रोहतक में स्थित महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी के खेल विभाग में 10 लाख रुपए के घोटाले का आरटीआई एक्टिविस्ट डॉ. जयपाल ने आरोप लगाया। इस मामले से जुड़े सबूतों को 2022 में तत्कालीन VC प्रो. राजबीर सिंह को भी दिए। लेकिन आज तक उस मामले की कोई जांच नहीं हुई, जिससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं। डॉ. जयपाल ने बताया कि 2022 में सभी सबूत खेल विभाग में हुए घोटाले के दिए थे, लेकिन VC ने जांच करवाने की बजाय फाइलों को दबा लिया। उसके बाद भी दो बार सबूत दे चुके है, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। कार्रवाई न होने पर मिलने का प्रयास किया, लेकिन VC ने मिलने का आज तक समय नहीं दिया। VC रेजिडेंस पर खर्च का नहीं दे रहे ब्योरा
डॉ. जयपाल ने बताया कि प्रदेशभर की 10 यूनिवर्सिटियों में VC रेजिडेंस पर हुए खर्च का ब्योरा आरटीआई के माध्यम से मांगा था। प्रदेश की 9 यूनिवर्सिटियों ने ब्योरा दे दिया, लेकिन एमडीयू VC की तरफ से जवाब नहीं आया, जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि वीसी रेजिडेंस पर हुए खर्च में घोटाला हुआ है। अपील लगाई, जानकारी देने से मना किया
डॉ. जयपाल ने बताया कि वीसी रेजिडेंस में करोड़ों रुपए का घोटाला हुआ है, जिसके कारण जानकारी दे रहे। इस मामले में अपील भी लगाई, लेकिन जानकारी देने से यह कहकर मना कर दिया कि वीसी रेजिडेंस की जानकारी बिखरी हुई है। जब अन्य यूनिवर्सिटी जानकारी दे सकती है तो एमडीयू क्यों नहीं। रिपेयरिंग की 5 लाख लिमिट, करोड़ों खर्च
डॉ. जयपाल ने बताया कि वीसी रेजिडेंस में 5 लाख रुपए तक रिपेयरिंग में खर्च कर सकते है, लेकिन तत्कालीन वीसी ने करोड़ों रुपए का घोटाला किया है। डॉ. जयपाल ने मांग की कि इस मामले में सरकार जांच करवाए, ताकि घोटाले को उजागर किया जा सके। बाकी उनका केस अभी राज्य सूचना आयोग में पेंडिंग पड़ा है, जिसके जवाब का इंतजार है।