बिहार में पेट्रोल 87 और डीजल 91 पैसे महंगा:10 दिन में तीसरी बार बढ़े दाम; सुधा दूध के रेट 2 से 3 रुपए बढ़ेंगे, पनीर-बटर भी महंगा

अमेरिका-ईरान के बीच चल रही जंग के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव जारी है। देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी हुई है। पेट्रोल के दाम में 87 पैसे प्रति लीटर और डीजल में 91 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। तेल कंपनियों की ओर से जारी नई दरें शुक्रवार रात से लागू हो गई हैं। पटना में अब पेट्रोल की कीमत 110.16 पैसे से बढ़कर 111.11 रुपए हो गई है। वहीं डीजल के दाम 96.19 रुपए से बढ़कर 97.14 पैसे हो गए हैं। 10 दिन के अंदर कम समय में ईंधन के दामों में यह तीसरी बढ़ोतरी है। इससे पहले मंगलवार को कीमतों में बढ़ोतरी की गई थी। आज पेट्रोल 91 पैसे और डीजल की कीमतों में 89 रुपए की बढ़ोतरी हुई है। सुधा दूध के दाम 2 से 3 रुपए बढ़ेंगे बिहार स्टेट मिल्क को-ऑपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड (COMFED) ने सुधा ब्रांड के दूध और दुग्ध उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी का ऐलान कर दिया है। नई दरें 25 मई 2026 से पूरे बिहार में लागू होंगी। फेडरेशन की ओर से कहा गया है कि पशुपालकों से खरीदे जाने वाले दूध की कीमत बढ़ने, पैकेजिंग, पेट्रोलियम पदार्थ, बिजली और परिवहन लागत में इजाफे के कारण यह फैसला लिया गया है। COMFED के मुताबिक दूध की खरीद कीमत में 2 रुपए से लेकर 3.13 रुपए प्रति लीटर तक बढ़ोतरी हुई है, जिसका असर अब बाजार कीमतों पर भी दिखेगा। सबसे ज्यादा असर रोजाना दूध इस्तेमाल करने वाले परिवारों पर पड़ेगा। इसके साथ ही सुधा के पनीर, पेड़े, बटर, गुलाबजामुन और रसगुल्ले की कीमत में भी बढ़ोतरी की गई है। अन्य चीजों के दाम भी बढ़ सकते हैं… पेट्रोल-डीजल की कीमतों में क्यों हुई बढ़ोतरी? इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव है। ईरान और अमेरिका की जंग शुरू होने से पहले क्रूड ऑयल के दाम 70 डॉलर थे जो अब बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं। क्रूड की कीमतें बढ़ने से तेल कंपनियां दबाव में थीं। इसलिए कंपनियों ने घाटे की भरपाई के लिए यह कदम उठाया है। अगर कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी बनी रहती है तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें और भी बढ़ाई जा सकती हैं। बेस प्राइस से चार गुना तक बढ़ जाती है कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर के मुकाबले रुपए की स्थिति के आधार पर देश में ईंधन के दाम तय किए जाते हैं। सरकारी तेल कंपनियां ‘डेली प्राइस रिवीजन’ यानी डायनेमिक प्राइसिंग सिस्टम के तहत हर दिन सुबह 6 बजे नए रेट अपडेट करती हैं। उपभोक्ता तक पहुंचने से पहले तेल की कीमतों में कई तरह के टैक्स और खर्च जुड़ते हैं, जिसे हम आसान भाषा में समझ सकते हैं: 1. कच्चे तेल की कीमत (बेस प्राइस): भारत अपनी जरूरत का करीब 90% क्रूड विदेशों से आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार से खरीदे गए बैरल के हिसाब से प्रति लीटर तेल की कीमत तय होती है। 2. रिफाइनिंग और कंपनियों का चार्ज: कच्चे तेल को देश की रिफाइनरियों में साफ करके पेट्रोल-डीजल बनाया जाता है। इसमें रिफाइनिंग लागत और कंपनियों का मार्जिन शामिल होता है। 3. केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी: रिफाइनरी से निकलने के बाद केंद्र सरकार इस पर एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) और रोड सेस लगाती है। यह देशभर में सभी राज्यों के लिए समान होती है। 4. डीलर कमीशन: तेल कंपनियां जिस रेट पर पेट्रोल पंप मालिकों (डीलर्स) को ईंधन बेचती हैं, उसमें डीलर्स का अपना निश्चित कमीशन जोड़ा जाता है, जो पेट्रोल और डीजल के लिए अलग-अलग होता है। 5. राज्य सरकार का वैट (VAT): सबसे आखिर में राज्य सरकारें अपने हिसाब से वैट या लोकल सेल्स टैक्स लगाती हैं। चूंकि हर राज्य की वैट दरें अलग होती हैं, इसीलिए दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे अलग-अलग शहरों में ईंधन की कीमतें भी अलग-अलग हो जाती PM मोदी ने कहा था- ईंधन का इस्तेमाल कम करें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को तेलंगाना में एक कार्यक्रम के दौरान पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक हालात को देखते हुए पेट्रोलियम उत्पादों के सावधानीपूर्वक उपयोग का सुझाव दिया था। पीएम ने कहा था कि आज समय की मांग है कि पेट्रोल, गैस और डीजल का उपयोग बहुत संयम से किया जाए। हमें आयातित पेट्रो उत्पादों का उपयोग केवल जरूरत के अनुसार ही करना चाहिए। इससे न केवल विदेशी मुद्रा बचेगी, बल्कि युद्ध के प्रतिकूल प्रभाव भी कम होंगे। खबर से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए…

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