पॉक्सो-अपहरण केस में आरोपी को नियमित जमानत:हाईकोर्ट ने कहा- अनिश्चितकाल तक जेल में नहीं रख सकते, बचाव पक्ष बोला- लड़की खुद गई

हरियाणा के फरीदाबाद के सेक्टर-17 थाना में दर्ज पॉक्सो और अपहरण मामले में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने राहुल (22) को नियमित जमानत दे दी है। राहुल करीब 10 महीने से जेल में बंद था। हाईकोर्ट ने कहा कि किसी आरोपी को अनिश्चितकाल तक अंडरट्रायल कैदी बनाकर जेल में नहीं रखा जा सकता। खासकर तब जब पीड़िता की गवाही पूरी हो चुकी हो और आरोपी के फरार होने का कोई ठोस आधार न हो। यह आदेश पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस एन.एस. शेखावत ने 8 मई 2026 को सुनाया। कोर्ट ने आरोपी को सख्त शर्तों के साथ जमानत देने के निर्देश दिए। मामला 24 जून 2024 को फरीदाबाद के सेक्टर-17 थाना में दर्ज एफआईआर नंबर 134 से जुड़ा है। केस भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 140 और पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत दर्ज किया गया था। पहले यह मामला आईपीसी की धारा 365 के तहत दर्ज हुआ था। मां की शिकायत पर दर्ज की गई थी FIR एफआईआर पीड़िता की मां पिंकी की शिकायत पर दर्ज की गई थी। शिकायत में उन्होंने बताया था कि उनकी बेटी (13) 7वीं कक्षा में सरकारी स्कूल ओल्ड फरीदाबाद में पढ़ती थी। वह मोबाइल फोन पर किसी से बात करती रहती थी, जिस पर परिवार उसे समझाता और डांटता था। इसी बात से नाराज होकर 23 जून 2024 को शाम करीब 4 बजे वह घर से चली गई। परिवार ने बच्ची की काफी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद पुलिस में शिकायत दी गई। बचाव पक्ष बोला- लड़की खुद गई थी राहुल के वकील आकाश खुर्चा ने हाईकोर्ट में दलील दी कि लड़की खुद अपनी मर्जी से घर छोड़कर गई थी। वकील के मुताबिक वह परिवार के व्यवहार से परेशान थी और मोबाइल पर कुछ लड़कों के संपर्क में भी थी। बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि युवती 23 जून 2024 को घर से गई थी और 19 जुलाई 2024 को बरामद हुई। इस दौरान उसने राहुल के साथ चंडीगढ़ में कथित रूप से शादी भी की थी। वकील ने कहा कि युवती कई जगह गई, लेकिन उसने कहीं भी विरोध नहीं किया। वकील ने यह भी कहा कि राहुल का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और वह 20 जुलाई 2024 से जेल में बंद है। सरकार ने जमानत का विरोध किया हरियाणा सरकार की ओर से पेश वकील ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि राहुल मुख्य आरोपी है और पीड़िता ने ट्रायल कोर्ट में गवाही देते हुए अभियोजन पक्ष का समर्थन किया है। सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि एफएसएल रिपोर्ट में पीड़िता के वेजाइनल स्वैब और आरोपी के अंडरवियर पर खून मिलने की पुष्टि हुई है। हालांकि डीएनए रिपोर्ट अभी लंबित है। हाईकोर्ट ने कहा कि आरोप गंभीर जरूर हैं, लेकिन केवल आरोपों के आधार पर आरोपी को लंबे समय तक जेल में नहीं रखा जा सकता। अदालत ने माना कि पीड़िता की गवाही हो चुकी है, इसलिए अब आरोपी द्वारा सबूतों से छेड़छाड़ की संभावना कम है। कोर्ट ने यह भी कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई ठोस तथ्य नहीं है, जिससे लगे कि आरोपी ट्रायल से बचने के लिए फरार हो जाएगा। जमानत के साथ लगाई गईं शर्तें पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने आरोपी राहुल को नियमित जमानत देते हुए कई कड़ी शर्तें लगाई हैं। अदालत ने स्पष्ट कहा कि जमानत का गलत इस्तेमाल होने पर इसे रद्द भी किया जा सकता है। कोर्ट ने आदेश दिया कि आरोपी किसी भी गवाह, शिकायतकर्ता या मामले से जुड़े व्यक्ति को सीधे या परोक्ष रूप से प्रभावित करने की कोशिश नहीं करेगा। वह किसी को धमकी, लालच या दबाव नहीं डालेगा, ताकि कोई व्यक्ति अदालत या जांच एजेंसी के सामने तथ्य छिपाए नहीं। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि राहुल को हर तय तारीख पर ट्रायल कोर्ट में पेश होना होगा। बिना अदालत की अनुमति वह सुनवाई से अनुपस्थित नहीं रह सकेगा। अदालत ने आरोपी को अपना पासपोर्ट जमा कराने का निर्देश भी दिया है। अगर उसके पास पासपोर्ट नहीं है तो उसे इस संबंध में हलफनामा देना होगा। कोर्ट ने आरोपी को अपना स्थायी पता और मोबाइल नंबर भी ट्रायल कोर्ट में जमा कराने के आदेश दिए हैं। यदि वह अपना निवास स्थान या मोबाइल नंबर बदलता है तो इसकी जानकारी तुरंत अदालत को देनी होगी। हाईकोर्ट ने यह भी साफ किया कि यदि जमानत के दौरान आरोपी किसी अन्य आपराधिक गतिविधि में शामिल पाया जाता है तो इसे गंभीरता से लिया जाएगा और अभियोजन पक्ष उसकी जमानत रद्द कराने के लिए अदालत में आवेदन दे सकेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *