धर्मशाला नगर निगम चुनावों की घोषणा के साथ ही राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने धर्मशाला के 7 वार्डों के लिए पार्षदों के नामों को अंतिम रूप दे दिया है। कांग्रेस ने अपनी पहली सूची जारी कर यह स्पष्ट कर दिया है कि वह केवल जीतने वाले चेहरों पर ही दांव लगाएगी। नगर निगम चुनाव प्रभारी और एचपीटीडीसी के चेयरमैन आरएस बाली ने प्रत्याशियों के नामों की घोषणा की। उन्होंने बताया कि नीनू शर्मा, अनुराग, रजनी ब्यास, स्वर्णा देवी, बबीता शर्मा, शैलजा और बबीता ओबेरॉय को चुनावी मैदान में उतारा गया है। शेष वार्डों के लिए नामों पर विचार-विमर्श जारी बाली ने दावा किया कि शेष वार्डों के लिए नामों पर विचार-विमर्श जारी है। पार्टी केवल उन्हीं कार्यकर्ताओं को टिकट देगी जिनमें जीतने की क्षमता होगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि धर्मशाला नगर निगम पर इस बार भी कांग्रेस का ही कब्जा होगा और मेयर की कुर्सी पर कांग्रेस का पार्षद ही बैठेगा। कांग्रेस के लए प्रतिष्ठा का सवाल बने चुनाव राजनीतिक दृष्टिकोण से, धर्मशाला नगर निगम कांग्रेस के लिए केवल एक स्थानीय निकाय नहीं, बल्कि प्रतिष्ठा का केंद्र है। पिछले एक दशक से यहां की सत्ता कांग्रेस के पास रही है। भाजपा के प्रयासों के बावजूद, धर्मशाला की जनता ने पिछले दस वर्षों से कांग्रेस पर भरोसा जताया है। मुख्यमंत्री सुक्खू के लिए भी यह चुनाव उनकी लोकप्रियता की परीक्षा माना जा रहा है। धर्मशाला की राजनीति का सीधा असर प्रदेश की भावी राजनीति पर पड़ता है। मंथन के बीच बढ़ी भाजपा की धड़कनें कांग्रेस द्वारा 7 नामों की घोषणा के बाद अब गेंद भाजपा के पाले में है। जहां कांग्रेस जीत की हैट्रिक और वर्चस्व बनाए रखने का दावा कर रही है, वहीं शेष वार्डों के लिए चल रहा ‘मंथन’ यह संकेत दे रहा है कि पार्टी फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि कांग्रेस इस बार पुरानी एंटी-इंकंबेंसी को काटने के लिए नए और ऊर्जावान चेहरों को तरजीह दे रही है, ताकि पिछले दस वर्षों की सत्ता का रिकॉर्ड बरकरार रखा जा सके। अब देखना यह होगा कि सुक्खू की यह ‘सात’ की टीम कांग्रेस के इस गढ़ को सुरक्षित रखने में कितनी कामयाब होती है।