CBI ने SIT से पूछा-जांच में क्या सबूत मिले:नीट छात्रा रेप-मौत मामले में क्यों पुलिसवालों से लिए अलग-अलग बयान, मां से भी फोन पर किए सवाल

नीट छात्रा रेप-मौत मामले में CBI की जांच तेजी से चल रही है। जांच के घेरे में बिहार पुलिस के अधिकारी भी हैं। मंगलवार को एजेंसी ने इस मामले की जांच करने वाली SIT के 4 अधिकारियों से पूछताछ की। एजेंसी ने सभी पुलिस अधिकारियों के अलग-अलग बयान दर्ज किए। उनसे अलग-अलग पूछताछ की गई। दूसरी ओर छात्रा की मां से भी फोन कर कई सवालों के जवाब पूछे गए। दैनिक भास्कर की खास रिपोर्ट में पढ़िए, नीट छात्रा रेप-मौत मामले में CBI की जांच किस दिशा में चल रही है? एजेंसी ने क्यों इस केस की जांच करने वाली SIT में शामिल पुलिस अधिकारियों से अलग-अलग पूछताछ की? इससे क्या होगा? CBI की कई टीम एक साथ कर रही काम
इस केस की जांच में CBI की अलग-अलग कई टीम एक साथ काम कर रही है। इसका पता इस बात से चलता है कि एक टीम परिवार से फोन पर वही सवाल पूछती है, जो जहानाबाद जिले में स्थित उनके घर जाकर दूसरी टीम पूछ चुकी है। पारिवारिक सूत्रों के अनुसार मंगलवार को पटना से CBI की एक महिला अधिकारी ने कॉल किया। छात्रा की मां से पूछा कि आपकी बेटी जहानाबाद से पटना के लिए कब निकली थी? किस गाड़ी से गई थी? किस कलर की गाड़ी थी? ये वो सवाल हैं, जो पहले भी परिवार से पूछे जा चुके हैं। परिवार के सदस्यों को यह समझ में नहीं आ रहा है कि उनसे एक ही सवाल बार-बार क्यों पूछे जा रहे हैं? हालांकि, परिवार की तरफ से दावा किया गया है कि जो सवाल कॉल कर पूछे गए, उसका जवाब दे दिया गया है। CBI ने SDPO और तीन थानेदारों को ऑफिस बुलाया अपनी जांच का दायरा बढ़ाते हुए CBI ने पटना पुलिस के अधिकारियों से पूछताछ शुरू कर दी है। मंगलवार को सीबीआई ने सचिवालय SDPO-1 अन्नू कुमारी और कदमकुआं, रामकृष्णा नगर और परसा बाजार के थानेदार को पूछताछ के लिए ऑफिस बुलाया। ये वो पुलिस अधिकारी हैं जो इस केस की जांच के लिए बनाई गई स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) में शामिल थे। सूत्रों की मानें तो इन सभी से CBI की अलग-अलग टीम ने अलग-अलग कमरों में पूछताछ की है। CBI ने पुलिस अधिकारियों से क्यों की अलग-अलग पूछताछ? CBI अपनी जांच में केस से जुड़े सही तथ्य सामने लाना चाहती है। इसके चलते एजेंसी ने पुलिस अधिकारियों से अलग-अलग पूछताछ की है। सभी के अलग-अलग बयान दर्ज किए गए हैं। CBI के अधिकारी सभी पुलिस अधिकारियों के बयान मिलाएंगे। इस बात की जांच की जाएगी कि पुलिस अधिकारियों के बयान में कोई कंट्राडिक्शन तो नहीं है। इनसे किए गए पूछताछ के जरिए CBI शुरुआती जांच की प्रक्रिया, घटनास्थल की स्थिति, जुटाए गए सबूतों और पुलिस की कार्रवाई को समझेगी। एजेंसी बारीकी से समझना चाहती है कि पुलिस ने इस मामले की पड़ताल किस तरह की। CBI के अधिकारी यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि केस के शुरुआती दौर में क्या-क्या कदम उठाए गए? SIT के अधिकारी किन आधारों पर अपने रिजल्ट तक पहुंचे थे? SIT से जांच के क्रम में कहीं चूक तो नहीं हुई है? अपनी जांच के क्रम में CBI पूरे घटनाक्रम की कड़ी-दर-कड़ी समीक्षा कर रही है ताकि छात्रा की मौत की असली वजह सामने लाई जा सके। 10 लोगों का पॉलीग्राफ टेस्ट करा सकती है CBI नीट छात्रा मौत मामले में सीबीआई को अब तक ठोस सुराग नहीं मिला है। एजेंसी की सबसे बड़ी चुनौती छात्रा के कपड़े से मिले स्पर्म के डीएनए का उस आरोपी के डीएनए के सैंपल से मिलान करना है, जिसने उसके साथ रेप किया फिर मार डाला। सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसी इस मामले में सच उगलवाने के लिए करीब 10 लोगों का पॉलीग्राफ टेस्ट करा सकती है। इसे झूठ पकड़ने वाला टेस्ट भी कहा जाता है। किसी भी व्यक्ति का यह टेस्ट कराने के लिए कोर्ट और आरोपी की सहमति जरूरी है। नीलम अग्रवाल और दोनों वार्डेन से हुई पूछताछ

सीबीआई ने सोमवार को हॉस्टल संचालिका नीलम अग्रवाल और नीतू समेत दोनों महिला वार्डेन से पूछताछ की है। सोमवार को शम्भू गर्ल्स हॉस्टल में सीन रीक्रिएट किया गया। इस दौरान तीनों से सवाल पूछे गए। तीनों के बयानों को टीम ने मिलाने की भी कोशिश की है। छात्रा की मां और मामी ने शुरुआती जांच के दौरान केंद्रीय एजेंसी की टीम को बताया था कि हॉस्टल संचालिका नीलम अग्रवाल ने उन्हें रुपए का ऑफर दिया था। कहा था कि ‘आपकी बेटी को बचा नहीं पाएं, आपको जितने रुपए लेना है, ले लीजिए।’ जांच टीम में शामिल अधिकारी ने संचालिका से इस बारे में भी सवाल पूछा कि आपने छात्रा की मां को रुपए का ऑफर क्यों दिया था? जरूरत पड़ने पर फिर इंटेरोगेट कर सकती CBI छात्रा 5 जनवरी को अपने घर से वापस हॉस्टल आई, तो उसकी हालत क्या थी? हॉस्टल में बाकी छात्राओं के साथ वो किस तरह से बात कर रही थी? क्या उसके व्यवहार में उस दिन कोई बदलाव दिखा था? रात में वो कब अपने कमरे में गई थी? इस तरह के कई सवाल हॉस्टल की वार्डेन से पूछे गए हैं। सूत्रों की मानें तो संचालिका और दोनों वार्डेन से टीम ने स्पष्ट कर दिया है कि जरूरत पड़ने पर आप सभी से दोबारा पूछताछ हो सकती है। दरअसल, केस का खुलासा करने के लिए CBI साइंटिफिक, टेक्निकल और फिजिकल तरीके से सबूत जुटाने में लगी है।

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