बिहार से अब क्रिटिकल मिनरल्स (दुर्लभ खनिज) निकाला जाएगा। बिहार के तीन जिलों रोहतास, गया और औरंगाबाद में जमीन के अंदर खजाना मिला है। यहां मिले 4 तरह के दुर्लभ खनिजों के ब्लॉक के नीलामी की प्रक्रिया लगभग पूरी कर ली गई है। सब कुछ सही रहा तो इस साल के आखिर में खनन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। केंद्रीय खनन मंत्रालय की तरफ से रोहतास जिले के कैमूर पहाड़ी में ग्लूकोनाइट और गया-औरंगाबाद में वैनेडियम युक्त मैग्नेटाइट-इल्मेनाइट रेयर मिनरल्स मिले हैं। लगभग 10 साल तक सर्वे और जांच के बाद खनन के लिए टेंडर हुआ है। 23 मार्च को 4 ब्लॉक का टेंडर जारी किया गया था। 20 मई को टेंडर की प्रक्रिया पूरी कर ली गई। हालांकि, खनन का टेंडर किसे दिया गया है, इसकी घोषणा फिलहाल नहीं की गई है। इन रेयर मिनरल्स के इस्तेमाल से पोटाश (उर्वरक), रिन्यूएबल एनर्जी से लेकर फाइटर प्लेन और मिसाइल तक बनाने में किया जा सकता है। इन 4 ब्लॉक के खनन की प्रक्रिया शुरू होने से लगभग 100 से ज्यादा गांव के युवाओं को रोजगार मिलने की संभावना है। एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में पढ़िए खनिजों के इस्तेमाल से लेकर सरकार को फायदा तक सबकुछ। सबसे पहले मंत्री का बयान- बिहार सरकार NOC देगी बिहार के खान व भू-तत्व मंत्री प्रमोद कुमार ने भास्कर को बताया, ‘राज्य में दुर्लभ खनिजों का भंडार मिला है। इनके व्यावसायिक खनन की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी।’ सबसे पहले उन ब्लॉक को जानिए जिनका टेंडर किया गया ग्लूकोनाइट के लिए रोहतास के तीन इलाके की नीलामी की गई है। इसमें चुटिया नौहट्टा ब्लॉक, पिपराडीह भूरवा ब्लॉक और शाहपुर ब्लॉक शामिल हैं। गया के गेंजना और लकराही बांके बाजार में सैपनेरी वैनेडियम युक्त मैग्नेटाइट-इल्मेनाइट ब्लॉक की नीलामी की गई है। रॉयल्टी नहीं, 100 से ज्यादा गांव के लोगों को रोजगार मिलेगा खनन पॉलिसी के तहत रेयर अर्थ मिनरल्स के खनन पर राज्य सरकार को रॉयल्टी देने का प्रावधान नहीं है। खनन की प्रक्रिया शुरू होने के बाद रोहतास, कैमूर और गया के कम से कम 100 से ज्यादा गांव के लोगों को रोजगार मिलेगा। सरकार की उस नीति को लाभ पहुंचेगा जिसके तहत सम्राट सरकार बिहार के लोगों को बिहार में ही रोजगार देने की योजना पर काम कर रही है। इसका सीधा असर पलायन पर पड़ेगा। ड्रिलिंग ऑपरेटर से इंजीनियर तक को नौकरी के अवसर मिलेंगे स्थानीय नौजवानों को ड्रिलिंग ऑपरेटर और मशीन ऑपरेटर बनने का मौका मिलेगा। अकुशल मजदूर लोडिंग-अनलोडिंग का काम करेंगे। युवाओं को सुरक्षा कर्मी और सुपरवाइजर बनने का मौका भी मिलेगा। इसके अलावा केमिकल इंजीनियर, लैब टेक्नीशियन और पैकिंग स्टाफ की जरूरत पड़ेगी। आस-पास के इलाके में ट्रांसपोर्ट सहित किराना, होटल व चाय-पान की दुकानें खुलेंगी। युवाओं का पलायन रुकने और स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होने की उम्मीद है। एक अनुमान के मुताबिक पांच हजार से अधिक लोगों को रोजगार प्राप्त होगा। 2017 से किया जा रहा था सर्वे कैमूर की पहाड़ियों में दुर्लभ खनिज पाए जाने की संभावना का आकलन सबसे पहले 2017 में किया गया था। इसके बाद से लगातार सर्वे चल रहा था। 2017 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा कराए गए सर्वेक्षण में इस क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता का ग्लूकोनाइट मिलने की पुष्टि हुई थी। जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया और अलग-अलग कंस्लटेंसी के माध्यम से इलाके का सर्वे कराया गया। सर्वे में जब ये स्पष्ट हुआ कि यहां हाई क्वालिटी के दुर्लभ खनिज हैं तो नीलामी की प्रक्रिया शुरू की गई है। अब विस्तार से जानिए, इन खनिजों का कहां इस्तेमाल हो सकता है ग्लूकोनाइट से तैयार होगा हाई क्वालिटी पोटाश ग्लूकोनाइट हरे रंग का सिलिकेट खनिज है। इसमें पोटैशियम और आयरन भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इसका इस्तेमाल एग्रीकल्चर और केमिकल तैयार करने में होता है। वैनेडियम युक्त मैग्नेटाइट-इल्मेनाइट से बनेंगे फाइटर प्लेन वैनेडियम युक्त मैग्नेटाइट-इल्मेनाइट से वैनेडियम, लोहा (आयरन), और टाइटेनियम तीनों मिलते हैं। इसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल भारी उद्योग और हाई टेक चीजों के निर्माण में किया जाता है।