‘एबीवीपी अच्छा संगठन रहा है। लेकिन, अब इसमें उद्दंड छात्र भर्ती हो रहे हैं। मुझ पर भी कुछ किराए के गुंडों ने हमला करने की कोशिश की। महिला कौन है- मुझे पता नहीं था। मैंने सिर्फ पोस्ट शेयर की थी। खतरों से निपटना मुझे आता है। मैं सरकार विरोधी नहीं हूं, कमियों पर लिखता रहूंगा।’ यह कहना है भाजपा महिला नेता कोम्पेला माधवी लता की फोटो पर सेक्सी लिखने वाले बरेली कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. आलोक कुमार खरे का। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में उन्होंने बरेली कॉलेज कैंपस में बुधवार को हुई घटना पर सवाल खड़े किए। उनका कहना है कि भाजपा नेत्री माधवी लता पर की गई टिप्पणी को केवल एक ढाल बनाया गया। कैंपस के ही कुछ ‘भितरघातियों’ के साथ मिलकर मुझे ठिकाने लगाने का जाल बुना गया। मानसिक रूप से तोड़ने की सुनियोजित साजिश बताते हुए प्रोफेसर ने खुद की जान को खतरा बताया है। प्रोफेसर का इंटरव्यू पढ़ने से पहले एक नजर पूरे मामले पर बरेली कॉलेज के चीफ प्रॉक्टर प्रोफेसर आलोक खरे ने भाजपा नेत्री की तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर लिखा- बाबी (साध्वी) भी कम सेक्सी नहीं होती। प्रोफेसर ने भगवा वेश में जिस महिला की तस्वीर शेयर की, वो भाजपा नेत्री कोम्पेला माधवी लता हैं। 2024 में उन्होंने हैदराबाद से AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के खिलाफ लोकसभा चुनाव लड़ा था। हालांकि हार गई थीं। प्रोफेसर खरे की पोस्ट के बाद से मामले ने तूल पकड़ लिया। 1 अप्रैल (बुधवार) को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ता प्राचार्य कार्यालय में घुस गए। प्रिंसिपल ऑफिस का घेराव कर नारेबाजी की और प्रॉक्टर से धक्का-मुक्की की। माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि छात्राएं प्रॉक्टर को मारने के लिए आगे बढ़ीं। इसके बाद उन्हें स्टाफ के पीछे छिपकर जान बचानी पड़ी। हालात बेकाबू होते देख प्राचार्य डॉ. ओमप्रकाश राय ने प्रोफेसर आलोक खरे को चीफ प्रॉक्टर के पद से कार्यमुक्त कर दिया। साथ ही पूरी प्रॉक्टोरियल टीम को भंग करने का आदेश जारी कर दिया। अब पढ़िए…प्रोफेसर आलोक खरे से हुई खास बातचीत… सवाल: बरेली कॉलेज में बुधवार को जो हुआ, आपका क्या कहना है?
जवाब: मेरे साथ ABVP के कार्यकर्ताओं ने जो कुछ किया, उससे मैं बहुत आहत और दुखी हूं। मेरा परिवार और शिक्षक साथी भी इस घटना से व्यथित हैं। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। मेरे 30 साल के कार्यकाल में ऐसा कभी कुछ नहीं हुआ। इतना उद्दंड व्यवहार मुझे आज तक नहीं मिला, जहां किसी के हाथ मेरे गिरेबान तक पहुंचे हों। जीवन में ऐसा कभी नहीं हुआ, वह भी तब जब मैं अपने पद से मुक्त होने की दहलीज पर खड़ा हूं। जिस पद के लिए लोग लड़ाई-झगड़ा कर रहे हैं, उससे तीन दिन पहले ही मैं त्यागपत्र सौंप चुका था। उसी त्यागपत्र सौंपने को लेकर मुझे अपमानित किया गया। जो लोग यह करवा रहे, उन्हें शायद इस बात का संज्ञान नहीं था। वरना ऐसी घटना नहीं होती। निश्चित रूप से मन बहुत परेशान है। मैंने प्राचार्य से कार्रवाई की मांग की है। किसी शिक्षक को प्राचार्य कक्ष में अपमानित करना पूरी संस्था और शिक्षक समुदाय का अपमान है। सवाल: ABVP कार्यकर्ताओं ने जो आरोप लगाए, हमला किया… क्या कहेंगे?
