विक्रमशिला पुल का एक हिस्सा गिरा- ₹300 नाव का किराया:छात्रा बोली- तिगुना लोग सवार हो रहे, लाइफ जैकेट गायब; मध्यप्रदेश डैम जैसे हादसे का डर

‘40 मिनट में नवगछिया की ओर से भागलपुर की ओर नाव से सफर करके उतरी हूं। रोजाना पढ़ाई के लिए आना-जाना करती हूं। सुबह पुल टूटने की जानकारी हुई। फिर नवगछिया की ओर से गंगा घाट के किनारे पहुंची, काफी देर के बाद नाव मिली, 100 रुपए किराया दिया, तब जाकर आधे घंटे से अधिक समय में भागलपुर पहुंची।’ पूजा कुमारी, छात्रा, नवगछिया ‘भागलपुर मुख्यालय की ओर आने के लिए 2 घंटे के इंतजार के बाद नाव मिली। जब तक पुल नहीं बन जाता, नाव से ही आना-जाना करना पड़ेगा। नाव से सफर करने में डर भी लग रहा था, क्योंकि नाव पर किसी के पास लाइफ जैकेट नहीं था। हाल ही में मध्यप्रदेश के जबलपुर डैम जैसे हादसे की आशंका है, लेकिन पढ़ाई जरूरी है, इस कारण नाव से सफर मजबूरी है।’ छात्रा, एमकॉम, मारवाड़ी कॉलेज, भागलपुर नवगछिया की रहने वाली दो छात्राओं ने ये एक्सपीरिएंस दैनिक भास्कर से शेयर किए हैं। दरअसल, भागलपुर में 4.7 किमी लंबे विक्रमशिला सेतु का 34 मीटर हिस्सा रविवार देर रात गंगा में गिर गया। सीमांचल समेत करीब 16 जिलों की कनेक्टिविटी प्रभावित हुई है और रोजाना करीब 1 लाख लोगों के आवागमन पर असर पड़ा है। नवगछिया समेत कोसी, सीमांचल के लोगों को किन रास्तों से और कैसे आना-जाना पड़ रहा है? छात्र-छात्राओं, सब्जी-दूध कारोबारियों, बाइक सवारों, आम लोगों को किन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है? पढ़िए पूरी रिपोर्ट। सबसे पहले विक्रमशिला पुल की 3 तस्वीरें देखिए अब सिलसिलेवार तरीके से जानिए, लोग कैसे कर रहे आना-जाना केला कारोबारी मनोहर यादव ने बताया कि हम लोगों की परेशानी बढ़ गई है। जहाज वाले 300 रुपए मांग रहे हैं, अब हम लोगों को भी केला महंगा बेचना पड़ेगा। पहले भी जब पुल नहीं था, नाव से आते जाते थे, तब मात्र 5 रुपए किराया लगता था, लेकिन वो 20 साल पुरानी बात है। केला कारोबारी राजा मंडल ने बताया कि पुल जल्द बन जाए तो हम लोगों की परेशानी खत्म हो जाएगी। जब तक पुल नहीं बनता है, हम लोगों का कारोबार प्रभावित हो जाएगा। घर चलाना भी मुश्किल होगा। भागलपुर मुख्यालय की रहने वाली एक दुल्हन अपने मायके से नवगछिया की ओर अपने पति के साथ जा रही थी। दुल्हन ने बताया कि 26 अप्रैल को उनकी शादी हुई थी। शादी के बाद वे पति के साथ ससुराल चली गई थी, लेकिन कुछ रस्मों को निभाने के लिए दो दिन पहले मायके आई थी। रस्मों को निभाए जाने के बाद आज सुबह कार से ससुराल जाना था, लेकिन सुबह पता चला कि विक्रमशिला पुल गिर गया है। इसके बाद पति के साथ नाव से ससुराल जाना पड़ रहा है। एक नाव पर 25 की जगह 75 लोग सवार, 30 बाइक भी लोड बाइक सवारों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। बाइक सवार अपनी बाइक को नाव पर लादकर भागलपुर मुख्यालय से नवगछिया की ओर, जबकि नवगछिया से भागलपुर मुख्यालय की ओर आ रहे हैं। एक ही नाव पर लोगों के साथ बाइक को भी लोड किया जा रहा है। ऐसे में एक नाव पर 25 लोगों की जगह 75 लोग और उनके साथ करीब 30 मोटरसाइकिल को सवार किया जा रहा है। एक आदमी से किराया 300 रुपए, जबकि बाइक के लिए 300 रुपए वसूला जा रहा है। आम दिनों में ये किराया 50 रुपए, बाइक समेत 150 रुपए किराया है। ’20 साल पहले नाव से आना-जाना करते थे, अब फिर से वैसी ही स्थिति’ बाइक सवार पवन कुमार ने बताया कि सुबह से दोपहर हो गई, लेकिन नाव खाली नहीं मिला, मैं बरारी घाट पर ही फंसा हुआ हूं। डीएम को तत्काल एक से ज्यादा व्यवस्था करनी चाहिए। 