चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में अंतरराष्ट्रीय छात्रों की फीस हड़पने का एक बड़ा मामला सामने आया है। यूनिवर्सिटी के दो एडमिशन अधिकारियों पर 39 विदेशी छात्रों से 23 लाख रुपए से अधिक की ठगी करने का आरोप है। पुलिस ने इस संबंध में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यूनिवर्सिटी के अधिकृत प्रतिनिधि सचिन गिल ने एसएसपी मोहाली को शिकायत दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि दानिश महाजन (गुरदासपुर निवासी) और अक्षय वैसले (पठानकोट निवासी) नामक दो एडमिशन अधिकारियों ने छात्रों से यूनिवर्सिटी की फीस अपने निजी खातों में जमा करवाई। इसके बाद उन्होंने छात्रों को फर्जी कंसल्टेंसी रसीदें देकर रकम हड़प ली। धोखाधड़ी से संस्थान को नुकसान यूनिवर्सिटी ने कहा कि यह संस्थान पंजाब राज्य विधानमंडल द्वारा स्थापित और यूजीसी से मान्यता प्राप्त है। इस तरह की धोखाधड़ी से संस्थान की साख को नुकसान पहुंचा है। इस मामले का खुलासा 3 फरवरी 2026 को हुआ, जब नेपाल निवासी छात्र हरी ओम साह अपनी फीस संबंधी समस्या लेकर इंटरनेशनल एडमिशन ऑफिस पहुंचा। आरोपी अधिकारी के मौजूद न होने पर हरी ओम साह स्टूडेंट हेल्प सेंटर गया। उसने काउंसलर को बताया कि उसने दूसरे सेमेस्टर की पूरी फीस जमा कर दी है, लेकिन उसके CUIMS अकाउंट में फीस अभी भी “अनपेड” दिख रही है। छात्र ने बताया कि उसे दोनों आरोपियों के निजी खातों में ऑनलाइन ट्रांसफर करने को कहा गया था। जांच करने पर फर्जी रसीदें मिली छात्र ने 2.10 लाख रुपए कॉलेज और हॉस्टल फीस के रूप में निजी खातों में जमा कराने के स्क्रीनशॉट भी दिए। यूनिवर्सिटी अधिकारियों ने जांच की तो कंसल्टेंसी रसीदें फर्जी पाई गईं। यूनिवर्सिटी को इसी तरह की कुल 39 शिकायतें मिलीं, जिनमें सभी अंतरराष्ट्रीय छात्र शामिल थे। आरोप है कि दोनों आरोपी छात्रों को तीसरे पक्ष के एजेंटों के पास भेजकर कमीशन लेते और फीस की रकम का गबन करते थे। कुल 23,70,523 रुपए की ठगी सामने आने के बाद डीएसपी खरड़-1 कार्यालय ने अपनी रिपोर्ट में दोनों को प्रथम दृष्टया दोषी माना। एसएसपी के आदेश पर ने थाना सदर खरड़ में दोनों आरोपियों के विरुद्ध धारा 316(2) और 318(4) के तहत एफआईआर दर्ज कर ली हैं। पुलिस अब आरोपियों की भूमिका, बैंक खातों और रकम की रिकवरी को लेकर कार्रवाई कर रही है।