशासनिक नीति में समानता और पारदर्शिता अनिवार्य है। भेदभावपूर्ण प्रावधानों को खत्म करते हुए अदालत ने संतुलित रुख अपनाया जहां ट्रांसफर पर रोक बरकरार रखी गई, वहीं सभी कर्मियों के लिए समान नियम लागू करने का निर्देश दिया गया।