पुराना स्विमिंग पूल चलाया नहीं, 71 लाख से एक और पूल बनवाने का लगाया टेंडर

गर्मी का सीजन शुरू होते ही शहरवासियों को राहत देने के लिए नगर निगम के स्विमिंग पूल खुलने चाहिए थे, लेकिन इस बार हालात इसके उलट हैं। निगम न तो पहले से चल रहे पुराने स्विमिंग पूल को समय पर शुरू कर पाया है और न ही 5.84 करोड़ रुपए से बने नए ऑल वेदर पूल को जनता के लिए खोल सका है। नतीजतन, भीषण गर्मी में लोगों को सस्ते सरकारी पूल की सुविधा नहीं मिल पा रही है। रख बाग के पास स्थित पुराने स्विमिंग पूल को हर साल 1 अप्रैल से आम जनता के लिए खोल दिया जाता है, लेकिन इस बार निगम की ओएंडएम ब्रांच समय पर मेंटेनेंस का टेंडर ही जारी नहीं कर पाई। अप्रैल के मध्य में जाकर टेंडर लगाया गया है, जबकि इसे पहले ही पूरा कर लिया जाना चाहिए था। ऐसे में अब टेंडर ओपन होने, मेंटेनेंस कार्य, पानी भरने और अन्य तैयारियों में कम से कम एक महीने का समय लगेगा। यानी यह पूल मई के अंत या जून की शुरुआत से पहले शुरू होना मुश्किल है। अलग-अलग शिफ्ट में मिलती जगह स्पोटर्स विभाग को सुबह 5 से 6 बजे तक और शाम को 4 से 5 बजे तक का समय दिया जाता है। लड़कियों और महिलाओं को सुबह 8 से 9 बजे तक और शाम को 5.30 से 6.30 बजे तक का समय। आम पब्लिक के लिए सुबह 6.30 से 7.30 बजे तक और शाम को 6.30 से 7.30 बजे तक का समय। कपल के लिए रात 8 से 9 बजे तक। सीजन की सिर्फ 3 हजार रुपए फीस वार्ड नंबर-88 में बाबा घोरी दरगाह के सामने करीब 71 लाख रुपए की लागत से एक और स्वीमिंग पूल बनाने का टेंडर जारी किया गया है। यहां चेंजिंग रूम, पूल और अटेंडेंट रूम जैसी सुविधाएं विकसित की जानी हैं। सरकारी पूल की पूरे सीजन (1 अप्रैल से अक्टूबर) के लिए करीब 3 हजार रुपए शुल्क लिया जाता है, जबकि निजी पूल में यही सुविधा प्रति माह करीब 5 हजार रुपए में मिलती है। नगर निगम के ओएंडएम विभाग के एसई एकजोत सिंह ने बताया कि मेंटेनेंस के टेंडर लगा दिए हैं। 6 करोड़ से बना ऑल वेदर पूल ठप इस बार निगम ने पुराने पूल की मेंटीनेंस के लिए करीब 28 लाख रुपए का टेंडर लगाया है। फिलहाल पूल में पानी बदलना, क्लोरीनेशन, केमिकल डालना और स्टाफ की नियुक्ति जैसे जरूरी काम बाकी हैं। इन सब में देरी का सीधा असर आम लोगों पर पड़ रहा है। दूसरी ओर, स्मार्ट सिटी मिशन के तहत करीब 6 करोड़ रुपए की लागत से बना ऑल वेदर स्विमिंग पूल भी पिछले एक साल से तैयार खड़ा है, लेकिन इसे शुरू करने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। निगम इस पूल को निजी हाथों में देने के लिए अलग से टेंडर प्रक्रिया चला रहा है।

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