पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार की पहली ड्रग व सामाजिक-आर्थिक जनगणना पर सवाल उठने लगे हैं। सरकार ने 6 अप्रैल को योजना शुरू की। जिसमें इसे ड्रग सेंसेस बताया गया। मगर, इसमें ऐसे कई सवाल है, जिनको लेकर विपक्षी दलों ने एतराज जताना शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि इसमें फ्री बस सेवा, सेहत बीमा, मुफ्त बिजली, मुफ्त तीर्थ यात्रा समेत सरकार की स्कीमों के फायदे गिनाने वाले सवाल पूछे जा रहे हैं। इसके अलावा शराब की लत को नशा नहीं माना गया है। इस सेंसस में 120 में से 40 सवाल इसी तरह के हैं। सर्वे में जुटे टीचर्स भी नाम न बताने की शर्त पर मानते हैं कि यह फॉर्म ड्रग सर्वे से ज्यादा विधानसभा चुनावों का सर्वे जैसा लगता है। सर्वे में टारगेट रखे गए 65 लाख परिवारों में से 2 लाख को कवर भी किया जा चुका है। विपक्षी दलों का कहना है कि यह न केवल जनता के करोड़ों रुपए की बर्बादी है बल्कि AAP सरकार कुर्सी बचाने के लिए सर्वे कर रही है। इसके जवाब में ड्रग सेंसस के नोडल अफसर अमित तलवार कहते हैं कि सरकारी योजनाओं के सवाल बेहतरी के सुझाव लेने के लिए हैं। ये सवाल तो तब पूछे जाते हैं, जब व्यक्ति नशे पूछे सवालों का जवाब देता है। क्या है सरकार का ड्रग सेंसेस, किन सवालों पर हो रहा एतराज, विरोधी दलों के क्या तर्क, ये जानने के लिए पढ़िए पूरी रिपोर्ट…. वह 11 सवाल, जिन पर विपक्ष को एतराज:- सर्वे में क्या आ रही दिक्कतें, जानिए 3 पॉइंट में सर्वे को लेकर ये भी परेशानी:- पंजाब ड्रग सेंसेज में शराब की लत को नहीं गिना जा रहा पंजाब की पहली ड्रग और सामाजिक-आर्थिक जनगणना में लगे टीचर्स का कहना है कि सर्वे के दौरान शराब की लत को नशे की कैटागिरी में न गिनने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि सरकार ने जो एप बनाया है उसमें शराब की लत का प्रश्न है, लेकिन ट्रेनिंग के दौरान कहा गया कि शराब को कोई नशे में बताए तो नहीं पर टिक लगाएं। सरकार का तर्क है कि शराब ठेकों पर कानूनी रूप से मिलती है, इसलिए इसे नहीं गिना जा सकता। वहीं मनोचिकित्सकों और विशेषज्ञों का कहना है कि पंजाब में शराब की लत एक बहुत बड़ी समस्या है, जो हेरोइन और अफीम से भी ज्यादा है। अगर शराब को इस सर्वे से बाहर रखा गया, तो पंजाब में नशे की वास्तविक स्थिति का सही आकलन नहीं हो पाएगा। मैग्निट्यूड ऑफ सब्सटेंस एब्यूज इन इंडिया सर्वे में बताया गया है कि पंजाब सबसे ज्यादा शराब सेवन वाले सूबों में शामिल है। पंजाब में 6 फीसदी बच्चे शराब पीते हैं। कुल शराब का 75 फीसदी आंध्र प्रदेश, पंजाब, छत्तीसगढ़, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह तथा अरुणाचल प्रदेश में करते हैं। जानें सर्वे पर विपक्षी पार्टियों के नेताओं ने क्या कहा…