बठिंडा रेत कारोबारी आत्महत्या केस:तीसरे दिन भी पोस्टमार्टम नहीं, परिजन बोले- पांचों आरोपियों के गिरफ्तारी नहीं होने तक अंतिम संस्कार नहीं

बठिंडा शहर में रेत-बजरी और सीमेंट कारोबारी की आत्महत्या के मामले में तीसरे दिन भी परिजनों का विरोध जारी है। परिवार ने स्पष्ट किया है कि जब तक सभी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो जाती, वे न तो पोस्टमार्टम करवाएंगे और न ही अंतिम संस्कार करेंगे। मृतक की पहचान नई बस्ती निवासी 33 वर्षीय संदीप कुमार उर्फ सोनू बंसल के रूप में हुई है, जो ‘डीएल एंड कंपनी’ के नाम से कारोबार करते थे। संदीप बंसल ने तीन दिन पहले जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली थी। मृतक ने 10 मिनट का वीडियो साझा किया था आत्महत्या से पहले उन्होंने लगभग 10 मिनट का एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया था और एक सुसाइड नोट भी छोड़ा था। इसमें उन्होंने कई लोगों पर मानसिक प्रताड़ना और धोखाधड़ी का आरोप लगाया था। इस मामले में पुलिस ने कोर्ट रीडर, उसके टाइपिस्ट पति और एक वकील के खिलाफ केस दर्ज किया है। आरोपी दंपति को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें दो दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। फरार चल रहे तीसरे आरोपी वकील की गिरफ्तारी के लिए पुलिस छापेमारी कर रही है। परिजन बोले- 5 लोग मौत के जिम्मेदार परिजनों का आरोप है कि मृतक ने अपनी मौत के लिए पांच लोगों को जिम्मेदार ठहराया था, लेकिन पुलिस ने केवल तीन को ही नामजद किया है। उनका कहना है कि जब तक बाकी आरोपियों, जिनमें एक डीएसपी और उसका रीडर भी शामिल है, के खिलाफ मामला दर्ज कर गिरफ्तारी नहीं होती, तब तक वे अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। मृतक के भाई मनीष कुमार ने आरोप लगाया कि पुलिस ने केस दर्ज करते समय उनके साथ धोखा किया। उन्होंने कहा कि सुसाइड नोट और वीडियो में डीएसपी अमृतपाल सिंह भाटी का नाम स्पष्ट रूप से लिया गया था, लेकिन पुलिस ने इसे एफआईआर में शामिल नहीं किया और उनसे जबरन हस्ताक्षर करवा लिए। संबंधित डीएसपी व उसके रीडर की भूमिका की जांच फिलहाल जारी है। पुलिस जांच में जुटी प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि सोनू बंसल ने शहर की एक पॉश कॉलोनी में निर्माणाधीन मकान के लिए आरोपी दंपति को सीमेंट और बजरी की सप्लाई की थी। भुगतान को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया। परिजनों के अनुसार, पूरा माल देने के बावजूद उस पर पैसे लौटाने का दबाव बनाया जा रहा था। सुसाइड वीडियो में मृतक ने बताया कि उसने बिना पक्की रसीद के सामान दिया, जो उसकी बड़ी गलती साबित हुई। उसने यह भी कहा कि करीब आठ लाख रुपए की एक एंट्री उसकी पत्नी के खाते में करवाई गई थी, जिसके बाद आरोपित पक्ष ने उसे उलझाना शुरू कर दिया। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है, जबकि परिजन इंसाफ की मांग को लेकर अपने रुख पर अड़े हुए हैं।

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