20 साल पहले यही स्थिति थी। 20 साल तक पुल से आना-जाना करता था, लेकिन स्थिति अब पहले जैसी हो गई है। भागलपुर से नवगछिया की ओर जाने वाले बमबम साव ने कहा कि नाव वाले 200 से 300 रुपए किराया मांग रहे हैं। मजबूरी है, जाना तो पड़ेगा। नाव से बच्चे को गोद में लेकर बरारी घाट पहुंचे शख्स ने कहा कि पहले 10 रुपए किराया था, अब 100 रुपए किराया ले रहे हैं। शादी में शामिल होने जाना था, सुबह ही घर से निकले थे। पुल तो टूट गया था, लेकिन रिश्तेदारी भी निभानी है। नाव पर क्षमता से अधिक सवारी, प्रशासन कार्रवाई करे नाव से सफर कर रहे प्रकाश ने बताया कि घाट किनारे नाव से उतरकर पैदल ही 5 किलोमीटर तक जाना पड़ेगा। समय से मेंटेंनेंस नहीं होने के कारण पुल गिरा है। लापरवाही के चलते ही हादसा हुआ है। इसके लिए जो भी दोषी है, उस पर कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, सूरज ने बताया कि 13 मई से बहन का एग्जाम है। एडमिट कार्ड लाने के नवगछिया जाना है। पुल गिरने से परेशानी बढ़ गई है। नाव में भी क्षमता से अधिक लोगों को बिठाया जा रहा है। प्रशासन को इस पर कार्रवाई करना चाहिए। मेंटेंनेंस नहीं होने के कारण ही पुल गिरा है। पुल के दोनों ओर बैरिकेडिंग की गई सिटी DSP-1 अजय चौधरी ने बताया, पुल के पास बैरिकेडिंग कर दी गई है। गाड़ियों को मुंगेर पुल की ओर मोड़ दिया गया है। नवगछिया और भागलपुर दोनों ओर पुलिस तैनात की गई है, ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना को रोका जा सके। नेशनल हाईवे के SDO सुधीर कुमार ने कहा कि नया स्लैब बनाकर चढ़ाने में कम से कम 15 दिन लगेंगे। भागलपुर मुख्यालय की ओर से विक्रमशिला पुल पर पुलिसकर्मियों की शिफ्ट वाइज ड्यूटी लगाई गई है, जो लगातार माइकिंग कर लोगों को पुल के पहले से लौटा रहे हैं। उन्हें मुंगेर के रास्ते जाने की सलाह दे रहे हैं। जिलाधिकारी बोले- गंगा नदी में नाव, बड़े क्रूज के संचालन का निर्णय जिलाधिकारी नवल किशोर चौधरी ने कहा कि वैकल्पिक व्यवस्था के तहत गंगा नदी में नाव और बड़े क्रूज के संचालन का निर्णय लिया गया है। नावों का परिचालन सुबह 5:30 बजे से शाम 6:00 बजे तक किया जाएगा, ताकि यात्रियों को सुरक्षित तरीके से आवागमन की सुविधा मिल सके। उन्होंने आम लोगों से अपील की कि नावों की निर्धारित क्षमता का पालन करें और किसी भी स्थिति में क्षमता से अधिक सवारी नही बैठाए, क्योंकि इससे दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है। घाटों पर सुरक्षा के लिए पुलिस बल और मजिस्ट्रेट की तैनाती की गई है। भागलपुर के पूर्व विधायक बोले- 10 महीने पहले विधानसभा में सवाल उठाया था भागलपुर से कांग्रेस के पूर्व विधायक अजित शर्मा ने कहा कि जब मैं विधायक था, तब विधानसभा में 10 महीने पहले पुल की सुरक्षा को लेकर आवाज उठाई थी। मैंने सत्ता पक्ष के