जवाब: ABVP पहले बहुत अच्छा संगठन रहा है। मेरे कई मित्र वहां से निकलकर आज बड़ी पोजिशन पर हैं। लेकिन, पिछले कुछ समय से संगठन के अंदर सिर्फ उद्दंड लड़के भरे गए हैं। कल की घटना में कई किराए के गुंडे बुलाए गए थे। जो संगठन के सदस्य तक नहीं हैं। हमारे परिसर का छात्र कभी इस स्तर तक नहीं गिरेगा कि वह शिक्षक के गिरेबान पर हाथ डाले। यह बाहर के तत्वों ने कराया है। हम सीसीटीवी फुटेज देख रहे हैं। उन बाहरी अराजक तत्वों को चिह्नित कर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रहे हैं। सवाल: सुना है हमला करने वालों में कुछ छात्राएं भी थीं?
जवाब: हां, वहां कुछ छात्राएं भी थीं। उनकी पूरी रिकॉर्डिंग हमारे पास है। हम उनका पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं। अगर वे हमारे कॉलेज की छात्राएं निकलीं, तो हम उन पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करेंगे। उन्हें रिस्ट्रिक्ट करेंगे और उनके पेरेंट्स को बुलाएंगे। लेकिन अगर कोई बाहरी व्यक्ति या अराजक तत्व मिलता है, तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराकर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सवाल: क्या आपको ABVP से खतरा है?
जवाब: निश्चित रूप से मुझे अपनी जान का खतरा है। जो लोग कॉलेज के चीफ प्रॉक्टर (जो पूरी अनुशासन व्यवस्था देखते हैं) के साथ ऐसी घटना कर सकते हैं, वे कुछ भी कर सकते हैं। कल से मुझे लगातार आगाह किया जा रहा है कि मैं कैंपस में अकेला न घूमूं, क्योंकि मुझ पर निगाह रखी जा रही है। हालांकि मैं इतना कमजोर व्यक्ति नहीं हूं। इन खतरों से निपटना मुझे आता है, लेकिन खतरा बिल्कुल बरकरार है। सवाल: आपके समर्थन में समाजवादी छात्र सभा ने ज्ञापन दिया है?
जवाब: कॉलेज के सभी छात्र संगठनों से मेरा जुड़ाव रहा है। ABVP के कार्यकर्ता भी मुझसे सहयोग मांगते रहे हैं। अगर अन्य संगठन मेरे समर्थन में खड़े हो रहे हैं और उन्हें लगता है कि शिक्षक के साथ गलत हुआ है, तो यह अच्छी बात है। वे अपने स्तर पर लड़ाई लड़ेंगे, मैं अपनी लड़ाई लड़ने में सक्षम हूं। मेरे साथ मेरे शिक्षक साथी खड़े हैं। जो भी संगठन मेरे सहयोग के लिए आ रहे, मैं उनका आभार व्यक्त करता हूं। सवाल: फेसबुक पोस्ट का पूरा मामला क्या था?
जवाब: मैं विज्ञान का शिक्षक हूं। अंधविश्वास और मूढ़ता के खिलाफ लिखना मेरी आदत है। कभी-कभी राजनीतिक पोस्ट भी कर देता हूं। जिस पोस्ट की बात हो रही है, वह करीब 15 दिन पुरानी थी। मुझे यह भी नहीं पता था कि वह कौन महिला हैं? बस उन्होंने साधु जैसे कपड़े पहने थे। आजकल ऐसे वेश में कई घटनाएं हो रही हैं। अगर उस पोस्ट से किसी को आपत्ति थी, तो उन्हें मेरे पास आना चाहिए था। अगर मुझसे गलती हुई थी, तो मैं खेद प्रकट कर देता और क्षमा भी मांग लेता। लेकिन, इस तरह आक्रमण और हाथापाई करना समाधान नहीं है। अगर शिकायत थी, तो पुलिस या साइबर सेल जाना चाहिए था। मैं सजा भुगतने को तैयार हूं, लेकिन हिंसा को जायज नहीं ठहराया जा सकता। सवाल: कॉलेज की घटना क्या सोची-समझी साजिश थी?
जवाब: यह पूरी तरह से एक प्लानिंग और साजिश थी। फेसबुक पोस्ट का तो सिर्फ बहाना बनाया गया, जिससे मुझे गलत साबित कर आक्रमण किया जा सके। जिस विचारधारा से ये लोग जुड़े हैं, वे इस तरह की चीजों (भगवा वस्त्र आदि) को प्रमोट करते हैं। जिससे मुद्दे को बड़ा बनाकर अन्य नेताओं का समर्थन हासिल किया जा सके। असल एजेंडा कुछ और था। कॉलेज परिसर के ही कुछ साथियों के इशारों पर यह सब मैनेज किया गया, जिससे मुझे अपमानित कर हटाया जा सके। सच्चाई यह है कि मैं 3 दिन पहले ही इस्तीफा दे चुका था। जो खुद छोड़ चुका हो, उसे बर्खास्त करने का नाटक क्या कहलाएगा? सवाल: क्या ABVP को कहीं से संरक्षण मिला है?
