चंडीगढ़ पुलिस के ऑपरेशन सेल ने अवैध हथियार सप्लाई करने वाले बड़े नेटवर्क का खुलासा किया है। पुलिस ने कुल 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनके कब्जे से 14 पिस्तौल और 15 जिंदा कारतूस बरामद हुए हैं। जांच में सामने आया है कि यह गैंग उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश से हथियार मंगवाकर ट्राईसिटी में सक्रिय गैंगस्टरों, खासकर लकी पटियाल-बंबीहा गैंग के सहयोगियों तक पहुंचा रहा था। एसपी गीतांजलि खंडेलवाल ने बताया कि इन आरोपियों को इंस्पेक्टर हरिंदर सेखों और एडमिन इंस्पेक्टर जसपाल सिंह की अगुवाई में टीम ने गिरफ्तार किया है। ऐसे पकड़े गए मुख्य सप्लायर एसपी ने बताया कि ऑपरेशन सेल को 14 अप्रैल 2026 को गुप्त सूचना मिली थी कि मनीमाजरा के कुछ युवक बाहरी राज्यों से अवैध हथियार मंगवाकर शहर में सप्लाई कर रहे हैं। जिसके बाद पुलिस टीम ने मौली जागरां और हल्लो माजरा रोड के आसपास नाकाबंदी की थी। इसी दौरान दो संदिग्ध व्यक्ति जंगल की तरफ जाते दिखाई दिए, जिन्हें पुलिस ने रुकने का इशारा किया, लेकिन वे भागने लगे, जिस पर पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया। जिनकी पहचान राहुल उर्फ रैली और मोनू उर्फ कांडू के रूप में हुई। अपने दो साथियों के लिए रिमांड में नाम पुलिस पूछताछ के दौरान पहले गिरफ्तार किए गए आरोपी राहुल उर्फ रैली और मोनू उर्फ कांडू ने कई अहम खुलासे किए। दोनों ने बताया कि वे उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के अवैध हथियार सप्लायरों से सीधे संपर्क में थे और वहीं से पिस्तौल व अन्य हथियार मंगवाते थे। इसके बाद ये हथियार ट्राईसिटी में सक्रिय गैंगस्टरों और उनके सहयोगियों तक मांग के अनुसार पहुंचाए जाते थे। गैंग में कई अपराधी शामिल पूछताछ में दोनों आरोपियों ने अपने साथियों के बारे में भी जानकारी दी और बताया कि नेटवर्क में उनके कुछ स्थानीय साथी भी शामिल हैं, जो हथियार छिपाने, सप्लाई करने और आगे पहुंचाने में मदद करते थे। इसी खुलासे के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई आगे बढ़ाते हुए उनके सहयोगी गोविंद उर्फ गौरव को गिरफ्तार किया, जो बंबीहा गैंग से जुड़ा पाया गया। पकड़े गए अपराधियों का क्रिमिनल रिकॉर्ड राहुल उर्फ रैली: गिरफ्तारी 14 अप्रैल 2026 को हुई। आरोपी के कब्जे से 3 सेमी-ऑटोमैटिक पिस्तौल, 1 देसी कट्टा और 2 जिंदा कारतूस बरामद किए गए। उसके खिलाफ पहले भी कई मामले दर्ज हैं, जिनमें एफआईआर साल 2021 (IPC 147, 148, 323, 324), एफआईआर साल 2022 (मारपीट), एफआईआर साल 2024 (आर्म्स एक्ट), एफआईआर साल 2021 (मारपीट) और एफआईआर साल 2024 (मध्य प्रदेश, आर्म्स एक्ट) शामिल हैं, जिसमें 5 हथियार बरामद हुए थे। वर्तमान में एफआईआर साल 2026 दर्ज है। पुलिस के अनुसार, राहुल गैंग का मुख्य हथियार सप्लायर था, जो बाहरी राज्यों से हथियार लाकर गैंगस्टरों तक पहुंचाता था। मोनू उर्फ कांडू: इसके पास से 3 पिस्तौल, 1 देसी कट्टा और 3 जिंदा कारतूस बरामद किए गए। इसके खिलाफ एफआईआर साल 2021, एफआईआर 18/2022, एफआईआर साल 2024 (आर्म्स एक्ट), एफआईआर साल 2021, एफआईआर साल 2025 (पंचकूला, 4 पिस्तौल, 4 मैगजीन, 4 कारतूस बरामद) और एफआईआर साल 2026 दर्ज हैं। पुलिस जांच में सामने आया कि मोनू के यूपी और एमपी के हथियार सप्लायरों से सीधे संपर्क थे और उसी ने राहुल को इस नेटवर्क से जोड़ा। हाल में वह ड्रग तस्करी में भी सक्रिय था। गोविंद उर्फ गौरव: इसके कब्जे से 1 देसी पिस्तौल और 1 जिंदा कारतूस बरामद हुआ। इसके खिलाफ एफआईआर साल 2022 (लूट व आर्म्स एक्ट), एफआईआर साल 2024 (मारपीट) और एफआईआर साल 2026 दर्ज है। पुलिस के अनुसार, यह बंबीहा गैंग से जुड़ा हुआ है और इलाके में डर फैलाने तथा गैंग में पहचान बनाने के लिए हथियारों का इस्तेमाल करता था। मुकेश उर्फ गुल्लू: इसे सेक्टर-25 रैली ग्राउंड के पास मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया गया। इसके पास से 32 बोर पिस्तौल और 3 जिंदा कारतूस बरामद हुए। पुलिस को देखते ही आरोपी ने 3 राउंड फायरिंग की, जिसके जवाब में पुलिस ने 2 राउंड फायर किए। एक गोली इसके पैर में लगने के बाद इसे काबू किया गया। इसके खिलाफ एफआईआर साल 2021 (मारपीट, तोड़फोड़, गोहाना) और एफआईआर साल 2025 (आर्म्स एक्ट) दर्ज है। अमन उर्फ बटक: इसे पुलिस स्टेशन 39 के तहत 1 देसी कट्टा और 1 जिंदा कारतूस के साथ गिरफ्तार किया गया। संजू उर्फ कांचा: इसके पास से 1 देसी कट्टा और 1 जिंदा कारतूस बरामद हुए। इसके खिलाफ पहले भी BNS और अन्य धाराओं के तहत मामले दर्ज हैं। गुरदीप सिंह: इसके खिलाफ 3 मामले दर्ज हैं, जिनमें मारपीट, लूट और धमकी के केस शामिल हैं। मोनी (मोनू जायसवाल): इसके खिलाफ 2 गंभीर मामले दर्ज हैं, जिनमें हत्या और हत्या के प्रयास (IPC 302, 307) शामिल हैं।