रोहतक में रिजर्व डाइस पर संचालकों ने की छेड़छाड़:सीएम रैली में माइक गड़बड़ी का मामला; पूर्व मंत्री हुड्डा ने खिंचवाया फोटो

रोहतक जिले के महम क्षेत्र में 5 अप्रैल को सीएम नायब सिंह सैनी की विकास रैली में माइक गड़बड़ी के मामले में नया मोड़ आया। रैली के दौरान मंच पर सीएम के लिए एक डाइस को रिजर्व रखा गया था, जिस पर मंच संचालकों ने कई बार जाकर बोलने का प्रयास किया। वहीं एक पूर्व मंत्री ने भी डाइस पर खड़े होकर फोटो तक खिंचवाया। सीएम की रैली के दौरान साउंड सिस्टम में तकनीकी खराबी आ गई थी, जिसके कारण पंडाल में पीछे बैठे लोगों तक आवाज नहीं पहुंच रही थी। इसी बात को आधार बनाते हुए DIPRO संजीव सैनी को सस्पेंड किया गया, जबकि मामले से संजीव का कोई लेना देना ही नहीं था। पूरा काम तकनीकी टीम का था। सिरसा से क्यों मंगवाया साउंड सिस्टम सीएम की रैली में साउंड सिस्टम को सिरसा से मंगवाने को लेकर भी सवाल उठ रहे है। रैली की जिम्मेदारी डीसी सचिन की थी, जो सिरसा के रहने वाले है। महम रैली के लिए साउंड सिस्टम 200 किलोमीटर दूर से क्यों मंगवाया गया, क्या रोहतक में साउंड सिस्टम नहीं था। सिरसा से जिस फर्म का साउंड सिस्टम मंगवाया गया, वह चंडीगढ़ के डीआईपीआरओ ऑफिस से रिटायर अधिकारी की बताई जा रही है। जिसकी डीसी के साथ भी अच्छी जान पहचान है। इसी का फायदा उठाते हुए सिरसा की फर्म को साउंड सिस्टम लगाने का ठेका दिया गया। संचालकों ने डाइस पर बोलने का किया प्रयास रैली के दौरान मंच पर भाजपा के दो कार्यकर्ता मंच का संचालन कर रहे थे। दोनों के बीच मंच संचालक को लेकर आपस में खींचतान देखने को मिली। इसी के दौरान सीएम के लिए रिजर्व डाइस पर मंच संचालकों ने जाकर कई बार बोलने का प्रयास किया, जिसके कारण माइक में तकनीकी खराबी आ गई। विभाग ने डीसी से नहीं मांगी थी कोई रिपोर्ट विभागीय सूत्रों ने अनुसार जनसंपर्क विभाग के राज्य स्तर के अधिकारियों ने डीसी सचिन गुप्ता से कोई रिपोर्ट नहीं मांगी थी, लेकिन डीसी ने 5 अप्रैल को स्वयं ही रिपोर्ट भेजते हुए जिम्मेदारी तय करने और कार्रवाई की सिफारिश कर दी। इस मामले में सिरसा की फर्म की तकनीकी खामी के बावजूद किसी निचले स्तर के अधिकारी को बलि का बकरा बनाने की कोशिश की गई। डीआाईपीओ के संस्पेंशन की आलोचना डीआईपीआरओ संजीव सैनी के निलंबन ने न केवल राज्य सरकार की आलोचना को जन्म दिया, बल्कि अन्य जिलों के डीआईपीआरओ में भी डर का माहौल पैदा कर दिया। उनका मानना है कि अगर तकनीकी खामियों के लिए भी इस तरह की कार्रवाई होगी, तो भविष्य में किसी भी अधिकारी को इस तरह की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।

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