धर्मशाला नगर निगम चुनाव प्रचार ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। हिमाचल प्रदेश कांग्रेस महासचिव देवेंद्र जग्गी ने पूर्व भाजपा सरकार पर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस नेताओं ने करोड़ों रुपए के बजट के दुरुपयोग की निष्पक्ष जांच की मांग की है। कांग्रेस का आरोप है कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत विकास के लिए आवंटित करोड़ों रुपए का बजट स्थानीय जरूरतों के बजाय शिमला में बैठे आकाओं के इशारे पर इस्तेमाल किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि किस तत्कालीन मंत्री, बड़े नेता या विधायक के दबाव में अधिकारियों ने इस बजट का दुरुपयोग किया, इसकी जांच होनी चाहिए। तत्कालीन जनप्रतिनिधि केवल कठपुतली बनकर रहे : कांग्रेस नेता कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि धर्मशाला की महत्वपूर्ण योजनाओं के समझौता ज्ञापन (एमओयू) स्थानीय स्तर पर नहीं, बल्कि शिमला स्थित निदेशक कार्यालय में हस्ताक्षरित होते रहे। इससे पता चलता है कि तत्कालीन जनप्रतिनिधि केवल कठपुतली बनकर रह गए थे और सत्ता का नियंत्रण कहीं और से हो रहा था। इस दौरान देश के पहले अंडरग्राउंड डस्टबिन प्रोजेक्ट में भी गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे। अनुराग शर्मा और देवेंद्र जग्गी ने बताया कि बिना स्थलाकृति (टोपोग्राफी) का अध्ययन किए इस प्रोजेक्ट का टेंडर पौंटा साहिब के साथ कर दिया गया, जबकि दोनों स्थानों की भौगोलिक परिस्थितियां पूरी तरह भिन्न हैं। कबाड़ में तब्दील हुए करोड़ों के डस्टबिन आज करोड़ों की लागत से लगे ये डस्टबिन कबाड़ में बदल चुके हैं। कांग्रेस ने पूछा कि किस अधिकारी के आदेश पर इन डस्टबिनों को उखाड़कर डंपिंग साइट में फेंका गया और जनता के पैसे की बर्बादी का असली जिम्मेदार कौन है। कांग्रेस ने दावा किया कि धर्मशाला की जनता इन सभी विसंगतियों को देख चुकी है और चुनाव में इसका करारा जवाब देगी। पार्टी को विश्वास है कि उनके 13 पार्षद जीतकर आएंगे और नगर निगम में कांग्रेस का मेयर बनेगा। चुनावी अभियान को गति देने के लिए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू 14 मई को धर्मशाला पहुंच रहे हैं, जहां वे कांग्रेस प्रत्याशियों के पक्ष में प्रचार करेंगे।