शिमला SSP 3 महीने से बिना सरकारी आवास:राजधानी में ‘ईयरमार्क्ड’ अकोमोडेशन, फिर भी गौरव सिंह बेघर, अभी DIG संजीव गांधी रह रहे

हिमाचल की राजधानी शिमला में SP के लिए ‘ईयरमार्क्ड’ आवास के बावजूद सरकारी अकोमोडेशन नहीं मिल पाई। SSP शिमला गौरव सिंह तीन महीने से बिना सरकारी आवास के हैं। इससे वह ‘खानाबदोश’ जैसी प्रशासनिक स्थिति में काम कर रहे हैं। जिला पुलिस मुखिया को सरकारी आवास नहीं मिलना अब चर्चा का कारण बन गया है। यह केवल हाउसिंग का मुद्दा नहीं रह गया, बल्कि यह प्रशासनिक कार्यप्रणाली और सरकारी सिस्टम की गंभीर खामी को भी उजागर करता है। राज्य सरकार ने गौरव सिंह को 9 फरवरी 2026 को शिमला का एसएसपी नियुक्त किया। उससे पहले वे सोलन में एसपी के पद पर तैनात थे। शिमला में तैनाती के बाद वह कुछ समय तक सोलन से शिमला आ-जा रहे थे। मगर उन्होंने लगभग दो महीने पहले सोलन में सरकारी अकोमोडेशन छोड़ दी है और शिमला में अकोमोडेशन का इंतजार में हैं। शिमला में SP के लिए खास सरकारी आवास आखिर एसपी का सरकारी आवास इतना महत्वपूर्ण क्यों? एसपी का सरकारी आवास सिर्फ रहने की जगह नहीं होता, बल्कि यह जिला पुलिस प्रमुख के लिए एक ‘ऑपरेशनल सेंटर’ की तरह काम करता है। खासकर राजधानी शिमला जैसे संवेदनशील जिले में, जहां वीवीआईपी मूवमेंट, राजनीतिक कार्यक्रम, पर्यटन दबाव, धरने-प्रदर्शन और कानून व्यवस्था से जुड़े लगातार मुद्दे बने रहते हैं। SP शिमला के आवास DIG रह रहे? SP के सरकारी आवास में अभी पूर्व SSP शिमला एवं DIG संजीव गांधी रहे रहे हैं। जब संजीव गांधी से बात की गई तो उन्होंंने बताया कि उन्हें अभी तक नई अकोमोडेशन अलॉट नहीं हुई। नई अकोमोडेशन मिलते ही वह शिमला एसएसपी वाला सरकारी आवास खाली कर देंगे। अधिकारी की ट्रांसफर के 30 दिन के भीतर करना होता है खाली शिमला एसपी के लिए राजधानी में सरकारी आवास निर्धारित है। नियमों के मुताबिक- एसपी की अकोमोडेशन ईयरमार्क्ड होती है। यानी वह आवास उस पद से जुड़ा होता है, न कि व्यक्ति विशेष से, किसी अधिकारी के तबादले के बाद सामान्य तौर पर लगभग 30 दिनों के भीतर आवास खाली करना होता है। हालांकि, विशेष परिस्थितियों में सरकार कुछ अतिरिक्त समय दे सकती है। सवाल एक आईपीएस अधिकारी को आवास का नहीं मिलने का नहीं, बल्कि बिना स्थायी सरकारी आवास के कोई एसएसपी कैसे प्रभावी ढंग से राजधानी का लॉ एंड ऑर्डर संभालेगा, इसे लेकर भी चर्चा हो रही है? GAD और सरकार पर सवाल राज्य में सरकारी आवासों का आवंटन सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) करता है। इस मामले में विभाग और सरकार का पक्ष जानने के लिए GAD सचिव आशीष सिंघमार से कई बार फोन और SMS के जरिए संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इस कारण सरकारी पक्ष सामने नहीं आ पाया। SP के सरकारी आवास की अहमियत क्यों? पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की 24×7 पहुंच बनी रहती है। आपात स्थिति में तुरंत मीटिंग व समन्वय संभव होता है। सुरक्षा व्यवस्था और संवेदनशील दस्तावेजों के संचालन में सुविधा रहती है। कंट्रोल रूम, फील्ड अधिकारियों और जिला प्रशासन के साथ त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र बना रहता है, वीआईपी सुरक्षा और आकस्मिक घटनाओं में तत्काल निर्णय लेना आसान होता है। इन सब वजह से एसपी का कोई स्थायी सरकारी ठिकाना न होना केवल व्यक्तिगत असुविधा नहीं, बल्कि प्रशासनिक दक्षता पर सीधा असर डालने वाली स्थिति मानी जाती है। हिमाचल हाईकोर्ट भी सरकारी आवास आवंटन को लेकर नाराजगी जता चुका सरकारी आवास आवंटन को लेकर हिमाचल हाईकोर्ट भी नाराजगी जाहिर कर चुका है। हाईकोर्ट के जस्टिस को भी आवास नहीं मिल रहे और जिन CPS की नियुक्तियां हिमाचल हाईकोर्ट लगभग डेढ़ साल पहले रद्द कर चुका है, उनसे अभी भी सरकारी आवास वापस नहीं लिए गए।

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