चंडीगढ़ में मेट्रो चलाने के मुद्दे पर राजनीति गरमा गई है। रविवार को एक सावर्जनिक मंच से प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने कहा था कि चंडीगढ़ की लगभग 12 लाख की आबादी के लिए मेट्रो चलाना आर्थिक रूप से घाटे का सौदा हो सकता है। उनके अनुसार, इतने बड़े निवेश के लिए शहर में पर्याप्त सवारी नहीं मिलेगी। वहीं इससे क्या फायदा होगा इस पर सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि चंडीगढ़, मोहाली, पंचकूला और न्यू चंडीगढ़ के लिए प्रस्तावित मास रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम (एमआरटीएस) केवल एक यातायात परियोजना नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के आर्थिक भविष्य को नई दिशा देगा। इससे लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। 12 लाख की आबादी के लिए यह उचित नहीं प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने रविवार को प्रोग्राम में कहा कि शहर की ट्रांसपोर्ट व्यवस्था और प्रदूषण को लेकर अब कड़े और व्यवहारिक फैसले लेने होंगे। केवल 12 लाख की आबादी के लिए करोड़ों के खर्च वाली मेट्रो सफल नहीं होगी। मेट्रो की उपयोगिता तभी है, जब इसे आसपास के बड़े शहरों से जोड़ा जाए, अन्यथा इसका ब्याज निकालना भी मुश्किल होगा। 5 साल के लिए पूरे शहर को खोद दिया जाएगा और उससे क्या फायदा होगा? चंडीगढ़ में मेट्रो केवल अंडरग्राउंड ही बन सकती है, क्योंकि यहां ऊपर पुल बनाने की मंजूरी मिलना मुश्किल है। अंडरग्राउंड मेट्रो इतनी महंगी पड़ेगी कि उससे बेहतर है कि हम इलेक्ट्रिक बसें चलाएं, लोगों को मुफ्त सफर करवाएं। मैंने तो अपने अफसरों से यहां तक कहा है कि मेट्रो के बदले सोलर बसें फ्री में चला देते हैं। इस साल तक सारी बसे फ्री कर देंगे। यातायात की स्थिति बनी चुनौती सांसद ने कहा कि वर्ष 2026 में चंडीगढ़ और आसपास के इलाकों में यातायात की स्थिति चुनौती बनी हुई है। ऐसे में 2036 तक हालात और भी गंभीर हो सकते हैं, जहां आवागमन बेहद कठिन हो जाएगा। इस परिस्थिति में यह जरूरी है कि पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ प्रशासन मिलकर इस परियोजना को वित्तीय सहयोग दें। इसे जल्द से जल्द लागू करें। विशेषज्ञ एजेंसियां भी इस परियोजना को दो बार हरी झंडी दे चुकी है। उनका कहना है कि यदि समय रहते मेट्रो परियोजना को लागू किया जाता है तो ट्राई-सिटी क्षेत्र एक आधुनिक, जुड़ा हुआ और आर्थिक रूप से सशक्त महानगर बन सकता है।