जवाब: परिसर के अंदर ऐसी कई घटनाएं हुई हैं, जहां इन्होंने पुलिस के साथ बदसलूकी की या थाने घेरे। नगर आयुक्त के साथ हुई अभद्रता में भी कोई मुकदमा नहीं हुआ था। जब सत्ता पक्ष का हाथ सिर पर हो, तो इनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करना बहुत मुश्किल हो जाता है। पहले जो पदाधिकारी कुख्यात गुंडे रहे हैं, उनके लिए भी ये लोग बेल करवाने पहुंच जाते हैं। इसी सुरक्षा की वजह से इनके हौसले बढ़े हुए हैं। ये उद्दंड हो गए हैं। कल की घटना में इन्होंने जो साहस दिखाया, उसके पीछे संगठन का ही हाथ है। सवाल: आपका अगला कदम क्या होगा?
जवाब: मैं और मेरा परिवार इस समय बहुत व्यथित और परेशान हैं। हमने प्राचार्य को लिखित पत्र दिया है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि वे खुद प्रत्यक्षदर्शी हैं। एसपी को पत्र भेजकर एफआईआर दर्ज करवाएंगे। हमारे शिक्षक साथी भी साथ हैं। अगर दो-तीन दिन में कार्रवाई नहीं हुई, तो हम धरने पर बैठेंगे और उच्चाधिकारियों से मिलेंगे। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि इन अराजक तत्वों पर सख्त कार्रवाई हो। सवाल: आरोप है कि आप सरकार विरोधी पोस्ट लिखते हैं?
जवाब: मैं सरकार के खिलाफ कभी नहीं लिखता। हां, सिस्टम और तंत्र की कमियों पर जरूर लिखता हूं। वर्तमान सरकार की कानून व्यवस्था अच्छी है, माफिया खत्म हुए हैं। लेकिन, शिक्षा व्यवस्था में सुधार अपेक्षित नहीं है। अगर मैं कहूं कि नदियां प्रदूषित हैं या आवारा पशुओं से किसान परेशान हैं, तो इसे सरकार विरोध नहीं, बल्कि सच्चाई कहना चाहिए। मैं अंधभक्त नहीं हूं। मैं अच्छाइयां भी देखता हूं और कमियां भी। शिक्षकों पर काम का इतना बोझ है कि कई की मौत हो गई या उन्होंने आत्महत्या कर ली। इन विषयों पर लिखना मेरा धर्म है। मैं आगे भी लिखता रहूंगा। प्रोफेसर का 35 साल का सफर, विवादों से गहरा नाता
प्रोफेसर आलोक खरे का शैक्षणिक करियर करीब साढ़े तीन दशक पुराना है। उन्होंने 1984 में लखीमपुर खीरी के वाईडी कॉलेज से स्नातक किया और बाद में वनस्पति विज्ञान में पीएचडी हासिल की। बरेली कॉलेज में आने से पहले वह सीतापुर के सेक्रेड हार्ट डिग्री कॉलेज में कार्यरत रहे। वह रुहेलखंड यूनिवर्सिटी के अधिकृत रिसर्च सुपरवाइजर भी हैं। हालांकि, अपने फेसबुक पोस्ट और सरकार विरोधी रुख के चलते वह अक्सर सुर्खियों और विवादों में बने रहते हैं। ———————– यह खबर भी पढ़ें.. बरेली कालेज में हंगामा …एबीवीपी छात्रों पर FIR की मांग, साध्वी पर अभद्र टिप्पणी के बाद छात्रों के दो गुट आमने-सामने भाजपा नेत्री कोम्पेला माधवी लता की फोटो पर सेक्सी लिखने वाले चीफ प्रॉक्टर को लेकर हुए भारी हंगामे के बाद अब समाजवादी छात्र सभा भी कूद पड़ी है। छात्र सभा आज SSP को लिखित शिकायत कर एबीवीपी कार्यकर्ताओं पर मुकदमा लिखाने की मांग करेगी। पढ़ें पूरी खबर