हरियाणा कांग्रेस के नवनिर्वाचित राज्यसभा सांसद कर्मवीर बौद्ध ने आज राज्यसभा में अपनी ओथ प्रक्रिया पूरी कर ली। सभापति सीपी राधाकृष्णन ने उन्हें अपने पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस दौरान सदन में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडगे, सोनिया गांधी भी मौजूद रही। बौद्ध ने ओथ से पहले पार्टी के इन दोनों नेताओं का आशीर्वाद भी लिया। कर्मवीर बौद्ध के राज्यसभा चुनाव को लेकर हरियाणा कांग्रेस में अंदरूनी राजनीति और असंतोष की स्थिति भी सामने आई थी। टिकट के चयन को लेकर कई वरिष्ठ नेताओं और संभावित दावेदारों ने असहमति जताई थी। वहीं, आज ही हरियाणा के नवनिर्वाचित सांसद संजय भाटिया ने भी राज्यसभा के सदस्य के रूप में शपथ ली। भारत के उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा सभापति सीपी राधाकृष्णन ने उन्हें शपथ दिलाई। उन्होंने हिंदी में शपथ ली। यहां देखिए ओथ से जुड़े कुछ PHOTO… यहां पढ़िए बौद्ध को लेकर पार्टी की कंट्रोवर्सी… 1. टिकट चयन पर उठे सवाल राज्यसभा सीट के लिए कई दिग्गज नेताओं के नाम चर्चा में थे, लेकिन पार्टी नेतृत्व ने अंतिम समय में कर्मवीर बौद्ध के नाम पर मुहर लगाई। इस फैसले के बाद कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने संगठन के भीतर असंतोष जाहिर किया और पारदर्शिता पर सवाल उठाए। 2. वरिष्ठ नेताओं की दावेदारी छूटने से नाराजगी सूत्रों के अनुसार, कुछ वरिष्ठ नेताओं को उम्मीद थी कि उन्हें राज्यसभा भेजा जाएगा, लेकिन अंतिम निर्णय में उनका नाम शामिल नहीं होने से नाराजगी सामने आई। हालांकि पार्टी नेतृत्व ने इसे संगठन का सामूहिक निर्णय बताते हुए विवाद को शांत करने की कोशिश की। 3. सामाजिक और राजनीतिक समीकरण भी बने मुद्दा राज्यसभा चुनाव में सामाजिक प्रतिनिधित्व और राजनीतिक संतुलन को लेकर भी चर्चा रही। पार्टी ने दलित समाज से आने वाले नेता को राज्यसभा भेजकर सामाजिक संदेश देने की रणनीति अपनाई, जिसे संगठन के एक वर्ग ने सकारात्मक कदम बताया, जबकि कुछ नेताओं ने इसे राजनीतिक संतुलन का निर्णय बताया। क्या है राजनीतिक महत्व हरियाणा कांग्रेस में संगठनात्मक संतुलन साधने की कोशिश है। दलित प्रतिनिधित्व को मजबूत करने का संदेश दिया है। आगामी चुनावों से पहले पार्टी के भीतर शक्ति संतुलन का संकेत भी है। कुल मिलाकर, कर्मवीर बौद्ध का राज्यसभा पहुंचना जहां कांग्रेस के लिए सामाजिक और राजनीतिक संदेश देने वाला कदम माना जा रहा है, वहीं टिकट चयन और चुनाव प्रक्रिया को लेकर हुई अंदरूनी खींचतान ने इसे सियासी तौर पर चर्चा का विषय भी बना दिया था।