चंडीगढ़ रेहड़ी-फड़ी विवाद पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई:GRDRC और टाउन वेंडिंग कमेटी के चेयरपर्सन समेत तीन अफसर होंगे पेश,मेयर से पूछे सवाल

चंडीगढ़ में रेहड़ी-फड़ी और अवैध वेंडरों के मुद्दे पर आज सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में सख्त रुख अपनाते हुए चंडीगढ़ प्रशासन और शिकायत निवारण एवं विवाद समाधान समिति (GRDRC) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। अदालत ने पिछली सुनवाई के दौरान कहा था कि सभी पक्षों की शिकायतों के समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों की मौजूदगी जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस संजय करोल और जस्टिस नोंगमैकापम कोटिश्वर सिंह की बेंच ने अगली सुनवाई पर तीन अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश दिए थे। इनमें टाउन वेंडिंग कमेटी चंडीगढ़ के चेयरपर्सन एवं नगर निगम कमिश्नर, GRDRC चंडीगढ़ के चेयरपर्सन और लोकल गवर्नमेंट एवं होम विभाग, चंडीगढ़ के सचिव शामिल हैं। मेयर से कोर्ट ने पूछे थे तीखे सवाल बीते मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान पहली बार चंडीगढ़ के मेयर सौरभ जोशी को सुप्रीम कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होना पड़ा था। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मेयर से सीधे सवाल पूछते हुए वेंडिंग व्यवस्था और लंबित अपीलों को लेकर कड़ी नाराजगी जाहिर की। अदालत ने पूछा कि वेंडिंग से जुड़ी कितनी अपीलें अभी तक लंबित हैं और उनका निपटारा अब तक क्यों नहीं किया गया। कोर्ट ने कहा कि जब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट तय समय सीमा में मामलों का निपटारा कर सकता है तो अपीलीय प्राधिकरण होने के बावजूद नगर निगम स्तर पर कार्रवाई लंबित क्यों है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने चंडीगढ़ की बिगड़ती व्यवस्था पर भी तीखी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि चंडीगढ़ को कभी “सिटी ब्यूटीफुल” और देश की सबसे योजनाबद्ध सिटी माना जाता था, लेकिन अब शहर की हालत स्लम जैसी दिखाई देने लगी है। कोर्ट ने कहा कि पहले चंडीगढ़ अपनी साफ-सफाई, अनुशासन और व्यवस्थित ट्रैफिक के लिए जाना जाता था, लेकिन अब सड़कों, फुटपाथों और बाजारों में अव्यवस्था और अतिक्रमण बढ़ता जा रहा है। कोर्ट ने यह भी पूछा कि जब शहर में पहले से वेंडिंग जोन निर्धारित हैं तो अवैध रूप से बैठे वेंडरों को वहां शिफ्ट क्यों नहीं किया जा रहा। अदालत ने कहा कि सिर्फ चालान काटना समाधान नहीं है, बल्कि प्रशासन को स्थायी व्यवस्था बनानी होगी ताकि शहर की पुरानी पहचान और खूबसूरती वापस लाई जा सके। सुनवाई के दौरान मेयर सौरभ जोशी ने अदालत से लंबित मामलों के निपटारे के लिए एक महीने का समय मांगा। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि इतने लंबे समय तक मामलों को लंबित नहीं रखा जा सकता। हालांकि मेयर की ओर से अदालत को बताया गया कि 150 से ज्यादा अपीलें लंबित हैं और सभी पक्षों को नोटिस जारी कर सुनवाई करना जरूरी है, जिसके कारण समय लग रहा है। इस दौरान अदालत ने मेयर को यह भी कहा कि वह घबराएं नहीं और अपनी बात खुलकर रखें। कोर्ट ने कहा कि सभी पक्षों का उद्देश्य चंडीगढ़ की व्यवस्था को बेहतर बनाना और शहर की पुरानी ग्लोरी वापस लाना है। सुनवाई के दौरान मेयर ने अदालत को एसेंशियल सर्विस प्रोवाइडर (ESP) और नॉन-ESP वेंडरों के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। एमिकस क्यूरी की रिपोर्ट पर मांगा जवाब सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मामले