पंजाब पुलिस के डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर द्वारा गिरफ्तारी को चुनौती दी गई याचिका पर बुधवार को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह दिल्ली स्पेशल पुलिस एस्टैब्लिशमेंट (DSPE) एक्ट की धारा 5 और 51 के तहत जारी किसी भी आदेश का रिकॉर्ड अदालत में पेश करे। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि क्या चंडीगढ़ में राज्य के कर्मचारियों पर कार्रवाई करने के लिए सीबीआई को कोई वैध अधिकार या आदेश दिया गया था। हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली बेंच ने इस मामले की अगली सुनवाई दिसंबर के पहले हफ्ते तक टाल दी। अब याचिका के चार पॉइंट में जाने 1. अधिकार क्षेत्र पर सवाल भुल्लर ने दो याचिकाएं अदालत में दायर की हैं। पहली याचिका में भुल्लर ने CBI के अधिकार क्षेत्र पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि वह पंजाब में तैनात हैं। ऐसे में केस दर्ज करने के लिए पंजाब सरकार से अनुमति ली जानी जरूरी है। 2. सरकार से अनुमति बिना अरेस्ट नहीं उन पर FIR CBI चंडीगढ़ द्वारा दर्ज नहीं की जा सकती थी क्योंकि कथित अपराध पंजाब में हुआ था। पंजाब सरकार की अनुमति बिना उन्हें गिरफ्तार भी नहीं किया जा सकता था, जबकि जिस 2023 से जुड़े केस में अरेस्ट किया गया है, वह पंजाब के सरहिंद थाने से जुड़ा है। 3. सामान रिकवर नहीं हुआ चंडीगढ़ में जो सामान रिकवर हुआ है, वह सामान उनसे बरामद नहीं हुआ। 4. एक अपराध की दो FIR दूसरी FIR को लेकर भी सवाल खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि एक अपराध की दो FIR दर्ज नहीं की जा सकतीं। CBI से पहले पंजाब विजिलेंस FIR दर्ज कर चुकी थी। जानिए, क्या था पूरा मामला हरचरण सिंह भुल्लर को 16 अक्टूबर 2025 को CBI ने 8 लाख रुपए की रिश्वत मांगने के आरोप में मोहाली से गिरफ्तार किया, जिसके बाद उनके ठिकानों पर छापेमारी में करोड़ों की नकदी, सोना और संपत्तियों के दस्तावेज बरामद हुए। 19 अक्टूबर को पंजाब सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया। इसके बाद 29 अक्टूबर 2025 को CBI ने उनकी आय से अधिक संपत्ति रखने के आरोप में दूसरी FIR दर्ज की। वहीं, इससे पहले विजिलेंस ब्यूरो पंजाब ने भी उन पर केस दर्ज किया था। नवंबर 2025 में अदालत ने उन्हें CBI की हिरासत में भेज दिया और मामला आगे जांच में है।