लखनऊ विश्वविद्यालय में बवाल हो गया है। फ्रीजर, वाटर कूलर, एसी खराब होने का आरोप लगाते हुए छात्र वीसी ऑफिस पहुंच गए। वे जबरदस्ती चैनल खोलते हुए अंदर घुस गए। पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन के अधिकारियों से उनकी नोकझोंक हुई। दोपहर 12 बजे के आसपास ABVP से जुड़े छात्रों ने प्रोफेसर जय प्रकाश सैनी के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने वीसी को जनरल डायर भी कहा। इसके बाद करीब 2 बजे सपा छात्र सभा से जुड़े छात्रों ने भी प्रदर्शन कर दिया। वे भी पानी, एसी, फीस बढोत्तरी की समस्या को लेकर वीसी से मिलने पहुंचे थे, जहां उन्हें मिलने नहीं दिया गया। देखिए हंगामे की 5 तस्वीरें… गैलरी में ताला लगाने पर भड़के ABVP के छात्र सूचना मिलने पर स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और ABVP के छात्रों को समझाने का प्रयास किया। फिर भी छात्रों ने विरोध प्रदर्शन को जारी रखा। विश्वविद्यालय प्रशासन के अधिकारियों ने पहुंचकर छात्रों का समझाने का प्रयास भी किया, लेकिन छात्र अपनी मांग पर अड़े रहें। सबसे ज्यादा छात्र नाराज हुए वीसी ऑफिस की तरफ जाने वाले रास्ते में ताला लगाने से। नाराज छात्रों ने कहा कि क्या यहां जनरल डायर का राज चल रहा है जो छात्रों को विश्वविद्यालय के कुलपति से मिलने नहीं दिया जा रहा। है। ‘विश्वविद्यालय का पानी पीने लायक नहीं’ अर्पण कुशवाहा ने कहा कि प्रवेश परीक्षा, शुल्क और परिणाम इन बिंदुओं पर हमारा संगठन छात्रों की आवाज उठाता है। परीक्षा शुल्क बढ़ा दिया गया है इसलिए हम लोग आंदोलन करने पर मजबूर हैं। विश्वविद्यालय का हॉस्टल कैंटीन लाइब्रेरी सब कुछ बदहाल है। भीषण गर्मी में छात्रों को कैंटीन हो या लाइब्रेरी कहीं भी एसी की सुविधा नहीं मिल रही है। यहां का पानी बिल्कुल जहरीला हो चुका है जिसे पीकर छात्र बीमार हो रहे हैं। आज हम लोग किसी भी आश्वासन को सुनने वाले नहीं है। अंतिम सांस तक यहां डटे रहेंगे और छात्रों की लड़ाई लड़ेंगे। ‘छात्रों के साथ जनरल डायर जैसा रवैया’ प्रदर्शन कर रहे उत्कर्ष सिंह ने कहा कि नए कुलपति जब से आए हैं, विश्वविद्यालय को प्राइवेट मोड में ले आए हैं। ऐसा लगता है कि जनरल डायर की यूनिवर्सिटी है। जो मन में आ रहा है वह कर रहे हैं। सुविधा कैसे दी जाएं इस पर कोई ध्यान नहीं है। बच्चों से कैसे पैसा लिया जाए बस इसी पर पूरा फोकस है। यहां पढ़ने वाले छात्र बहुत पैसे वाले घर से नहीं आते हैं, आर्थिक रूप से कमजोर घरों से आते हैं। अगर बहुत अमीर होते तो किसी प्राइवेट यूनिवर्सिटी में जाते। मगर विश्वविद्यालय प्रशासन को इन सब चीजों से कोई मतलब नहीं है। 50% तक फीस में वृद्धि हो रही है जिसका हम लोग विरोध कर रहे हैं, और जब तक यह वापस नहीं हो जाएगा विरोध जारी रहेगा।