SGPGI में ब्रेनडेड घोषित किए गए 43 साल संदीप कुमार के अंगदान से KGMU में 35 साल मरीज को नई जिंदगी मिली है। सोमवार को KGMU में जटिल लिवर प्रत्यारोपण सफलतापूर्वक हुआ। प्रत्यारोपण के बाद मरीज डॉक्टरों की निगरानी में है। SGPGI में रविवार को ब्रेनडेड घोषित किए गए संदीप कुमार के परिवारीजनों ने अंगदान का फैसला लिया। SGPGI में लिवर प्रत्यारोपण के लिए उपयुक्त डोनर नहीं मिला। लिहाजा SGPGI प्रशासन ने तत्काल KGMU प्रशासन से संपर्क साधा। जानकारी साझा करने के बाद 35 साल रवींद्र प्रताप सिंह को लिवर प्रत्यारोपण के लिए उपयुक्त पाया गया। KGMU के गेस्ट्रो सर्जरी विभाग में रविवार शाम से लिवर प्रत्यारोपण की प्रक्रिया शुरू हुई। जो पूरी रात चली। सोमवार सुबह प्रत्यारोपण पूरा हुआ। विभाग के अध्यक्ष डॉ. अभिजीत चन्द्रा की टीम ने प्रत्यारोपण किया। प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने बताया कि करीब 12 घंटे प्रत्यारोपण चला। प्रत्यारोपण के बाद मरीज को वेंटिलेटर पर रखा गया। कुछ समय बाद वेटिलेटर हटा लिया गया है। उनके सभी जरूरी स्वास्थ्य मानक सामान्य हैं। उनकी सेहत की निगरानी की जा रही है। रात भर कुलपति ने संभाली कमान अंगदान की सूचना मिलते ही कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने स्वयं समन्वय की जिम्मेदारी संभाली। मरीज के चयन से लेकर प्रत्यारोपण की पूरी प्रक्रिया पर उन्होंने रात भर नजर रखी। KGMU में ही वह डटी रहीं। सोमवार को मरीज की सेहत में सुधार देखने के बाद ही वह घर गई। अंगदान से बच सकती हैं कई जिंदगियां डॉ.सोनिया नित्यानंद ने कहा कि अंग प्रत्यारोपण के जरिए अनेक गंभीर मरीजों को जीवनदान दिया जा सकता है। उन्होंने ब्रेनडेड मरीज के परिवारीजनों से अंगदान की अपील की। उन्होंने कहा कि संदीप कुमार के परिवारीजनों का निर्णय अत्यंत प्रेरणादायक है। उनके इस से ऐप पर पढ़ें परिवार को नई उम्मीद दी है। पीजीआई को करीब 20 साल बाद ब्रेन डेड मरीज मिला पीजीआई को करीब 20 साल बाद ऐसा ब्रेनडेड मरीज मिला, जिसके परिवारीजनों ने काउंसिलिंग के बाद अंगदान पर सहमति जताई। परिवारीजनों ने नेक काम कर मानवता की रक्षा की है। समाज के सामने मिसाल पेश की है।