सीमांचल को जोड़ने वाले भागलपुर के विक्रमशिला सेतु का एक हिस्सा देर रात गंगा में गिर गया। पिलर संख्या 4 और 5 के बीच के एक्सपेंशन जॉइंट में शाम से ही दरार आनी शुरू हो गई थी। इसके बाद पुल पर आवागमन रोक दिया गया। रात तक स्थिति भयावह हो गई और दोनों पिलर्स के बीच का स्लैब देर रात करीब 1:10 बजे टूटकर गंगा में समा गया। राहत की बात रही कि इस हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ है। सूचना मिलते ही SSP प्रमोद कुमार यादव, सदर SDM विकास कुमार, सिटी DSP अजय कुमार चौधरी और ट्रैफिक DSP संजय कुमार मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने तत्काल ट्रैफिक को डायवर्ट कराया और पुल पर मौजूद लोगों को सुरक्षित हटाया। फिलहाल भागलपुर को सीमांचल से जोड़ने वाला विक्रमशिला सेतु पूरी तरह बाधित है। अब सिलसिलेवार तरीके से जानिए पूरा घटनाक्रम… पहले गैप बढ़ा फिर पुल धंसा बताया जा रहा है कि देर शाम पहले 10 इंच का जॉइंट सस्पेंशन धंसा। इसके बाद देर रात करीब एक बजे पुल का एक स्लैब गंगा नदी में समा गया। हादसा उस समय हुआ, जब विक्रमशिला सेतु पर वाहनों की लंबी कतार लगी थी। हालांकि पुलिस की सतर्कता से एक बड़ा हादसा टल गया। मौके पर पुल निगम से जुड़े अधिकारी भी पहुंच गए हैं और मामले की जांच में जुटे हैं। DM डॉ. नवल किशोर चौधरी ने बताया, रविवार की रात 12.35 बजे से स्लैब धंसना शुरू हो गया। उससे पहले ही गाड़ियों को वहां से हटा दिया गया था। इस सतर्कता के कारण कोई दुर्घटना नहीं हुई। पुल की मरम्मत के लिए जल्द ही हाई लेवल कमेटी यहां आएगी। इससे पहले आई कमेटी ने पुल की जांच की थी। उसे पुल की स्थिति के बारे में जिला प्रशासन ने पूरी जानकारी दी थी। ट्रैफिक DSP संजय कुमार ने कहा, जैसे ही स्ट्रीट लाइट पोल संख्या 133 के पास एक्सपेंशन जॉइंट के गैप की बढ़ने की सूचना मिली, दोनों ओर से गाड़ियों के आवागमन पर रोक लगा दी गई थी। पुल के दोनों ओर बैरिकेडिंग की गई सिटी DSP-1 अजय चौधरी ने बताया, पुल के अप्रौच पथ के पास बैरिकेडिंग कर दी गई है। गाड़ियों को मुंगेर पुल की ओर मोड़ दिया गया है। नवगछिया और भागलपुर दोनों ओर पुलिस बल की तैनाती की गई है ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना को रोका जा सके। NH के SDO सुधीर कुमार ने कहा कि 34 मीटर स्लैब नदी में गिर गया है। नया स्लैब बनाकर चढ़ाने में कम से कम 15 दिन लगेंगे। सीमांचल समेत 16 जिलों को भागलपुर से जोड़ता है ये पुल विक्रमशिला सेतु पर प्रतिदिन लाखों लोगों का आवागमन होता है। करीब 50 हजार से अधिक छोटे-बड़े वाहन इस पुल से गुजरते हैं। सीमांचल समेत 16 जिलों को यह सेतु भागलपुर से जोड़ता है। इसका निर्माण तत्कालीन मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के कार्यकाल में कराया गया था। पुल में लगातार जॉइंट और एक्सपेंशन गैप की समस्या को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। आखिरी बार वर्ष 2020 में पुल की मरम्मत कराई गई थी। कुछ दिन पहले ही वॉल वायरिंग क्षतिग्रस्त होने की खबरें सामने आई थीं। हालांकि प्रशासन ने उस समय इसे खारिज करते हुए कहा था कि पुल पर किसी प्रकार का कोई खतरा नहीं है। 2001 में हुआ था उद्घाटन, 4.7 किमी लंबा है पुल