मंत्री से जवाब मांगा था कि विक्रमशिला सेतु के एक्सपेंशन जॉइंट का गैप बढ़ रहा है। कभी भी हादसा हो सकता है। इस पर सरकार क्या कर रही है। अजित शर्मा ने बताया कि मेरे सवाल पर तत्कालीन मंत्री ने जवाब दिया कि विक्रमशिला पुल की स्थिति सही है और अभी गाड़ियों का आना-जाना ठीक ढंग से हो रहा है। पूर्व विधायक ने कहा कि मुझे ये जवाब 10 महीने पहले मिला था और आज स्थिति आपके सामने है। उस वक्त मेरे सवालों को गंभीरता से लेकर काम किया गया होता, तो आज ये स्थिति नहीं होती। नवगछिया समेत कोसी, सीमांचल के कई इलाकों को भागलपुर मुख्यालय से संपर्क पूरी तरह टूट गया है। पूर्व विधायक अजित शर्मा ने कहा कि मैं बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से आग्रह करता हूं कि पुल को जितना जल्दी हो सके, दुरुस्त किया जाए, जिससे आना-जाना आसान हो सके। साथ ही इस मामले में लापरवाही बरतने वाले अफसरों के खिलाफ जांच कर कड़ी कार्रवाई की जाए। 8-10 साल में बनकर तैयार हुआ था पुल विक्रमशिला पुल 8 से 10 साल में बनकर तैयार हुआ था। पुल का निर्माण साल 1990 के दशक में शुरू हुआ और साल 2001 में ये बनकर तैयार हुआ। उस समय इस परियोजना पर लगभग 800 से 900 करोड़ की लागत आई थी। यूपी ब्रिज कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने इस पुल का निर्माण किया था। करीब 4.4 से 5 किलोमीटर लंबा ये दो लेन पुल गंगा के दक्षिणी तट पर स्थित भागलपुर के बरारी क्षेत्र को उत्तरी तट के नवगछिया से जोड़ता है। ये राष्ट्रीय राजमार्ग-33 और राष्ट्रीय राजमार्ग-31 को भी आपस में लिंक करता है, जिससे पूर्णिया, कटिहार और सीमांचल क्षेत्र तक सड़क संपर्क मजबूत होता है। जानकारों की मानें तो ओवरलोडिंग, भारी यातायात और समय पर रखरखाव की कमी ने इस पुल को कमजोर कर दिया। पुल के निर्माण के बाद से अब तक कई बार इसकी मरम्मत की जा चुकी है। शुरुआती वर्षों में सामान्य रखरखाव किया गया, जिसकी वजह से साल 2015-16 में बड़े पैमाने पर जॉइंट और डेक की मरम्मत करनी पड़ी। इसके बाद 2018 में तकनीकी जांच के दौरान कई गंभीर खामियां सामने आईं। इसके बाद भी 2020 से 2023 के बीच लगातार छोटे-छोटे रिपेयर होते रहे। पुल की स्थिति को लेकर IIT दिल्ली की ओर से साल 2018 में की गई जांच में कई महत्वपूर्ण खामियां उजागर हुई थीं। रिपोर्ट में बताया गया कि कुछ पिलरों में संरचनात्मक कमजोरी आ रही है। जॉइंट और स्लैब में दरारें हैं और ओवरलोडिंग से स्थिति और बिगड़ रही है। तत्काल सुदृढ़ीकरण और लोड कंट्रोल की सिफारिश की थी। 1970-80 को दशक में पुल निर्माण की उठी थी मांग विक्रमशिला सेतु की जरूरत 1970 और 1980 के दशक से महसूस की जा रही थी। उस समय गंगा पार करने के लिए नाव और स्टीमर ही एकमात्र साधन थे, जिससे आवागमन कठिन और जोखिम भरा था। पुल बनने के बाद भागलपुर से नवगछिया, कटिहार और पूर्णिया तक सड़क संपर्क आसान हो गया। इस पुल से व्यापारियों को सामान की ढुलाई में सहुलियत मिली। साथ ही दियारा इलाके के मजदूरों को इलाज के लिए मायागंज लाना आसान हो गया। साथ ही शिक्षा के लिए छात्र ज्यादा मात्रा में मुख्यालय के शिक्षण संस्थानों में आने लगे।

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