में नियुक्त एमिकस क्यूरी यानी अदालत की सहायता कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अनंत विजय पल्ली की रिपोर्ट और सुझावों पर भी विस्तार से चर्चा की। अदालत ने माना कि चंडीगढ़ में रेहड़ी-फड़ी और अवैध वेंडिंग को लेकर लंबे समय से कई समस्याएं बनी हुई हैं, जिनके समाधान के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है। एमिकस क्यूरी ने अपनी रिपोर्ट में वेंडिंग जोन, अवैध कब्जों, लंबित अपीलों और प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़े कई सुझाव दिए थे। इन सुझावों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन और शिकायत निवारण एवं विवाद समाधान समिति (GRDRC) के अपीलीय फोरम को निर्देश दिए कि वे 30 अप्रैल 2026 को दी गई रिपोर्ट पर अपना जवाब हलफनामे के रूप में अदालत में दाखिल करें। कोर्ट ने साफ कहा कि प्रशासन सिर्फ कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहे, बल्कि यह भी बताए कि अवैध वेंडरों की समस्या को खत्म करने और तय वेंडिंग जोन में रेहड़ी-फड़ी वालों को शिफ्ट करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। अदालत ने अधिकारियों से यह भी पूछा कि जिन लोगों की अपीलें लंबित हैं, उनका निपटारा कब तक किया जाएगा और शहर में फुटपाथों तथा सार्वजनिक जगहों पर बढ़ते अतिक्रमण को रोकने के लिए क्या योजना बनाई गई है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी संकेत दिए कि अगली सुनवाई में अधिकारियों से सीधे जवाब मांगे जाएंगे, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि प्रशासन इस समस्या के समाधान को लेकर कितना गंभीर है। अवैध वेंडरों को लेकर दाखिल हुई है याचिका यह मामला मलकीत सिंह और अन्य लोगों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई सिविल अपील से जुड़ा हुआ है। मलकीत सिंह मनीमाजरा में वैष्णो ढाबा चलाते हैं और वहां के व्यापार मंडल के प्रधान भी हैं। उन्होंने अदालत में दायर याचिका में कहा है कि शहर में बड़ी संख्या में अवैध रेहड़ी-फड़ी और फुटपाथों पर कब्जों के कारण आम लोगों को रोजाना दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। याचिका में बताया गया है कि कई बाजारों, स्कूलों, अस्पतालों और मुख्य सड़कों के बाहर रेहड़ी-फड़ी लगाने वालों ने फुटपाथों और सार्वजनिक जगहों पर कब्जा कर रखा है। इसके कारण पैदल चलने वाले लोगों को सड़क पर उतरकर चलना पड़ता है, जिससे हादसों का खतरा बना रहता है। खासकर स्कूलों की छुट्टी के समय बच्चों और अभिभावकों को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है। याचिकाकर्ताओं ने अदालत को यह भी बताया कि चंडीगढ़ प्रशासन पहले ही शहर में कई वेंडिंग जोन तय कर चुका है, जहां रेहड़ी-फड़ी वालों को बैठाने की व्यवस्था की गई है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में वेंडर तय जगहों पर जाने की बजाय सड़कों, बाजारों और रिहायशी इलाकों में अवैध तरीके से बैठ रहे हैं। ऐसे में सवाल उठाया गया है कि जब वेंडिंग जोन मौजूद हैं तो प्रशासन अवैध वेंडरों को वहां शिफ्ट क्यों नहीं कर रहा। याचिका में यह भी कहा गया है कि नगर निगम और प्रशासन की ओर से केवल चालान काटने की कार्रवाई की जा रही है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकाला जा रहा। इसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई है कि प्रशासन को सख्त निर्देश दिए जाएं ताकि शहर में व्यवस्था सुधरे और लोगों को फुटपाथ व सार्वजनिक स्थान दोबारा मिल सकें।

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